शनिवार, 4 मई 2024

manidhari sharp aur kalmuha billa short story hindi

 मणिधारी सर्प और कल मुहा बिल्ला 


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एक समय की बात  है  दिलबाग  वन  बहुत  से  चूहों  से  भरा पूरा  था, जहाँ  शिकार  हो  वहां  शिकारी  का  होना  स्वाभाविक  था।

 उसी वन में कलमुहा  नाम  का  एक  बिल्ला भी रहता था।उसका बड़ा आतंक था बेवजह मनोरंजन के लिए भी चूहों  का  शिकार  करता। वहीं चूहों ने मिलकर राय मश्वरा किया, कलमुहे के भय और आतंक  से  बचने  का  एक  ही  उपाय  है,  इसे  जितनी  जरुरत  हो हम इसे उतने चूहे दे दिया  करें। 

कलमुहे को भी चूहों का ये प्रस्ताव पसंद आया, भाग-दौड़ से अच्छा है, बैठे बिठाए शिकार खुद चल कर आएगा, खायेगा और मौज करेगा। 

कलमुहे को जब भूंख लगती एक बड़े से टीले पे चढ़ कर उद्घोषणा  करता  "दो चूहे, चार चूहे हाजिर  हों। " जब जितनी भूंख होती फरमान जारी कर देता। 

ऐसे  ही  उसके  मजे  से  दिन  कट  रहे  थे। एक दिन  भोजन  और  शिकार  की  तलाश  में  बटला नाम  का  एक  सयाना  करायट मणिधारी  बूढ़ा  सर्प  आधमका, कलमुहे  का  तमाशा  देख  कर  मन  ही  मन  विचार  करने लगा ; इसने  तो  अच्छा  सिस्टम  बना  रखा है,

उसे भी  कुछ  ऐसा  ही  करना  चाहिए लेकिन ये  चूहे  उसकी   बात   ऐसे   मानेगे   नहीं  ,कलमुहे  से  सीधा  भिड़ गया  तो  कहीं  खुद भी    शिकार  हो  जाए ,सो  कुछ  ऐसी  योजना  बनानी  पड़ेगी, सांप  भी  बच  जाए  और  चूहे भी  अंदर  हो  जाएँ। 

इन्हें  डरा  कर  नहीं, मुर्ख  बना  कर  इनका  शिकार  करना  चाहिए । मन  ही  मन  योजना  बनाने  लगा। 

एक  दिन  कलमुहा मुफ्त  का  माल हजम  कर  चूहों  को  खा  पी  कर  वर्जिश  करने  निकल  गया, उसके  गुफा  के  पास  टीले  पे बटला  मणि चमकाते हुए  फन फैलाकर  लहरा  लहरा  कर  नाच  गाना करने  लगा। 

चूहे भी  बड़े  कौतुहल  से  उसकी  तरफ  देखने  लगे  , आपस  में  काना  फूसी करने  लगे;

  ये  कौन  है, कहाँ से  आ गया,  है  तो  भयंकर  लेकिन  सज्जन  मालूम पड़ता  है। 

तभी बटला, चूहों  से  “ तुम्हें  उस  कलमुहे  से  डरना  नहीं  चाहिए,  मैं  तुम्हें  बचाऊंगा, मजाल उसकी जो तुम्हें नुकशान पहुंचाए ।  

जब तक मैं  जिन्दा  हूँ,  उस  कलमुहे  को  तुम्हारे  पास  भी  नहीं  फटकने  दूंगा, चलो मेरे  साथ ।"

चूहे पहले  से  ही  डरे  थे, कैसे  भी  कर  के  उस   कलमुहे  से  निजात  पाना  चाहते  थे  सो  उन्हें  बटले  पर  विश्वास  कर  लिया,  चूहों  को  भी  लगा, ये  इतना  भयंकर  है  इसके  रहते  वो  कलमुहा  हमारे  पास  भी  नहीं  फटकेगा। 

बटला के  पीछे- पीछे  चलने  लगे। 

बटला  एक  बड़े  से  झाड़  के  पेड़  के  पास  रुक  गया, जहाँ  उसने  बहुत  सी  बामियाँ  बना  रखा  था। 

बटला, चूहों  से  “ अब  तुम  लोग  इन  बामियों  में  आराम  से  रहो और  मैं  पेड़  पर  से  तुम्हारी  रक्षा करूँगा। 

सभी चूहे  उन  बामियों  में  सरसरा  के  घुस गए। 

अब बटला  का  पेट  बड़ा  था  सो  उसे  चूहे  भी  ज्यादा  लगते  थे, दर्जनों  चूहे  रोज  ही  खा  जाता,  आराम  से  पेड़  पे  चढ़कर  करवटे बदलते लेटा  रहता। 

कई दिन  हुए  चूहों  की  संख्या  लगातार  घटती  ही  जा रही  थी, चूहे  अब  डर के  मारे बामी  से  निकलना  ही  बंद कर  दिया, वहीँ दुबके रहते। 

दिन दो दिन हुए जब चूहे बामी से निकले ही  नहीं  , बटला  ने  सोचा  कुछ  गड़बड़  तो  नहीं  कहीं  चूहे  भाग  तो  नहीं  गए। 

जैसे ही  बटला  बामी  में  घुसा सभी  चूहे  भरभरा  के  बाहर की ओर निकल  भागे  …कलमुहा पहले  से  ही  चूहों  की  तलाश  में  मारा  मारा  फिर  रहा  था।  भूंख  के  मारे  बुरा  हाल था। 

चूहों को  देख  कर  उनकी  तरफ  भागा  , पीछे  से  बटला  भी  उसे  आता  दिखा  , कलमुहा  समझ  गया  इसी  की  वजह  से  उसका  शिकार  हाँथ  से  निकल  गए। 

आव देखा    ताव  बटला  पे  टूट  पड़ा  , थे  तो  दोनों  शिकारी    ये  कम    वो  कम  , एक  दूसरे पे  सीधा  हमला करने  की  हिम्मत    हुई। 

घात लगा  कर  एक  दूसरे  के  इर्द - गिर्द  फिरने  लगे  , एक  कदम  आगे  लेते  तो  दो  कदम  पीछे  खिसकाते। 

ऐसे ही  घंटों  चलता  रहा। 

बटला बूढ़ा  होने  की  वजह  से  जल्दी  ही  थक  गया, सोचा  इससे  जान  छुड़ाई  जाए  ,कलमुहे  को  फुसलाते  हुए  “ शिकारी -शिकारी हम  आपस  में  क्यों कर रहे लड़ाई, चलो दोस्ती कर लो भाई ?"

कलमुहा  “ बड़ा  धूर्त  है  तू  मेरा  शिकार  ले  भागा  ,पूंछता  है  लड़  क्यों  रहे  हैं। ”

बटला ,हँसते  हुए  “ शिकार  तो  बहुत  दूर  निकल  गए, अब  हाँथ  नहीं  आने  वाले। "

कलमुहा मन  ही  मन;  साला  ये  चूहे  फिर  हाँथ  से  निकल  गए इसकी  वजह से, अब  इसे  ही  खा  कर  अपनी  भूंख  मिटाया जाए।  बटला से  “ ठीक  कहा  भाई  तुम  ने अब  पानी  पी कर  ही  काम  चलाना  पड़ेगा।  "

सामने नदी  में   पानी  पीने  के लिए  आगे  बढ़ा , बटला  ने  सोचा  चलो  वो  भी  थोड़ा  पानी  पी कर  थकान मिटा ले। 

बटला पानी  पीने  के लिए जैसे ही  अपनी  मुंडी  पानी  में  डालता  हैं ,पीछे  से  कलमुहे  ने  गर्दन  मरोड़  दी। 

खा पी कर वहीँ चटकारे लेते हुए ;साला शेर के मौसे से पंगा लेता है। 

  

Note-

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रविवार, 28 अप्रैल 2024

wisdom quote in Hindi

 

नीति वाक्य 

  हर व्यक्ति स्वयं को अच्छा बनाना चाहता है ,किन्तु अच्छा वही बनता है , जो सदाचार ,सत चरित्र, सत आचरण को अपनाता है।


"सांप निठुर होता है ,दुष्ट व्यक्ति भी निठुर होता है ,फिर भी दुष्ट व्यक्ति सांप की अपेक्षा ज्यादा निठुर होता है ,क्योकिं सांप तो औषधि मंत्र से वश में हो सकता है किन्तु दुष्ट व्यक्ति का निवारण नहीं किया जा सकता हैं।"


"दुष्ट व्यक्ति विद्या से भूषित होने पर भी त्यागने योग्य है , जैसे सर्प के मस्तक पे मणि होने से क्या वो भयंकर नहीं होता ?"


"परदेश में विद्या मित्र है ,घर में माता मित्र है ,रोगी का औषधि मित्र है और मृत व्यक्ति का धर्म ही मित्र है।"


"शरीर और गुण इन दोनों में बहुत अंतर है ,शरीर थोड़े ही दिनों तक रहने वाला है वहीँ गुण प्रलयकाल तक रहते हैं।कोयल की सुंदरता ;स्वर है ,स्त्री का सतीत्व, कुरूप का विद्या  और साधुजन का क्षमा।"


"अग्नि ब्राह्मण का गुरु है और ब्राह्मण सब वर्णों का गुरु है ,स्त्री का एक मात्रा गुरु उसका पति है और अतिथि सब का गुरु है।"


"स्वाभाविक मित्र ,आज्ञाकारी पुत्र ,मन के अनुकूल स्त्री ,हितकारी कुटुम्बी जन मिलना दुर्लभ है।"


"इस असर संसार में ;सज्जन संगती,ईश्वर भक्ति और गंगा स्नान इन तीनों को ही सार समझना चाहिए।"


"अन्न देने वाला ,भय से बचाने वाला ,विद्या पढ़ाने वाला ,जन्म देने वाला ,संस्कार करवाने वाला ये पांच पिता होते हैं।"


"अपनी जननी ,गरूर पत्नी ,ब्राह्मण -पत्नी , राज पत्नी ,गाय ,धात्री ,और पृथ्वी ,ये सात माताएं होती हैं।"


"विद्या के समान नेत्र नहीं, सत्य के समान तप नहीं ,अशक्ति के समान दुःख नहीं और त्याग के समान सुख नहीं।"


"बुद्धिमान व्यक्ति स्वयं को अजर और अमर समझ कर विद्या और धन का उपार्जन करे ,मृत्यु केश पकड़े खड़ी है यह सोच कर धर्म करे।"



"ब्रह्मज्ञानी के लिए स्वर्ग ,वीर के लिए जीवन ,जितेन्द्रिय के लिए नारी और निर्लोभी के लिए समस्त संसार तिनके के समान है।"



"शक्तिशाली के लिए बोझ क्या ?

व्यापारी के लिए दूर क्या

विद्वान् के लिए विदेश क्या

और मधुरभाषी के लिए शत्रु क्या ?"



"सत्य ने ही पृथ्वी को धारण कर रखा है ,

सत्य से ही सूर्य तपता है ,

सत्य से ही वायु चलती है ,

सब कुछ सत्य में ही स्थिर और नित्य है।"



"समुद्र में वृष्टि ,भरपेट खाये हुए को भोजन

समृद्धवान को दान ,दिन में दीपक का प्रकाश जिनका कोई अर्थ नहीं।"



"दरिद्रता धीरज से ,करूपता अच्छे स्वाभाव से ,

कुभोजन गर्म रहने से और पुराना कपडा भी स्वच्छ होने से सोभा पता है।"



"दरिद्र के लिए सभा और भोजन समाप्ति पे जल पीना विष के समान है। "


  

"जो पर स्त्री को अपनी माता के समान ,

पर धन को मिटटी के ढेले के समान ,

समस्त संसार को अपने ही समान समझता है वास्तव में वही पंडित है।"


"समय कैसा है ?

  मित्र कौन है

देश कौन सा है

आय और व्यय कितना है

मैं किसका हूँ

और मेरी शक्ति कितनी है

इसका हर समय विचार करना चाहिए।"



"अग्नि ,गुरु ,ब्राह्मण ,गौ ,वृद्ध ,बालक और कुमारी ,इन्हें कभी पैर से नहीं छूना चाहिए।"



"जिनमें न ज्ञान है न शील है न गुण है न धर्म है वे मनुष्य पृथ्वी पे चलते फिरते पशु के समान हैं।"


 

बुधवार, 24 अप्रैल 2024

modi ki guarantee a true story

 एक बड़ा ही दिलचस्प वाकया  कहें या किस्सा साझा करता हूँ ;

 एक दिन एक टीम -टाम वाली मोबाइल की दुकान पे फ़ोन लेने गया ,डिस्प्ले में लगे एक सुन्दर फ़ोन पर मेरी नजर पड़ी ,मेरे इशारा करने भर की देर थी कि दुकानदार ने वो फ़ोन मेरे हाँथ में रख दिया। 

मैंने दुकानदार से कहा " भइया ,कितने साल चलेगा ?"

दुकानदार " 5 साल कम से कम चलेगा। "

फिर मैंने कहा " क्या गारंटी देते हो ?"

दुकानदार  "  मोदी की गारंटी है। "

मैंने उस फ़ोन को पलट कर पीछे देखा ,उसमें MI  लिखा था ,मैंने कहा " भइया ,ये तो चाइना मॉडल है। "

दुकानदार ,उस फ़ोन की सारी खूबी गिनाने लगा ,मैंने कहा "बस भी करो ,नहीं लेना। "

दुकानदार  " कैसी बात करते हो , मार्किट में यही चल रहा है ,लोग बाग़ बिना सवाल -जवाब किये आंख बंद कर इस फ़ोन को ले जाते हैं। "

मैंने कहा " बहुत अच्छी बात है ,एक काम और करो ...मोदी की गारंटी का एक पट्टा लो और अपने माथे पे चिपका लो और खुद भी डिस्प्ले में लग जाओ , अंधभक्त बिना सवाल -जवाब किये महंगे दामों पे खरीदेंगे। "

फिर मैंने उसकी दुकान से फ़ोन ही नहीं लिया , सड़क से निकला तो जगह -जगह पे मोदी विज्ञापन देखते हुए मोदी की गारंटी पे विचार करने लगा। ये कैसा समय है ,कैसा दौर है ?


एक तरफ मोदी 100 करोड़ से ज्यादा देश की आबादी से कहते हैं ; भाइयो और बहनो आप को 5 किलो रासन मिल रहा है की नहीं  ? भीड़ कहती है ; हाँ ,मिल रहा है। 

 फिर मोदी कहते हैं ; ये मोदी की गारंटी है ,आगे भी मिलता रहेगा।

 खुद तो देश के साधन -संसाधन पर अपने चन्द उद्द्योगपति मित्रों के साथ मौज -मस्ती ऐयासी करेंगे , चाटुकार मीडिया की जेबें भरेंगे ,दूसरी तरफ देश की गरीब जनता से अपेक्षा यही रखते हैं ,5 किलो रासन के लिए वोट दें, और लोग देते भी हैं। 

 लोगों को मुर्ख नहीं बनाया जा रहा ,लोग पहले से ही मुर्ख बने बैठे हैं , बस उसे हवा देना। सरकार द्वारा उसी झूँठ को बल दिया जा रहा , शोषण को पोषण आहार की तरह परोसा जा रहा है। 

अपने फायदे के लिए तो हर कोई बैठा है ,लेकिन अपने फायदे के लिए किसी को खड्डे में नहीं धकेलना चाहिए , मुमकिन है आप छल -कपट बेईमानी से आगे बढ़ जाएँ ,मान -प्रतिष्ठा भी पाले किन्तु एक इंसान के रूप में आप स्वयं को ही खोदेंगे। फिर आप वस्तु का नहीं ,वस्तु ही आप का भोग करने लगेगी। 

सतकर्मों के प्रति आपकी वृत्ति कम होने लगेगी , भोग विलाश की अभिलाषा में वृद्धि होने लगेगी , फिर दुष्कर्म दुराचार ,पाखंड की ओर इंसान स्वयं ही बढ़ने लगता है। 

कुलमिलाकर, झूठ की भी अब गारंटी होने लगी है ,लोग उसे सहज भाव से स्वीकार करने लगे हैं। बीते 10 साल में हमें ये बड़ा परिवर्तन देखने को मिला।  

सोमवार, 22 अप्रैल 2024

Hanuman ji Bhajan Hanuman Jaynti 2024

Rambali Mahabali Bajarangbali | Hanuman Bhajan Vishnudhar Mishra, Dharmendra Mishra | Hanuman Janmotsav 2024 ...

Hanuman, a prominent figure in Hindu mythology, is revered for his unwavering devotion to Lord Rama. He is known for his strength, courage, and loyalty, depicted in the epic Ramayana. Hanuman is often worshipped for his ability to overcome obstacles and protect devotees from harm. His birthday, celebrated as Hanuman Jayanti, is marked with prayers, chants, and temple visits by devotees seeking his blessings. Hanuman symbolizes righteousness and selfless service, inspiring millions with his exemplary character and devotion. हनुमान जी हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण देवता हैं, जिन्हें भगवान राम का अद्वितीय भक्त माना जाता है। उनकी शक्ति, साहस, और वीरता को रामायण में उत्कृष्टता से वर्णित किया गया है। हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को संबल, शक्ति, और सुख मिलता है। उन्हें बुद्धिमान, वीर, और सेवाभाव का प्रतीक माना जाता है, जो लाखों लोगों को प्रेरित करता है। हनुमान जयंती को उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। A Devotional Song "Rambali Mahabali Bajarangbali " अंग अंग लाल रंग बजरंग रंग चढ़ा राम रंग बिराजे राम संग राम का चोला सदा राम ही बोला राम नाम मिसरी ढली..... रामबली महाबली बजरंग बली करते सदा जो भगतों की भली काल हो कलयुग हो भय भी भय से कांपे तुम सहाय जिसके सारी दुनिया नापे राम भक्त हनुमान धरते जो तुम्हारा ध्यान उनकी हर अला बला टली..... रामबली महाबली बजरंग बली करते सदा जो भगतों की भली राम के दुलारे संतन सुखकारी तुम सा न कोई हनुमत बलधारी निर्बल के तुम ही बल तुम हो सबसे सबल तुमको प्रिय है राम की गली..... रामबली महाबली बजरंगबली करते सदा जो भक्तों की भली Listen & Enjoy !! Don't forget to leave your response in comment section Subscribe I Like I Comment and never miss any videos. Audio / Video Credits : Lyrics : Dharmendra Mishra Singer : Vishnudhar Mishra Music : Vishnudhar Mishra Music Label : V M Bhakti Music Video : Tushar shrivastava

बुधवार, 17 अप्रैल 2024

bjp washing machine

                                                                  

" अवसरवादी राजनीति " 

अवसरवाद राजनीती  के  लिए  कोई  नई बात  नहीं  है ,आजादी के बाद से ही होता आ रहा है ,जिसकी गाहे बगाहे इतिहास और राजनीती के जो जानकर है जिक्र करते रहते हैं। लेकिन बीते दशक या कहे 2014 के बाद से  अवसरवादी राजनीती में बाढ़ सी आ गई है। इस अवसरवादिता को लोग

 "बीजेपी की वाशिंग मशीन"भी कहते हैं। ये वाशिंग मशीन काम कैसे करती है   जैसे आम वाशिंग मशीन काम करती है , गंदे कपडे डालो ,साफ़ कपडे बाहर आगये।  वैसे ही ये बीजपी की वाशिंग मशीन है।  विरोधी दल के नेता पर कितने ही गंभीर भ्रष्ट्राचार के आरोप क्यों न लगे हों ,बीजेपी में शामिल होते ही ,नापाक से पाक साफ़ हो जाते हैं। ईमानदारी के मसीहा ,राष्ट्रवादी नेता हो जाते हैं।  मिडिया द्वारा उनकी ऐसी छवि गढ़ दी जाती है। 

 कोई एक नाम नहीं  कितने ही विपक्ष के नेता 2014 के बाद से बीजेपी के हो गए ।हम आपके हो गए सनम।  गीत गाने लगे , सुबह से लेकर शाम तक मोदी के तारीफ के पक्के पुल बांधते रहते हैं।  

इनमें से तो कुछ ऐसे नाम हैं जो घोर कोंग्रेसी जिन्हें कह सकते हैं। वे भी बीजेपी के पाले में चले गए। 

कुछ जिन पर गंभीर भ्रस्टाचार के आरोप थे ,वे खुद को बचाने के लिए बीजेपी का दामन थाम लिया। 

नीतीश कुमार  कब  किस  तरफ  होते  हैं  ,जिस  तरफ  होते  हैं  फिर  क्या  कहते  हैं  ,उस  पर  चर्चा  करना  भी  सारहीन मालुम पड़ता है। 


 , प्रमोद कृषणम  जैसे  नेता  tv पर बैठ  कर मोदी के कुतर्कों पे मजबूती से कभी तर्क दिया करते थे , हम ने सुना। अब मोदी भक्त हो गए , उनके  भाव  ऐसे  होते हैं ;न भूतो न भविष्यते ,मोदी से महान कोई है ही नहीं।  उनके  कल्कि  धाम  के लिए  चंदा  ज्यादा  मिल  गया  होगा ?

गौरभ वल्ल्भ , जब  कांग्रेस  में थे tv पर बैठ  कर पानी  पी -पी  कर मोदी सरकार को कोषते  थे। अब इनका  कोष भी सरकारी  राहत  कोष से भरा तो ,मोदी दूर दृष्टा हो गये । 


साम ,दाम ,दंड ,भेद ये अंगेजों की पालिसी रही है। वही पालिसी मौजूदा सरकार भी लागू कर रही है , कई राज्यों में तो चुनी हुई सरकार तक गिरा दी गई ,जैसे महाराष्ट्र ,गोवा ,बिहार ,मध्य प्रदेश ,कर्णाटक ,अरुणाचल प्रदेश ,मणिपुर जहाँ चुनी हुई सरकार को गिरा कर बीजेपी ने अपनी सरकार बनाई। ये वही बीजेपी है जिसके संस्थापक दल के सदस्य रहे अटल बिहारी वाजपई ने कहा था ,ऐसी सरकार को चिमटे से भी न छुएं। 


 लेकिन २०१४ के बाद से बीजेपी की विचार धारा बदल गई। अमित साह और नरेंद्र मोदी ही सर्वो सर्वा हैं। मजाल क्या की कोई चूं भी कर दे।  सब कुछ इन्हीं के हिसाब से चलता है। जहाँ विचार धारा नैतिकता मायने नहीं रखती। रखती है तो बस सत्ता और उसका विस्तार।  सीधे तौर पे बहला फुसला कर या लोभ ,लालच देकर , सीधे ऊँगली से घी न निकले तो टेढ़ी कर ,जाँच एजेंसी का भय दिखला कर।


 कितने ही नेता विपक्ष के जेल में बंद है; हेमंत सोरेन ,केजरीवाल ,मनीष सिसोदिया ,सतेंद्र जैन जैसे कई विपक्षी दल के नेता है।संजय सिंह ६  महीने की सजा काट कर  रिहा हुए हैं। जिनके खिलाफ कोई ठोस पुख्ता सबूत न होने पर अदालत ने  जमानत दे दी। लेकिन ये तो बस कुछ बड़े नाम हैं। लेकिन ईडी ,सीबीआई का रोल कितना बड़ा है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। 

2014 के बाद आठ सालों में नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी के इस्तेमाल में चार गुना बढ़ोतरी हुई है, इस दौरान 121 राजनेता जांच के दायरे में आए जिनमें 115 विपक्षी नेता हैं , यानी इस दौरान 95 प्रतिशत विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हुई। 

कई  ऐसे बड़े नेताओं के नाम भी है जिन पर गंभीर  भ्रष्टाचार के आरोप थे ,वे बीजेपी की वाशिंग मशीन में पाक साफ़ हो गए। 

उनमें से सबसे बड़ा नाम ,हिमंत विस्वा शर्मा का है ,जिन्हें 2014 में सारदा चित फंड घोटाले में सीबीआई की जाँच और छापेमारी का सामना करना पड़ा था ,जैसे ही 2015 में बीजेपी में शामिल हुए वाशिंग मशीन में धूल गए। सजा मिलने की वजाय मजा हो गई। 


 बीजेपी से  असाम के मुख्य मंत्री बना दिए गए । वहीँ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्या मंत्री अशोक चौहनके पर भी गंभीर भ्रस्टाचार के आरोप थे ,वे भी बीजेपी की वाशिंग मशीन में धूल गए। अजीत पवार ,प्रफुल्ल पटेल ,जोतिरादिता सिंधिया ,बहुत से नाम जो इस वाशिंग मशीन से धूल गए। 


उनके सारे मामले रफा -दफा हो गए। अब सब के सब सरकारी खिदमतगार हैं। बीजेपी अब राजनैतिक दल न होकर दलदल हो गई है ,फैक्ट्री भी कह सकते हैं , जहाँ झूंठ का कारोबार चलता है ,भविष्य के सपनो को बेंचा जाता है।

  लोक लुभावन लालच दिया जाता है ।   झूठ का ही फूल (कमल) है तो ,झूठ का  फल भी होगा ।देश में महंगाई ,बेरोजगारी  चरम सुख पे होगी ,गरीब को गरीब होने का बोध ही नहीं होगा, अचानक से ही किसी दिन कोई चमत्कार  होगा और देश विकसित बन जाएगा । 2047 का वो कौन सा दिन होगा जिस दिन भारत विश्व गुरु बनेगा ,ये तो मोदी  ही बता सकता है या उसके अंध भक्त ।

 मगर फ़िलहाल विपक्षी दल में भगदड़ सी मची है ,तू गया की मैं आया ,एक के पीछे हजारों बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार  खड़े हैं। 

मीडिया इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक भी बताती है। मीडिया को मीडिया कहना भी अब दुस्सहस से भरा है ,राजनैतिक दल की तरह बीजीपी की सहयोगी भूमिका में अपना काम बखूबी कर रही है । जनता उनकी बातों पे भरोषा करे या न करे। ईमानदारी से बेईमानी का काम कर रहे हैं।  


 मोदी ही देश है ,देश मोदी के लिए , मोदी के सत्ता सुख में ही उनका कल्याण है। सरकार से सरकार तक  मोदी के अजेंडे को लेकर चल  रही है

क्या ये सब कुछ जो देश में हो रहा है ,सही है या गलत ,आप विचार कीजिये , बिना विपक्ष के लोक तंत्र कैसा होगा इस पर भी विचार कीजिये। 

क्या आम आदमी इस सरकार में कोई हैसियत रखता है या विपक्ष के ख़त्म होने के बाद हैसियत बढ़ जायेगी। मोदी तंत्र ही लोकतंत्र होगा विचार करना चाहिए, सोचने ,समझने में कोई पहरा नहीं है।