कविता
"सब वर्ण,सवर्ण,पिछड़ा,सब है एक समान
हम सब मानव,एक ही ईस्वर की संतान
हम सब मानव,एक ही ईस्वर की संतान
हम सब के बराबर,अधिकार यहाँ
कोई बड़ा न कोई छोटा यहाँ
कभी राजशाही तो कभी सियासत ने हमें बॉंटा यहाँ
हम दोषी नहीं सवर्ण होना कोई गुनाह नहीं है यहाँ
समाज की इन कुरीतियों का भागीदार हमें क्यों मानते हो ?
दोषी नहीं मानते तो,हमें समान अवसर क्यों नहीं देते हो ?
हमारे पुरखो की सजा हमें फिर क्यों देते हो?
समानता की बाते भी करते हो,हमारा हक़ भी छीनते हो
हमारे पैरो में बेड़ियाँ डाल ये कौन से "न्यू इंडिया" की
बाते करते हो ?
"न्यू इंडिया" ही बनाना है तो ,अमीर-गरीब में भेद करो
धर्म-जाती में हमें न बाँटो,सियासती रोटी हम पर न सेको
हम तुम्हारे वोट बैंक नहीं जो एटीएम डाल कैश निकालो
गरीब-गरीब होता है ,गरीबी का मजहब रोटी,कपडा,
और माकान होता है, सब को सामान अवसर दो
आरछण संविधान नहीं है,जो हम पे थोपते हो
वोट लेना हो तो हम सब से सगे
होगया चुनाव फिर हम सौतेले
हमें सिर्फ वोट के समय ही याद करते हो
गोल-मोल बाते कर हमें खूब उलझाते हो
तुम्हारे "मन की बात" सुन -सुन कर अब हमारे कान पाकगये
सवर्ण के "मन की बात "भी मोदी जी कान खोल कर सुनले
हम वोट नहीं है,स्तम्भ है इस देश का
हमें भी हक़ है अपनी बात कहने का
सवर्ण ने ठान ली तो राजनीती में सुनामी आजायेगी
साथ ही देश की दशा और दिशा दोनों ही बदल जाएगी...
"कविता का उद्देश्य जातिगत आरछण का विरोध करना है ,समाज में किसी भी तरह की वैमनस्यता फैलाना नहीं है .
अपितु देश को एक नयी दिशा देना और संभ्रांत समाज का निर्माण है ,जहाँ पर सभी वर्ग ,समुदाय के लोगो बिना किसी भेद भाव के देश को प्रगति के पथ पर लेजाने में सछम बन सके. और यह तभी संभव है जब जातिगत आरछण समाप्त कर सभी वर्ग को सामान अवसर उपलब्ध कराया जाये.
इस कविता को ज्यादा से ज्यादा वायरल कर अपना सहयोग प्रदान करे .
अपितु देश को एक नयी दिशा देना और संभ्रांत समाज का निर्माण है ,जहाँ पर सभी वर्ग ,समुदाय के लोगो बिना किसी भेद भाव के देश को प्रगति के पथ पर लेजाने में सछम बन सके. और यह तभी संभव है जब जातिगत आरछण समाप्त कर सभी वर्ग को सामान अवसर उपलब्ध कराया जाये.
इस कविता को ज्यादा से ज्यादा वायरल कर अपना सहयोग प्रदान करे . "
लेखक
धर्मेंद्र मिश्रा