बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

ये नया मध्य प्रदेश है!!!


       ...कविता...

!!!ये नया मध्य प्रदेश है!!!

MP_Anthem_poetry



                                                        ये नया मध्य प्रदेश है,
                                                     ये हमारा प्यारा मध्य प्रदेश है...
                                     कृषि का गौरव ,देश की धड़कन,
                                                     देश का मान बढ़ाता, आगे बढ़ता,
                               ये नया मध्य प्रदेश है…ये नया मध्य प्रदेश है…
                                      अब हम नहीं है किसी से पीछे,
                                                  विकाश के पथ पे आगे बढ़ते जाये,
                                     नित नए कीर्तिमान बनाते जाये,
                                                    बुंलदियो की सीढी चढ़ते जाये,
                                         चढ़ते जाये… चढ़ते जाये…
                                    वन,खनिज सम्पदा और हरियाली,
                                                 सुख -शांति,धन-
धान्य से संम्पन्न,
                         ये नया मध्य प्रदेश है ...ये हमारा प्यारा मध्य प्रदेश है...
                                     
                                  कलरव करती,कल-कल करती,
                                              खेत-खलिहान सिंचित करती,
                                 नहरों को है जल से भरती,
                                             नर्मदा,सोन,ताप्ती नदियाँ बहती,


                               नदियाँ बहती...नदियाँ बहती...
                                         जलबिन नहीं कोई रिक्त शेष ,
               ये नया मध्य प्रदेश है...ये हमारा प्यारा मध्य प्रदेश है...
                            
                               विकाश की गाथा लिखती,
                           तुअर ,उड़द ,चना, सोयाबीन,
                            गेहूं और जौ की बाली,
                         घर -घर 
पहुंची बिजली,
                        गॉँव-गॉँव सड़क बनी,
                   रोजगार के  बढ़ते अवसर,
                 युवाओ में उम्मीद जगी,
                 बच्चे ,बूढ़े और जवान,
          खेतिहर,मजदूर और किसान,
           सब के चेहरों पे मुस्कान,
       एक स्वर होके सब कहते,

 

                                         ये नया मध्य प्रदेश है...ये हमारा प्यारा मध्य प्रदेश है...
                                         कृषि का गौरव ,देश की धड़कन,
                                          देश का मान बढ़ाता, आगे बढ़ता,
                                          ये नया मध्य प्रदेश है..ये नया मध्य प्रदेश है…"

                                                                                      Author  

                                                                    Dharmendra Mishra

रविवार, 14 अक्टूबर 2018

जुमला जी

गंभीर व्यंग यही है मेरा ढंग जुमला जी की और मेरे मन की बात!!!

Modi_Funny_Meme_satire_short_story

 

 रात आधी गुजर चुकी थी ,जुमला जी अपने सयन कच्छ में चद्दर तान के सोरहे थे ,तभी एक बुजुर्ग सर पे साफा बंधे प्रकट होता है .

जुमला जी को उठाते हुए -ऐ चौकीदार ...चौकीदार ...
जूमला जी हड़बड़ाते हुए "कौन ...कौन ...?"

बुजुर्ग "हम है देश की जनता ...जिसकी कोई नहीं सुनता ...?

जुमला जी"रात में तो छोड़ दो ...मन की बातो को विश्राम दो ...बड़ी मुश्किल से सोया था ...इस समय वैसे भी नींद कम आती है ...7साल इतनी जल्दी गुजर गये पता भी नहीं चला. "


बुजुर्ग 
"जगे हो तो पता चले ...सो ही तो रहे थे...हमने वोट सोने के लिए  थोड़े ही न दिए ...काम करो...काम ...
जुमला जी ,भड़कते हुए ,उठकर बैठ गए ,चद्दर दूर फ़ेंक दी "7साल से तुम लोगो ने जीना हराम  कर दिया ,हिसाब दो ...हिसाब दो ...?

बुजुर्ग " ठीक है हिसाब न दो त्याग पत्र देदो ,तुम्ही तो कहते हो फ़क़ीर हो ...झोला उठाओ और निकलो ?


जुमला जी"
70 साल की भरपाई 7साल में ही करलोगे... जा कर उनसे पूंछो ...जो 70 साल से सोये रहे क्या किया...जब मै जगूंगा तब  हिसाब दूंगा... अब...जाओ ?

बुजुर्ग -"
हे महात्म कुम्भकर्ण!...तुम तो निद्रा के जन्मदाता हो ...मतलब कभी जबाब नहीं दोगे ?"
जुमला जी "हम पे जितना ही कीचड़ उछालोगे...कोई फर्क नहीं पड़ेगा ...मै औरत का आदमी नहीं...मोटी चमड़ी का आदमी हूँ .

बुजुर्ग "
"इसलिए लोग कहते है ...बिना औरत का आदमी ,अपने मन की ही करता है ...
लेकिन मामला उलट गया औरत वाले आदमी भी अपने मन की करने लगे...महिलएं   "मी टू"  "मी टू" करती है ...मोटी चमड़ी वाले "इलू ...इलू"

जुमला जी 
"उनका पाप भी हमारे ही सर फोड़ दो ...इस मामले में मेरा साफ कहना है ...कानून अपने हिसाब से काम करती आरही है ."


बुजुर्ग -
"और ऐसे ही करती रहेगी ...लोग तो यहाँ तक कहते है ...सब तुम्हारे आदमी है ?"
जुमला जी ,ताल ठोकते हुए"सब उनके पुराने पाप है ...जो अब निकल के आरहे है ...सब धरा जायेंगे ...वादा है ...भाईयो बहनो विश्वास है ना ...?"


बुजुर्ग "

"विश्वास आप का नहीं हुआ तो जनता का क्या होगा ,फसाद की जड़ यही है  "

जुमला जी 

"विश्वास पे दुनिया क़ायम है ...सुना की नहीं सुना ...भाईयो बहनो ये जुमला  क्या मैंने  बनाया ...अभी तो विकाश ने रफ़्तार पकड़ी है ."

बुजुर्ग 

"मतलब की मतलब से मतलबी हो  ,हवा में रहोगे ,हवा हवाई बाते करोगे ?"
जुमला जी "बस देखते जाओ हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई जहाज से उड़ेंगे ?  "
बुजुर्ग"
पहले  जो वादे किये उसका क्या ...?15 लाख तो चलो मै भूल गया ...भूल कहे गया मन मार लिया ...
बांकी का हिसाब दो ...खूब मन की बाते की ."


जुमला जी ,अपने चिर परिचित अंदाज में -
"भाईयो बहनो मन की बात है कह देता हूँ ,दिल में नहीं रखता ...
फकीरी स्वाभाव में है."


बुजुर्ग -
"ऑंखें निकाल कर धूल मल कर ,फिर लगा देते हो. ..कम से कम ऐसे ही लाखो का सूट हम फकीरो के लिए भी बनवा दो."
जुमला जी -

 "इंतजार करो ...2024 में फिर सरकार बनाने दो ...वो काम करूँगा की दुनिया हैरान होजायेगी ."

बुजुर्ग "आह !!!
हैरान तो नहीं ...परेशान जरूर हो जायेगी."


story ,political stair ,man ki baat  


                                                               ~धर्मेंद्र मिश्रा~                                   

रविवार, 7 अक्टूबर 2018

ऊंट किस करवट बैठेगा,आगामी चुनाव के मद्देनजर चुनावी विश्लेषण

            ऊंट किस करवट बैठेगा...आगामी चुनाव के मद्देनजर चुनावी विश्लेषण... 


"मप्र  चुनाव  में  राफेल  डॉलर की  बाते  जैसे आँख मरना, होठ हिलाना और मामला सेट होजाना.
राहुल गाँधी का चुनाव प्रचार करना जैसे गरजे बरषे बादल ,जमीं पे आते आते हवा में ही सूख जाना .
कमल नाथ का प्रचार करना जैसे लाल दन्त  मंजन की रिब्रांडिंग करके,पतंजलि से बेहतर बताना ..."
मप्र  चार जोन में बटा है ,जो विविधिता से भरा हुआ है  खान पान बोली ,जाति प्रतिसत अलग अलग है ,जहाँ एक सी रड़नीति कारगर नहीं हो सकती है .



उदाहरण ...विंध्य छेत्र,ग्वालियर के समीपवर्ती जिले जहाँ  sc/st act...मामला गरम है,सवर्णो की  वोट की स्थिति ऐसी है जैसे "सोमबारी बाजार में माल रेडी के भाव",जिसका कारण sc /st कानून ,पदोन्नति में आरछण. आरछण को लेकर बढ़ता  सवर्णो आक्रोश ,बेरोजगारी ,शिवराज सिंह की गलत बयानी ,जो रायता फैल चुका है .बीजेपी कुछ भी करे उसका कोर वोट बैंक उसके पाले से निकल कर फाउल रेंज पे खड़ी है. बीजेपी को  गोल पोस्ट में डालने के  अब मूड में है ,जिसका लाभ  कांग्रेस ,सपाक्स और अन्य बांकी दल उठाएंगे.



बीजेपी के लिए राहत की बात ये है की मप्र  सहित बांकी चुनावी राज्जो में पहली बार कुछ नए समीकरण तैयार होरहे है ,sc/st और अन्य पिछड़ा वर्ग मतदाता का रुझान बीजेपी की तरफ जाने के संकेत है  ,sc /st एक्ट, आवास और उज्वला,जैसी योजनाओ से उनके अंदर एक विश्वास बनता दिख रहा है .जिसका लाभ आज तक कांग्रेस और बहुजन उठाती रही है ,लेकिन वर्तमान स्थिति इसके उल्ट है .परिवर्तन परिस्थिति के अनुसार बदलते है और इस बदलते समीकरण में कांग्रेस के लिए अवसर बन सकता है ,खोने के लिए तो कुछ है नहीं ," नए सिरे से उसे खुद को पुराने ढर्रे से हट कर एक नई राह बनाने की अवस्य्क्ता* है.



बिना गठबंधन के भी वो फिर से सत्ता में वापिस आ सकता है,बशर्ते सही समय में सही पत्ते खोले ,व्यक्ति और रड़नीति समय के हिसाब से फंक्शन करे,जनता का फिर से  विस्वास जितने की जरुरत है न की राहुल गाँधी की ताजपोशी .


"बदलते परिवेश के साथ हालात को बदलना और हालत से समझौता करना एक कुसल रणनीतिक की पहचान है ,एक बार बाजी अपने हाँथ में आजाने पर किसी पर भी दाव लगाया जा सकता है..."
 विषय पर लौटता हूँ ...दूसरा उदाहरण मालवा ,निमाड़ में किसान नाराजगी को भुनाना ,प्रमुख जिलों में व्यापम के मुद्दे को हवा देना ,भृष्टाचार ,जिसपर कांग्रेस को विशेष ध्यान देने की जरुरत है ,व्यपम को छोड़ कर १५ साल में कांग्रेस एक भी भृष्टाचार  को सामने ला पाने में विफल रही है .रोजगार मुद्दा एक केंद्रीय विषय है जिसपर कांग्रेस को सिर्फ बाते ही नहीं एक ब्लू प्रिंट बनाने की जरुरत है.



अगर कांग्रेस को सत्ता पे फिर से काबिज होना है तो बाबा रामदेव की तरह ,आँख भी मारना ,होठ भी हिलाना ,वक़्त पड़े तो अपनी ब्रांडिंग के लिए चुनावी  दंड बैठक भी लगानी पड़ेगी(विशेष संदर्व में ये बात है)... 15 साल के जख्म को कुरेद कुरेद कर ,हर जख्म के लिए अलग अलग मरहम का डेमोंस्ट्रेशन देना पड़ेगा...समय बदला है मार्केटिंग के तौर तरीके बदल गये है .


फायदा नहीं फीचर पर अब लोग ज्यादा ध्यान देते है ,बाबा के प्रोडक्ट को लोग फीचर देखकर ही तो खरीदते है...बाबा का प्रोडक्ट के कॉम्पोनेन्ट पर विशेष जोर होता है .दन्त साफ हो या न हो लोग यही सोचते है ,दन्त अंदर से मजबूत होरहे है ,लम्बे समय तक टिकाऊ रहेंगे. कांग्रेस के नेता  बाबा की तरह हर कला में माहिर हो या न हो अपने आपको ढाल ले तो एक बेहतर विकल्प दे सकते है एक सुनहरा मौका है उनके पास...


मप्र में बीजेपी हो या कांग्रेस शिवराज सिंह  के अलावा और किसी नेता की छवि सर्वत्रिक नहीं है ,लेकिन जैसा की मैंने पहले कहा ,छवि एक महत्वपूर्ण  कारक है ,व्यक्तिगत और व्यापारिक ब्रांडिंग के परिपेच्छ में  लिहाजा शिवराज सिंह की छवि एक नकरत्मक बनती दिख रही है जिसका लाभ ज्योतिरादित्य सिंधिया उठा सकते है .मप्र की जनता उनकी कार्य पद्द्ति से वाकिफ तो नहीं है लेकिन एक सकारत्मक छवि है ,अपने दृढ़निश्चय और कर्मठता से सकारात्मक असर पैदा कर माहौल को कांग्रेस के पछ में कर सकते है...



"चुनावी पृष्ठ भूमि पर अपनी पुस्तक "शब्दारन्य"  में "चरणवन्दन समारोह" नाम से एक लघु उपन्यास लिखा है जो  दो भागो में है जिसका पहला भाग ही प्रकाशित किया है जो खास तरह की रड़नीति पर आधारित है . राजनीतिक व्यक्तियों केलिए एक बेहतर आईडिया ,डायलॉग  पंच  चुनावी स्पीच के लिए फायदेमंद हो सकता है..."

                                                                                                                                         धर्मेंद्र मिश्रा ...

सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

अध्यात्म विज्ञानं के गूढ़ तत्व रहस्य ,Wisdom of Life

                                  !!!अध्यात्म विज्ञानं!!!

साधना बाहरी और आंतरिक परिस्थिति को समरूप ,समरस एक सूत्र में बांधने की चेष्टा, साधन और माध्यम है,जिसमे योग और तप अध्यात्म को प्राप्त करने में एक कारक होसकते है केवल इन्ही रास्तो में चलकर अध्यात्म को प्राप्त किया जा सकता है ऐसा बिलकुल भी नहीं है .


Author ,Writer ,Philosopher,philosophy,


संसार में जितने भी तरह के अविष्कार ,धर्म शास्त्रों का सृजन हुआ वो सब अध्यात्म की ही देन है.आइंस्टीन ,स्टीफन हॉकिंस दुनिया के सबसे बड़े खगोल और भौतिक शास्त्री है जिन्होंने आंतरिक सूछ्मता के विज्ञानं को समझा .विज्ञानं का अर्थ जानना होता,इस परिभाषा को अगर सत्य माने तो फिर एक ही विज्ञानं है .


"आत्म विज्ञानं" बांकी जितने भी तरह के विज्ञानं मानव द्वारा बनाये गए है ,वो सब इन्द्रिय बोध के लिए चीजों को आसान तरीके से समझने के लिए बनाये गए है .बाहरी परिस्थिति को जानने से पहले स्वयं को जानना अत्यंत आवश्यक है ,क्योकि जब तक स्वयं के अंतरात्मा के विज्ञानं को नहीं समझते ,बाहरी परिस्थिति से संपर्क ,सम्बन्ध स्थापित करना संभव नहीं .


सम्पूर्ण भ्रह्मांड ऊर्जा का बंधन है ,आंतरिक ऊर्जा के सक्रिय अवस्था में होने के तदुपरांत व्यक्ति आश्चर्य की सीमा को लाँघ जाता है,जिससे जिज्ञासा का जन्म होता है ,कहने का तात्पर्य आंतरिक ऊर्जा की सक्रिय अवस्था का परिणाम ही जिज्ञासा है.


आइंस्टीन ,स्टीफन हॉकिंस के जीवन पर यदि प्रकाश डाले तो मालूम होता है ,ये दोनों ही औसत मानसिकता के व्यक्ति थे परन्तु स्वाभाव से अत्यंत ही जिज्ञासु इसी जिज्ञासा के कारणवस कई महत्वपूर्ण खोज की जिन्हे सर्वकालीन दुनिया का सबसे बुद्दिमान व्यक्ति समझा जाता है.संछेप में ...


गौर करने वाली दो बाते है "जिज्ञासा और बुद्दिमत्ता"बारीकी से विवेचना करने पर ये दोनों ही अलग अलग है बुद्दिमत्ता "इन्द्रिय जनित संग्रह" की अवधारणा है,जिसे साधारणतः याददाश्त भी कह सकते है,किसी कारण और परिस्थिति में कुछ सामन्य से अलग व्यवहार के तौर पर भी समझा जासकता है .


जबकि जिज्ञासा स्वछंद मानसिकता की उन्मुक्त अवधारणा है ,जो भार रहित निर्वात ऊर्जा जो परमाणु से भी परे है (परमाणु भी ऊर्जा का बंधन है ,जो न्युट्रान रूपी निष्क्रिय बल ,प्रोटान रूपी सक्रिय बल इलेक्ट्रान के सक्रिय गतिमान फोटोन कणो से मिलकर बनता है )
भावार्थ  Meaning...
"जीवन का महत्व विस्तार से नहीं अपितु आत्मबोध,आंतरिक सूछ्मता में है"