क्रिकेट की हार है हमारी नहीं समय आत्ममंथन का है .
लोग जितना बिकाऊ
क्रिकेट टीम की हार पर दुखी है ,इतना दुखी कभी
जवानो की सहादत पर नहीं होते ,समझते है सैनिक
को का फर्ज है सहीद होना .असल में बुराई उन क्रिकेटर में
नहीं हम में है ,हम लोग खुद
दोगलेपन का सीकर है ,हमरा राष्ट्रीय खेल हॉकी है ,लेकिन उसकी जीत पर हम इतना खुस नहीं जितना
क्रिकेट टीम की हार पर ,अगर इसका उल्टा
होता तो भी हमें सायद रत्ती भर भी फर्क
नहीं पड़ता. निसंदेह क्रिकेट टीम ने देश का
सर निचे झुकाया ,कल तक आप मजाक
उड़ाते थे अब वो लोग आप का उढ़ायेंगे ,हरने के बाद भारतीय क्रिकेटर पाक क्रिकेटर के साथ हसी ढीटोली करना क्योंकि
हर जीत इनके लिए खेल का एक भाग है ,अधिकतर प्लेयर स्थापित खिलाडी है ,निकले जाने का कोई डर नहीं,जिसको डर था उसने अच्छा खेला ,पैसा और सोहरत बेसुमार है ही. बाकि हार की तरह इस हर को भी भुला देंगे ,खेल का एक एक हिस्सा कह कर किनारा कर लेंगे ,लेकिन भारत की जनता को कौन समझाए ऐसे दुखी है जैसे आज अनाथ
होगये हो ,पुरे देश में सन्नाटा है ,जैसे साप सूघ गया हो ,इतना दुःख और प्यार
अगर बाकि चीजों में नहीं
दिखाई देती ,केवल भारत और पाक मैच में ही दिखती है ,एकता और भाई चारा केवल मैच तक ही सिमित रहती है
,बाकि समय तो एक दूसरे को
निचा दिखने में ,दूसरे के सुख में ही दुःख ढूढ़ने में लगे रहते है .यदि हम
अपनी सोच को सही दिशा दे, देश के बिकाश में
सहभागी बने ,देश की भलाई से
जुड़े सभी मुद्दों में ऐसी तरह एकता दिखाए
तो तस्वीर कुछ और हो सकती है ,भारत में पाक के झंडे न लहराए जाते ,पाक की जीत पर पटके न फोड़े जाते,राजनीतिक पार्टियों के कुचक्र में न फसते , अगर आपमें और हम में एकता होती .लेकिन हमने अपनी सोच का
दायरा सिमित कर लिया है ,देश के विकाश से
जुड़े सभी मुद्दों को सर्कार पर छोड़ दिया ,और सरकार ने पूंजीपतियो पर ,लेकिन धंधे का
उसूल है पहले अपना फायदा देखो दुसरो का बाद में अगर ऐसा नहीं होता तो करोडो टर्न
ओवर कर रही बड़ी -बड़ी कम्पनिया लाभ काम
होने पर हजारो एम्प्लोये को एक झटके में नौकरी से बेदखल न करती .हर एक वयक्ति अपनी जिम्मे दारी
से बचना चाहता है ,देश के विकाश की जब बात आती है ,तब एक दूसरे सिर्फ कमी खोज ते है .लेकिन समांधान कुछ नहीं
निकलता.क्योंकि अपनी गलती किसे को नहीं दिखती
आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है ,और ऐसी तरह चलता रहेगा .
फिर लौटेते है खेल की तरफ लेकिन क्रिकेट की नहीं हॉकी की
तरफ जिसने आज देश का मान बढ़ाया ,पाकिस्तान पर
शानदार जीत दर्ज की ,लेकिन उन
खिलाड़ियों के पास न नामहै और न सोहरत ,
बच्चे -बच्चे की जुबा पर कोहली का नाम रहता है
लेकिन हॉकी के किसे प्लेयर का नाम याद नहीं होगा लेकिन इनकी देश भक्ति पैसो के लिए खेलने वाले क्रिकेटरों से कही
ज्यादा है ,हाथ पर काली पट्टी बांध
कर पाकिस्तान की नापाक हरकतों का विरोध
जताया ,ये जाताना जरुरी है की खेल देश से हित से बढ़ कर नहीं ,खैर सेना के प्रति
हमेसा से हॉकी प्लेयर्स ने सम्मान दिखाया
है और हमेसा हमारी आर्मी के सपोर्ट में
आगे आती है ,वही दूसरी तरफ bcciहमेसा लालायित रहरति है पाक से क्रिकेट खेलने
को लेकर बस सरकार की अनुमति की दरकार है .
ये समय है हमें
खुद के अंदर झाँकने की हमारे असली हीरो पहचानकरने की,वो लोग जो देश का सम्मान बढ़ाते ,और वो लोग जो सिमा
पर दुश्मनो से लड़ते है ,या फिर वो लोग जिनके
लिए पैसा और सोहरत पहले है ,कुछ भारतीय कलाकारों की तरह पाकिस्तान कुछ भी
करे ,लेकिन नाच गाने का साझा
कार्यक्रम चलता रहे .