मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023

mp election 2023

 

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में इस बार लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं ,भाजपा बनाम जनता की होती दिख रही है ;

rajendra sharma,congress,bjp


मध्य प्रदेश में   2019 में जनता द्वारा चुनी गई प्रदेश में कॉंग्रेस सरकार को केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने अपने सेट एजेंडा के तहत जनतंत्र की मर्यादा को भंग कर धन बल के प्रयोग से जिस प्रकार भाजपा की सरकार बनाई इससे देश और प्रदेश की जनता बहुत आहत और दुखी है .

लोकतंत्र जनतंत्र का प्राण है , जनता अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है ,भाजपा की लूट और भ्रष्टाचार की सरकार में जहाँ जन तो हैं लेकिन जन की कोई सुनवाई नहीं है .

जनता केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार से तंग आ चुकी है .

जिस जनत्रंता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्योछाबर कर दिया ,आज सुरते हाल ये है कि जनता लोकतंत्र के इस लूटते हुए काफिले को मूक दर्शक कि भांति देखने को मजबूर है .

लोकतंत्र में वोट जनता कि सबसे बड़ी ताकत होती है वो अपने एक वोट से सरकार बदल सकते हैं ,अपने और अपने आने वाली पीढ़ी के कल को बदल सकते हैं .

 अगर परिवर्तन नहीं होगा तो भ्रष्ट तानासाही देश को अराजकता के दलदल में धकेल देगी .

समय है परिवर्तन का और परिवर्तन कि इस कड़ी में मध्य प्रदेश विधान सभा सीट जो भाजपा का गढ़ मानी जाती है जहाँ  भाजपा से राजेंद्र शुक्ल चार बार विधायक चुनकर आए, राज्य  में मंत्री भी रहे लेकिन रीवा में कोई उल्लेखनीय विकास  का काम नहीं किया .उन्होंने सिर्फ वही काम किया जिसमें उनका व्यक्तिगत हित सध सके .

रोड से लेकर हाईवे ,पूल से लेकर ब्रिज ,हॉस्पिटल से लेकर स्कूल ऐसा कोई सरकारी काम नहीं है जहाँ उनका कमीशन सेट न हो . उनपर हमेशा से ये आरोप लगते रहे है कि जो भी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट हैं सिर्फ अपने आदमियों को ही देते हैं .रीवा को पूरी तरह से कंगाल कर दिया .

रोजगार का कहीं नामोनिशान नहीं युवा नौकरी के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं .

नशा खोरी इतनी बढ़ गई है कि आए दिन हमें आपराधिक वारदात कि ख़बरें सुनाई पड़ती हैं .

किसानों कि समस्या अलग ही है ,किसान खेती नहीं करना चाहते ,खाद बीज से लेकर बेंची कि समस्या .

जिस काम से वो अपना और अपने परिवार का पेट न पाल सके ऐसा काम कोई क्यों करना चाहेगा .

व्यापारी gst की मार तो पहले से ही झेल रहें थे ऊपर से बढ़ती डीजल ,पैट्रोल और गैस की कीमत ने कचूमर निकाल दिया .

दूर -दूर से देखने पर भी जनता को भाजपा की सरकार और नेताओं से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है .

शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार की भरमार है ,कहाँ से सुरु करेंगे ,कहाँ ख़तम करेंगे; पोषण आहार  घोटाले से लेकर बिजली घोटाला ,खनन घोटाले से लेकर शराब घोटाला ,वृछारोपण घोटाला ,बीज प्रमाणीकरण घोटाला ,ऐसे बहुत से घोटाले हैं जो चंद कुछ करोड़ों के नहीं हजारों लाखों करोड़ों में हैं .

ऐसे  में भाजपा से परेशान और तंग आ चुकी जनता के पास सिर्फ कांग्रेस ही एक विकल्प बचता है .

अब हालत पहले जैसे नहीं हैं ; रीवा कि जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है ,राजेंद्र शुक्ल की राह इस बार हमवार नजर नहीं आ रही है .

इस बार उनके टक्कर में कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र शर्मा हैं जो ईमानदार और जनलोकप्रिय छवि के नेता हैं ,अमीर से लेकर गरीब ,व्यापारी से लेकर युवा और किसान हर वर्ग का समर्थन उन्हें मिलता दिख रहा है .

जनता उम्मीद लगाए बैठी है ,इस बार राजेंद्र शर्मा जीत कर आएं और रीवा को भ्रष्टाचार ,माफिया तंत्र से मुक्ति दिलाएं जहाँ विकास हो सुशासन और स्वराज हो ,जन सुनवाई हो ,उनके हित में फैसले लिए जाएँ .

                                                                                                   -धर्मेंद्र मिश्रा

   


मंगलवार, 17 अक्टूबर 2023

how Bollywood shaping Indian society

 इस आर्टिकल के माध्यम से बॉलीवुड का देश और भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने का प्रयाश है :

dark secret ,Bollywood


इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता ;समाज की दिशा और दशा बदलने में बालीवूड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है , चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक  .वांछनीय है अच्छाई जहाँ होगी ,बुराई अपने पैर पसारेगी .

एक तरह जहाँ नायक और खलनायक की अवधारणा से रचित  अश्लीलता ,मार काट ,हिंसा को बढ़ावा देने वाली फ़िल्में बनती हैं ,वहीँ सामाजिक सरोकार पूर्ण फिल्मों का भी निर्माण होता .

 आदर्श चरित्र निभाने वाला नायक ,नायिका आवश्यक नहीं वास्तविकता में भी उन आदर्शों के मानक पर खरे उतरें ,उनके लिए तो व्यापर हैं ,वो पहले अपना हित देखेंगे उन्हें पैसे कहाँ से आ रहे हैं .

यदि उनके हित में दर्शक का हित शामिल है यह संयोग है ,बहुत से ऐसे आदर्श चरित्र के कलाकार हुए और हैं जिन्होंने देश के सामने रियल और रील दोनों के बीच बा खूबी सामंजस्य बैठाया .

यह व्यक्ति की पसंद और नापसंद पर निर्भर करता है वह सिनेमा को किस रूप में लेता है .


आज से 20-30 साल पहले या उससे और पहले जैसी फ़िल्में दिखाई  जाती थी , अब वैसी फ़िल्में दर्शक देखना पसंद नहीं करते ,बड़े कैनवास पे तकनीकी रूप से उन्नत ,फिल्मांकन देखना पसंद करते हैं, अश्लीलता पे अब उतना हो हल्ला नहीं होता दर्शक सहज भाव से स्वीकार करने लगे हैं .

बाजार का नियम डिमांड और सप्लाई पर निर्भर हैं ,जब जैसी मांग होगी  वैसी ही आपूर्ति की जाएगी . 

गाड़ी कभी एक पहिये पे नहीं चलती ,सामाजिक सरोकार की जिम्मेदारी एक तरफ़ा नहीं हो सकती ,दर्शक जो देखना चाहेंगे ,समाज की जब जैसी छवि होगी, वही दिखाया जायेगा .

दूसरी तरफ सितारों से भरी दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखती है अंदर से उतनी होती नहीं ,सितारों की ये जो चमक है जनता की गाढ़ी कमाई  है ,आप ने जो नाम सोहरत हासिल की है जनता की बदौलत है .यदि लोग आप को देखना सुनना पसंद करते हैं तो इतनी नैतिकता उन पर भी बनती है , मनोरंजन के साथ एक आदर्श पूर्ण समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाएं 

मंगलवार, 19 सितंबर 2023

digital Revelation through audio book

 
चलो कुछ देर के लिए हम तन्हँ हो जाएँ,
 जहनी तौर पे आदम-ए-बस्ती से आजाद हो जाएँ !

bucaudio,audiobook,podcast





इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल फुर्सत और सुकून में ऐसे मिलें कि जिंदगी को जिंदा होने का अहसास मिले।

भाव ही हैं जो दिल में उतरते हैं,हम महसूस करते हैं ।

इसी अहसास को दिलों में जगाने के लिए  Digital  Revolution, Audio Book, Podcast 👂कि दुनिया में

उत्तर प्रदेश के प्रताप गढ़ में BuCAudio एक ऐसा नाम है जो हिंदी भाषी लोगों के दिलों में तेजी से खास, कुछ अलग मुकाम बना रहा है ।

यंग बंच ऑफ़ टैलेंट से भरी एक dedicated team जो पूरी सिद्दत,लगन और ईमानदारी के साथ professionally तरीके से भारतीय लेखकों को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है,जहाँ वो अपनी रचना audio book के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सके ।

Youtube ,Facebook ,Instagram जैसे popular platform से लेकर,audio book release करने वाली देश विदेश की नामी गिरामी कंपनी जैसे Audible.in,  storytel, rekunet 45+ मध्याम से श्रोताओं तक अपनी मजबूत पकड़ रखता है ।

भारतीय लेखकों के लिए भी यह एक सुनहरा दौर है,जहाँ वो अपनी बुक को सीधा audio Book में transform कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी रचना के माध्यम से पहुँच सकते हैं ।

वहीं श्रोताओं के लिए भी कुछ नया, आज के दौर,तौर तरीके के अच्छे रचनाकार,लेखकों से रुबरु होने का माध्यम है ।

BuCaudio के founder राजीव यादव,अभिषेक शुक्ला इसी विजन के साथ आंगे बढ़ रहे हैं, रचनाकर, खासकर नवोदित लेखकों को आंगे लाना । जिससे  वो कम दाम में cost effective बेहतर तरीके से audio book के

 मध्याम से उच्च गुणवत्त पूर्ण Content ,listner को सुनने को मिले ।

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में कई सारी संस्था हैं जो  Audio book पर काम कर रहीं हैं वहीँ उनसे अलग व्यापारिक उद्देश्य से हट कर BuCaudio भावनात्मक रूप से लेखक से जुड़ कर काम करने पर यकीन रखती है, जिससे बेहतर फील के साथ लेखकों की रचना को समझा जा सके और  श्रोताओं तक अच्छा कंटेंट पहुंचे। 

"सुनिए कुछ अच्छा, BuCaudio के साथ "

BuCaudio से आप सीधा उनके Whats up  के माध्यम से  सम्पर्क कर सकते हैं :9559445552


मंगलवार, 12 सितंबर 2023

क्या चीन सुपर पावर बन पायेगा ?


चीन का दुनिया में बढ़ता प्रभाव ,क्या हैं वैश्विक परिदृश्य में इसके मायने ,चलिए इस आलेख के माध्यम से जानते हैं :



दुनिया  का राजनीतिक क्रम बड़ी तेजी से बदल रहा है। इसमें विभिन्न कारकों का प्रभाव हो रहा है, जैसे कि आर्थिक मजबूती, सामरिक शक्ति, तकनीकी प्रगति, और राष्ट्रीय हित मुख्य रूप से हैं . 


जिस में चीन, एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है जो  महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रूस और अमेरिका के बाद उभरता हुआ  सुपरपॉवर; जिसकी आर्थिक, सेना, और प्रौद्योगिकी में मजबूती के कारण यह आज दुनिया में अपनी धमक जमाता ही जा रहा है, गाहे बगाहे अमेरिका को चुनौती भी देता रहता है  । चीन की अर्थव्यवस्था विश्व की दूसरे पायदान पे है  वित्तीय, सैन्य, और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है।


चीन की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विश्व राजनीतिक मानचित्र को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। चीन के  "एक बेल्ट, एक रोड" पहल की शुरुआत की जिसमें विभिन्न देशों के साथ साझा संचार, व्यापार, और पर्यटन को सुनिश्चित करने का प्रयास किया ।


चीन की भूमिका विश्व आर्थिक प्रणाली में भी महत्वपूर्ण है। चीन ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों के बीच अपने व्यापारिक मुद्रा (युआन) को मुक्त करने का प्रयास किया है। इसका मतलब है कि अब दुनिया भर में चीनी मुद्रा की मान्यता बढ़ी है।


चीन के राष्ट्रीय हितों के लिए अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में भी निवेश के माध्यम से तेजी से प्रगति कर रहा  है। चीन अपनी  क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न सामरिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक मुद्दों पर दबाव डाला है।

चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है। इसकी मुख्यता उच्च निवेशों, बढ़ते हुए निर्यात-आयात, और विश्व वाणिज्यिक प्रतिष्ठा पर है। चीन की आर्थिक मजबूती के कारण, यह विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालता है।

 चीन में उच्च स्तर के निवेशों के कारण, इसकी आर्थिक मजबूती में सुधार होता है। चीन में विदेशी सीमित संचारकों के प्रवेश को सुगम करने के लिए सरकारी नीतियों में सुधार किए गए हैं, जिससे विदेशी निवेशकों को चीन में व्यापार करने के लिए अधिक संभावनाएं मिलती हैं।

 बढ़ते हुए निर्यात-आयात: चीन विश्व का सबसे बड़ा निर्यातकर्ता है और इसकी मुख्यता मजबूत मानव संसाधन, उच्च तकनीक, और सुरक्षित और सुगम परिवहन प्रणाली पर है। चीन के निर्यात क्षेत्रों में सबसे प्रमुख हैं मैन्युफैक्चरिंग, प्रौद्योगिकी, और सेवा क्षेत्र। चीन के निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा भारत के लिए है, क्योंकि चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है।

  इसकी वाणिज्यिक प्रतिष्ठा का कारण उच्च गुणवत्ता और कम कीमत पर उत्पादन है। चीन के उत्पादों की मांग विश्वभर में है, और इसके प्रभाव से विश्व बाजार पर होता है।

  चीन में बढ़ते हुए विदेशी संपत्ति के कारण, इसकी आर्थिक मजबूती में सुधार होता है। चीन विदेशी संपत्ति के लिए आकर्षक है, क्योंकि इसके विदेशी निवेशकों को बड़े मुनाफे की संभावनाएं मिलती हैं।

 चीन की अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। इसकी मुख्यता मजबूत निवेश, उच्च गति परिवहन प्रणाली, और तकनीकी प्रगति पर है। चीन की अर्थव्यवस्था का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन भारत के सबसे बड़े आर्थिक साथी है।

 इसका भारत के लिए कुछ खतरा हो सकता है। जैसे कि :

सीमा विवाद:

 भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद है, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ है। यह सीमा विवाद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच संघर्ष का मुद्दा है, जो कि बढ़ते हुए तनाव का कारण बन सकता है।

 पाकिस्तान के साथ संबंध:

 चीन पाकिस्तान के सबसे मजबूत सहयोगी है और दोनों देशों के बीच गहरा संबंध है। यह संबंध भारत के लिए चिंता का कारण हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाई को समर्थन करता है।

 आर्थिक मजबूती: 

चीन की आर्थिक मजबूती भारत के लिए एक चुनौती हो सकती है। चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है, और इसका प्रभाव विश्व व्यापार पर होता है। भारत को चीन के साथ व्यापारिक मुद्रा में संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता हो सकती है, ताकि वह चीन के आर्थिक प्रभाव को संतुलित कर सके।


 रक्षा और सुरक्षा:

 चीन की सेना और रक्षा प्रणाली मजबूत है, और इसका प्रभाव विश्व राजनीतिक मानचित्र पर होता है। चीन के सामरिक बल का बढ़ता हुआ होना भारत के लिए एक समस्या हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच संघर्ष की संभावना होती है।


 वित्तीय और तकनीकी मुद्दे: चीन की तकनीकी प्रगति और वित्तीय मजबूती भारत के लिए एक मुद्दा हो सकती है। चीन विश्व के अग्रणी देशों में से एक है, और इसका प्रभाव विश्व आर्थिक प्रणाली पर होता है। भारत को अपनी तकनीकी प्रगति में सुधार करने और वित्तीय मजबूती को बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है, ताकि वह चीन के साथ मुकाबला कर सके।

 भारत को अपनी आर्थिक मजबूती में सुधार करने के लिए, वह नई निर्माण परियोजनाओं को शुरू कर सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ेगा और स्थानीय रोजगार की समस्या को सुलझाने में मदद मिलेगी।

 भारत सरकार को विदेशी निवेशकों के लिए सुरक्षित, सुगम और आकर्षक व्यापारिक माहौल प्रदान करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए सरकारी नीतियों में सुधार किए जा सकते हैं, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में व्यापार करने के लिए अधिक संभावनाएं मिलें।

 चीन के साथ नए और मजबूत व्यापारिक संबंध बनाने की आवश्यकता होती है। इसके लिए भारत को अपने उत्पादों की मांग को बढ़ाने, उत्पादन में सुधार करने, और मानव संसाधन को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, भारत को अपने निर्यात क्षेत्रों में नए और विश्वस्तरीय उत्पादों का निर्माण करने की आवश्यकता होती है।

 विदेशी संपत्ति को आकर्षित करने के लिए अपनी निवेश नीतियों में सुधार करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए भारत सरकार को विदेशी निवेशकों को मुनाफे की संभावनाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

 भारत को चीन के साथ सामरिक महकमों में सहयोग करने की आवश्यकता होती है। इससे भारत को चीन के खिलाफ सुरक्षा में मदद मिलेगी और उसकी आर्थिक मजबूती को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


बुधवार, 6 सितंबर 2023

facts about india vs bharat

 भारत बनाम India: एक राष्ट्र की द्वंद्ता:

map of india,facts india ,bharat



विविधता और विरोधाभास की भूमि भारत को अक्सर उसके प्राचीन प्रमाणिकों और पाठों में भारत के नाम से संदर्भित किया जाता है। हालांकि, दोनों शब्दों का प्रयोग देश को प्रतिष्ठित करने के लिए प्रतिस्थापित किया जाता है, इसमें अलग-अलग संकेतार्थ हैं और इसकी पहचान के अलग-अलग पहलुओं को प्रतिष्ठित करते हैं।

India, सिंधु नदी(Indus River) से उपलब्ध हुआ नाम, देश का आधुनिक और प्रगतिशील चेहरा प्रतिष्ठित करता है। यह एक युवा और गतिशील जनसंख्या के आकांक्षाओं को प्रतिष्ठित करता है, जो आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकीय प्रगति की कोशिश कर रही है। भारत उन भीड़-भाड़ वाले शहरों, उच्चतम इमारतों, आईटी हब्स, और विभिन्न क्षेत्रों में जो संगठन का प्रभाव होता है, के साथ समानार्थी है।

वहीं, भारत, भारतीय समाज में गहन रूप से स्थापित परंपरा, मान्यताएं, और रीति-रिवाजों की प्रतीति कराता है। यह एक समृद्ध विरासत, मूल्यों, और रीति-रिवाजों की याददाश्त है, जो पीढ़ियों के माध्यम से संचारित किए गए हैं। भारत ग्रामीण मनोभूमि को प्रतिष्ठित करता है, जहां कृषि और पारंपरिक व्यवसाय अभी भी प्रमुख हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां प्राचीन परंपराओं, रीति-रिवाजों, और विश्वासों को संरक्षित और मनाया जाता है।

भारत और india के बीच की द्वंद्ता केवल भूगोलिक या सामाजिक-आर्थिक अंतरों पर सीमित नहीं है; यह शहरी और ग्रामीण भारत के बीच अंतर को भी प्रतिष्ठित करता है। जबकि शहरी भारत तेजी से प्रगति कर रहा है, ग्रामीण भारत को गरीबी, अवसंरचना की कमी, और शिक्षा और स्वास्थ्य के पहुंच में सीमित होने जैसे चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

यह अंतर समाज के समावेशीकरण और समान्य विकास के मुद्दों पर सवाल उठाता है। क्या भारत को पीछे छोड़कर भारत सचमुच में प्रगति कर सकता है? क्या प्रगति के लाभ हर देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए?

सरकार ने इस असमानता को पता करने के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रमों की शुरुआत की है। ग्रामीण विकास पहलों जैसे एमजीएनआरईजीए (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से लेकर डिजिटल साक्षरता अभियान तक, मार्गदर्शन करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि, भारत और india के बीच का समान्य करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप से अधिक की आवश्यकता होती है। इसमें नागरिकों, सिविल समाज संगठनों, और निजी क्षेत्र के सभी हितधारकों का संयुक्त प्रयास शामिल है। यह मानसिकता में एक परिवर्तन की मांग करता है, जहां शहरी भारत ग्रामीण भारत के प्रति अपनी जिम्मेदारी को मानता है और उसके समग्र विकास की ओर काम करता है।

भारत और India एक-दूसरे को अलग-अलग नहीं हैं; वे एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। देश की समग्र विकास और समृद्धि के लिए दोनों भारत और भारत को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। केवल जब भारत और भारत मिलकर काम करेंगे, तब ही देश की वास्तविक क्षमता का प्रतिष्ठान किया जा सकेगा।

Conclusion :

भारत और india के बीच की द्वंद्वता राष्ट्र के विविध पहलुओं को प्रतिष्ठित करती है। जबकि भारत प्रगति और आधुनिकता को प्रतिष्ठित करता है, वहीं भारत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को प्रतिष्ठित करता है। दोनों भारत और भारत के बीच के अंतर को समाप्त करना समावेशी विकास और सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि समाज का कोई भी भाग पीछे न रह जाए। केवल भारत और india को ग्रहण करके देश सचमुच में फलाने और अपनी क्षमता को पूरा करने में सक्षम हो सकता है।

IndiavsBharat

 सियासी कलह से बंटता हुआ देश -

india,bharat,india,bharat,india,bharat


अपने ही देश को अब अपना कहने पर आप को सौ बार सोचना होगा किसे खुश करना है और किसे नाखुश ।

यही सियासत है,कल को ये आप को मुर्दा घोषित कर देंगे और उसके फायदे भी बताएँगे और आप उसे सहर्ष  स्वीकार करेंगे क्योकिं आप के अंदर अँध भक्ति का जहर घोल दिया गया है ।

आप को क्या सोचना है,क्या नहीं सोचना है सरकार निर्धारित करेगी ।

प्रचार प्रसार के माध्यम से भाड़े पर लिए गए सरकारी करिन्दे चारो तरफ से सूचना कि ऐसी बॉम्ब बार्डीग करेंगे कि आप कि सोचने,समझने कि क्षमता क्षीण पड़ जाएगी ।

किसी पक्ष में जाने से पहले निरपेक्ष रुप से आप सोचिए;

क्या अब एक ही देश के अंदर दो देश होंगे?

जो भाजपा  गठबंधन को वोट करते हैं अब वो भारतीय नहीं कहलायेंगे ?

जो कांग्रेस गठबंधन दलों को  वोट  करते हैं अब वो इंडियन  कहलायेंगे ?

तो फिर जो किसी को वोट नहीं करते अब वो क्या कहलायेंगे ?

दोनों ही पक्ष के लोग एक दूसरे को ऐसे देखेंगे जैसे  भारत सर्वनाम इंडिया vs  पकिस्तान

देश कि हर उपलब्धी पर प्रपोगेड़ा करने वाली मोदी सरकर वैचारिक रुप से देश के बंटवारे का श्रेय भी  लेगी ?

निषकर्ष:

किसी पार्टी का पक्षकार होने से पहले ध्यान रखें;

"भारतीयता अलाप में नहीं ,क्रिया कलाप में होनी चाहिए ।"

मंगलवार, 5 सितंबर 2023

मंत्रों की शक्ति और सच्ची समृद्धि: एक प्रेरक कहानी

आप के साथ एक ऐसी कहानी साझा कर रहा हूँ जो आपकी जिंदगी बदल कर रख देगी : 

सच्ची समृद्धि और सुख केवल हमारे अंतर्निहित गुणों पर निर्भर करते हैं। कैसे हमें अपने मन को प्रसन्न, संतुष्ट और प्रेरित रखना चाहिए और मंत्रों की शक्ति को सही तरीके से उपयोग करना चाहिए:-

bajrangbali,hanuman ji,god



एक गरीब आदमी था, जिसे पैसों की आवश्यकता थी,उसे एक साधु से मिलता है जो उसे एक मंत्र प्रदान करता है जो धन की प्राप्ति में मदद करेगा। लड़का मंत्र का प्रयोग करता है और वहीं से अचानक पैसे उसके पास आने शुरू हो जाते हैं।


लड़का खुशी से अपने परिवार को सम्पत्ति प्रदान करने में सक्षम होता है, लेकिन कुछ समय पश्चात से उसके घर में अशांति और कलह होने लगती है ,धन का दुरपयोग होने लगा ,बिना मेहनत की कमाई का पैसा ,फिजूल खर्ची में अपव्यय होने लगा ,जो उसकी मेहनत की कमाई थी ,पारिवारिक जन में आपसी प्रेम ,सद्भाव ,भाई चारा ख़त्म होने लगा . उसे यह अनुभव होता है कि धन की प्राप्ति उसके जीवन को सुखी और समृद्ध नहीं बना सकती है। सच्ची समृद्धि सिर्फ आत्म-संतुष्टि में ही पाई जा सकती है।


इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मंत्रों की शक्ति केवल एक माध्यम है, लेकिन सच्ची समृद्धि और सुख केवल स्वयं के अंतर्निहित गुणों पर निर्भर करते हैं। हमें अपने मन को प्रशांत, संतुष्ट और प्रेरित रखना चाहिए, और मंत्रों की शक्ति को सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।



इसलिए, जब हम अपने जीवन में समृद्धि की तलाश में होते हैं, हमें धन की प्राप्ति के साथ-साथ अपने मन को संतुष्ट, प्रशांत और प्रेरित रखने का प्रयास करना चाहिए। मंत्रों की शक्ति को सही तरीके से उपयोग करते हुए हमें स्वयं के अंतर्निहित गुणों को समझना चाहिए, क्योंकि समृद्धि सिर्फ आत्म-संतुष्टि में ही प्राप्त हो सकती है।

 जीवन की सच्ची सफलता व्यक्ति के आंतरिक सुख और संतुष्टि में होती है। सफलता उसके अंदर की खुशहाली, स्वास्थ्य, प्रेम, समृद्धि, संतुष्टि और आत्म-प्रगति में होती है। अंदर की शांति, समृद्धि और आनंद के साथ ही बाहर की सफलता भी आती है।


हालांकि, सामान्यतः देखा जा सकता है कि लोग बाहरी मान्यताओं, सामाजिक स्थिति, पैसे, सम्मान, संपत्ति, करियर सफलता, आदि में सच्ची सफलता की प्राथमिकता देते हैं। यह सब विषय भले ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन इनकी प्राप्ति और उपलब्धि के लिए भी एक स्वस्थ मन, शरीर और आत्मा की आवश्यकता होती है।

इसलिए, सच्ची सफलता में सुख, संतुष्टि, प्रेम, शांति, स्वास्थ्य, प्रगति, और समृद्धि के साथ सामर्थ्य, संकल्प, धैर्य, समर्पण, आत्म-विश्वास, और सामरिकता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सच्ची सफलता में संपूर्णता की अनुभूति होती है जो मानसिक, शारीरिक, और आध्यात्मिक स्तर पर होती है।

निष्कर्ष :


इसलिए, जीवन की सच्ची सफलता में संतुष्टि, समृद्धि, प्रेम, आनंद, आत्म-साक्षात्कार, और स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण योगदान होता है। एक व्यक्ति की सच्ची सफलता उसके अंदर की खुशहाली और आत्म-प्रगति में निहित होती है, जो उसे बाहरी सफलता की ओर प्रेरित करती है।

शनिवार, 2 सितंबर 2023

जनता से भारी भूल हो गई ?


इस लेख के माध्यम से विस्तार से जानेगे 1 अप्रैल मोदी की परीक्षा पे चर्चा, साथ ही मोदी के 9 साल के अप्रैल फूल कार्यकाल पे सर सरी तौर पर नज़र डालेंगे  :-

                   

modi_meme_funny_cartoon

                          

                                     



 मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के माध्यम से ,छात्रों को ज्ञान बांटा वो भी 1 अप्रैल ये दिन आपके और हमारे लिए उपयोगी भले न हो लेकिन मोदी केलिए इससे सुभ दिन क्या हो सकता है। मोदी से बड़ा वाला और कौन होगा जो देश की जनता को सबसे ज्यादा मुर्ख बनाया हो ?


याद करिये वो दिन जब 2014 में मोदी को यही सोच कर वोट दिया था ,15 लाख ,काला धन आएगा ? ईमानदार सरकार आने वाली है ?

फिर क्या आगई सरकार प्रचंड बहुमत से ,मोदी ही मोदी ,एक छत्र साम्राज्ज्य लंका अधिपति सिंघासन आरूढ़ होगये।

न 15 लाख मिला ,न काला धन Black Money आया ,ऊपर से नोटबंदी (Demonetization) ,GST के नाम पर लंका लगादी आम जन की। मेक इन इंडिया (Make in India) ,स्मार्ट सिटी Smart City ,स्किल इंडिया ,ऐसी बहुत सी योजनाओ के शिगूफे छोड़े गए ,जनता हाँथ मलती रह गई। मोदी सरकार अपनी जेबे भरने में लग गई।



                                     modi_meme_funny_cartoon


 दिन भर टे टे पो पो करने वाले  खबरिया दलाल godi media के मुँह में भी कुछ माल मलाई ठूस दी। जिससे मधुर स्वर ही निकले ,जुबान खुले तो यही कहे वाह मोदी जी  कमल के कमान से क्या तीर चलाया ।  खैर 8 साल से यही सब देख ,सुन ,अब तो आप भी  उबाऊ पकाउ होचले होंगे ? है की नहीं।

विषय पर लौटते है ,परीक्षा में चर्चा ; खूब ज्ञान गणित दिया ,सफलता के वे सूत्र दिए,बताये जो मोदी पर लागु नहीं होते।

   मोदी को ज्ञान ही देना है तो अपना वास्तविक अनुभव साझा करे ,फर्जी ,डिग्री और डिप्लोमा कैसे बनवाये जाते है ,ठगी ,बेईमानी , 2 और 2 ,5 कैसे होते है।

दिन भर टेलीप्रॉम्प्टर लगाकर बकझक करने वाले मोदी ,महंगाई ,बेरोजगारी पर बात भी नहीं करते। पढ़े लिखे डिग्री ,डिप्लोमा वाले बेरोजगार युवाओ को पकौड़ा तलने की ट्रिक ही बता देते।


चाटुकार सलाहकार  समझाते होंगे ;सर इस पर बात भी नहीं करना ,राष्ट्रवाद सबसे बड़ा हथियार है उसी से जनता का शिकार करना है।

समय का फेर है ,सरकार ,जनता केलिए नहीं ,जनता सरकार केलिए है।

खैर यदि आप को देश की समस्या से कोई लेना देना नहीं ,सामंतवादी है ,महगाई ,बेरोजगारी से कुछ फर्क नहीं पड़ता तो जरूर मोदी भक्त बनिए ,गुण गान करिये ,क्योकि यही पाखंडवाद है।

 वही अगर सही अर्थ में आपके अंदर राष्ट्रवाद है  तो इस मुश्किल दौर ,पाखंडवाद के साम्राज्ज्य में प्यार ,मोहब्बत ,अमन ,चैन का चुनाव करिये ,अपने तथा अनन्य अन्य  जन  के प्रति संवेदनशील बनिए,आपसी प्यार एक दूसरे केप्रति सहयोग की भावना रखिये।


 जातिगत ,धार्मिक कलह से दूर रहे ,नफरत की राजनीती करने वालो से सतर्क रहे और दुसरो को भी ऐसे लोगो से सावधान करे। यही देश प्रेम की भावना आप को और आपसे जुड़े लोगो को सच्चा  सुख देने वाला है।


वही जो आज हमें और आप को  आस्मां के सितारे मालुम पड़ते है ,लगता है जो है यही सब कुछ है , क्योकि झूठ के पैर नहीं होते वो जमीन पर टिक नहीं सकता। ये मन की बात करने वाले पाखंडी जो सच का कभी मुँह भी नहीं देखते धुंध छटने पर अपने मुँह कालिख पुतवा कर ही  जाएंगे ।


वही मोदी की गोदी वाले ,जिन्हे दिन भर पढ़ते और सुनते है ; जिनकी जुबान इनके पैरो तले चाटुकारिता से सनी है,पाखंडवाद को ही राष्ट्रवाद कहते है।  धुंध छटने पर यही लोग सबसे ज्यादा विरोध करने वालो में से होंगे ,क्योकि ये हवा के साथ बहने वाले लोग है। नीचता ,छल ,कपट  मलाई चाटने वाले दलालो की फितरत में है।


देश के वास्तविक  मुद्दों पर बात न करने वाले फिल्म जगत  के ऐसे तथाकथित संप्रभु लोग जो सिर्फ अपने मतलब से मतलब की बाते करते है 

डीज़ल ,पैट्रॉल भरवाने खुद तो जाते नहीं होंगे ,खुदा न खस्ता कभी पैट्रॉल पम्प पहुँच ही गए तो क्या कहोगे ?

वही डाल दो जो सब मे डालते हो ?

इन्हे लगता है देश के मसले पे बात की तो पाखंडवादी राष्ट्रवादि दल बल के साथ चढाई कर देंगे ,इनकी अपनी पोल खुलने लगेगी ,ED ,CBI, नारकोटिक मोदी सबको पीछे लगा देगा ।

ऐसा नहीं है सच से अनजान होंगे , जानते ,समझते हुए भी  यही समझा जा सकता है ,जब आप स्वयं में गलत होते है तो गलत का साथ देना आपकी मजबूरी बन जाती है।  सबका अपना विवेक और चुनाव है। 

दूसरे देश के मसाइल ,मस्जिद ,मसले पर बात करने से पहले ,अपने गिरबां में झांक कर देखना चाहिए ,मोदी से यह तो  सीखा जासकता है ,दुसरो को मुर्ख समझते ,बनाते ,बनवाते ,खुद भी उसी व्याधि का शिकार होजाते है। 

मोदी को देश का पीएम नहीं "BJP के PM" कहे तो ही बेहतर होगा। लोकतंत्र को पी जाने वाले

मोदी की सर्कस  सरकार साल भर से आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है , जम के कम्पैनिंग चल रही है ,खैर ये उनके लिए अमृत काल ही है ,जनता केलिए ठनठन गोपाल है।  

ये चाटुकारिता बड़ी धूर्त किस्म की चीज है ,इंसान फिर इंसान नहीं रह जाता जूता हो जाता है। ये बात अलग है कुछ समय केलिए ख़ुशी होती है ,साहब ने पहना है ,साहब की छत्र छाया में है। धन ,मान ,सम्मान ,चमचागिरी में ही है तो बुरे की बुराई करने में क्या रखा है तारीफ ही करो?खैर जनता केलिए तो 365 दिन मुर्ख दिवस April fool day  ही है।

 

भावार्थ :-

"उधार का धन ,उधार का ज्ञान और उधार का पीएम बोझ के समान है। "


गुरुवार, 31 अगस्त 2023

Books review

 

एक ऐसा कलमकार जिसकी कलम से निकली हर बात है कुछ ख़ास ,अंदाज है जुदा ,लीक से हट कर ,अपनी खुद की लकीर खींचने की कवायद … धर्मेंद्र मिश्रा हिंदी विधा के एक ऐसे उपन्यासकार, कहानीकार और दार्शनिक हैं जिनकी रचनाएँ जीवन के हर पहलू को छूती है ,भाव में एक गहराई है, मर्म है, संवेदना है जो सीधा दिल से निकलती है और दिल में ही उतरती है ।

dharmendra mishra,author,writer


कल्पनाओं का एक ऐसा आकाश जहाँ अवसाद का धुंध है तो हर्ष रूपी चांदनी की शीतलता है, सुबह की उजली किरण जो जीवन को एक नई राह दिखाती है तो वहीँ अस्ताचल जीवन का अवसान भी है ।
बहुत कुछ भी कुछ ही है जब संभावनाओं का अनंत आकाश हमारे सामने हो ; धर्मेंद्र मिश्रा की कुछ चुनिंदा रचनाओं का जिक्र करेंगे जो लोगों को बहुत पसंद आई, लेखक के तौर पर एक नई पहचान मिली ।


उपन्यास “दायरा” ये उपन्यास कुछ ऐसे युवाओ के संघर्ष और आकंक्षाओं पर आधारित है जो समाज और सामाजिक कुरीतिओं से परे सामजिक समरसता का ख्वाब देखते हैं।
हमारा जीवन ये समाज एक दायरे में बंधा है ,अमीरी -गरीबी,जाती,वर्ग,समुदाय मजहब जैसे कई ऐसे दायरे हैं जो तय मानक पर आधारित हैं।


किंतु कहानी में नायक के मन में उठने वाले भाव तरंगे ,प्रेम की लहरे इस समाज रूपी दायरे बंधन से परे है जहाँ बोध है मनुष्यता का,नैतिकता का ,समान हक़ ,न्याय का, जिसके लिए वे समाज से संघर्ष करते हैं ।
यह एक सामाजिक और राजनीतिक परिवेश पर आधारित है, जिस में पात्रों के माध्यम से प्यार मोहब्बत ,अमीरी गरीबी ,जात पात जैसे जीवन की धारणा को रहस्य और रोमांचक तरीके से दर्शाया गया है ।
एक और प्रकाशित उपन्यास” मुहाना” की बात की जाए तो यह एक विज्ञान पर आधारित फैंटेसी है जो समय से कई हजार वर्ष आगे की दुनिया को दर्शाता है ।
आधुनिक विज्ञान की रूप रेखा काल्पनिक अवधारणा के आधार पर विषय -वस्तु तैयार की गई है। जहाँ पात्र गतिशीलता और स्थिरता का अनुभव एक साथ करते हैं । 

जीवन परिकल्पना है या वास्तविकता अगर है तो पहले परिकल्पना ने वास्तविकता को जन्म दिया या वास्तविकता ने परिकल्पना को ? कल्पना और वास्तविक दुनिया में कोई अंतर मालूम नहीं पड़ता।
आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, क्वांटम फिजिक्स की अवधारणा पर आधारित प्रायोगिक वैज्ञानिक जीवों से भरी दुनिया जहाँ पात्रों के माध्यम से ऐसा जाल बुनती है जहाँ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दुनिया में भेद कर पाना बहुत ही मुश्किल जान पड़ता है ।


वहीँ एक और कहानी संग्रह की पुस्तक “कहानी की दुनिया” प्रकाशित है जो दर्जनों कहानियों के संग्रह से तैयार की गई है ।
इस सीरीज में कई कहानियाँ है जो Horror ,Ghost haunted पर आधारित हैं, वहीँ कुछ गुदगुदाने,हँसाने वाली तो कुछ रुलाने वाली जो आप को अंदर से मानव संवेदना का अहसास करवायेंगी , वहीँ कुछ व्यंगात्मक चटपटी कहानियाँ भी हैं ।


जिसमें कुछ कहानियाँ सामाजिक ग्रामीण परिवेश पर तो कुछ कहानियाँ शहरी परिवेश पर आधारित, मजेदार गुदगुदाने वाली तो कुछ रुलाने वाली हैं । कुलमिलाकर एक कम्प्लीट मनोरंजन का पिटारा है ।
अब बात करते हैं हालिया प्रकाशित “सैर सपाटा : बाल सुलभ कहानियाँ ”
का दूसरा संस्करण ,इस पुस्तक के पहले भाग को भी लोगों ने बहुत पसंद किया था ।ये पुस्तक नैतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक परिवेश को ध्यान में रख कर जंगली जीव जंतुओं के माध्यम से भरपूर मनोरंजन करती है ।
सामान्य पाठक इन कहानियों के माध्यम से स्वयं को जोड़ कर देख पाता है ।


इसके अलावा भी और एक महत्वपूर्ण पुस्तक धारणावाद : अमूर्त दर्शन” है जो मानव जीवन दर्शन पर आधारित कई आलेखों का संग्रह है जो मनुष्य के आर्थिक सामाजिक ,राजनैतिक परिदृश्य पर उसके दृष्टि कोण पर बल देती है ।
कुछ अन्य पुस्तकें हैं जैसे की : लम्पट ,आबरू ,किड्स बूस्टर ,कलर मी, नोट बुक इत्यादि ।
ये सभी पुस्तकें अमेज़न ,फ्लिप कार्ट ,नोशन प्रेस के माध्यम से ईबूक, पेपर बैक माध्यम से प्रकाशित हैं ।
जिन्हें आप ऑनलाइन पढ़ सकतें हैं या आर्डर कर प्रिंट बुक मंगवा कर पढ़ सकतें हैं ।

Source :up18 news

मंगलवार, 29 अगस्त 2023

गुरुवार, 24 अगस्त 2023

Dark Matter News -- ScienceDaily

Using ESO's Very Large Telescope (VLT), astronomers have observed a large dark spot in Neptune's atmosphere, with an unexpected smaller bright spot adjacent to it. This is the first time a dark spot on the planet has ever been observed with a telescope on Earth. These occasional features in the blue background of Neptune's atmosphere are a mystery to astronomers, and the new results provide further clues as to their nature and origin.
from Dark Matter News -- ScienceDaily

सोमवार, 21 अगस्त 2023

Hindi book Author Biography

Introduction:

author,philosopher,novelist,storyteller
Dharmendra Mishra is a distinguished novelist, storyteller, and philosopher of the Hindi genre. His literary creations are a reflection of life’s various facets, filled with depth, meaning, and emotion that leave a lasting impact on the reader’s heart. Hailing from Rewa, Madhya Pradesh, Dharmendra embarked on his journey in the world of literature while pursuing an MBA in Marketing and Finance from DAVV Indore. Despite working with leading business organizations, his passion for writing novels, stories, and poetry led him on a path to literary excellence.

 Early Life and Education: 

 As a child, Dharmendra’s disinterest in the conventional school curriculum contrasted sharply with his fascination for fantasy and imaginative subjects. Throughout his school days, he nurtured a keen interest in literature and drew inspiration from celebrated Hindi writers like Munshi Prem Chand, Jai Sankar Prasad, Ramdhari Singh Dinkar, Mahadevi Verma, and Maithali Sharan Gupta. His primary education at Shishu Mandir in Rewa laid the foundation for his literary aspirations.

 Career and Literary Pursuits:

 Having completed his academic journey, Dharmendra made a significant decision to pursue a career in literary writing. He began penning novels, stories, and books that delved deep into human philosophy, showcasing his unwavering dedication and courage. His literary portfolio expanded to include works like “Dayra,” “Muhana,” “Kahani ki Duniya,” “Dharnavaad,” “Sair Sapta,” “Lampat,” “Aabru,” and “Kids Booster.” Many of these remarkable creations found their way to publication through renowned platforms such as Amazon, Flipkart, and Notion Press. Dharmendra’s versatility extended beyond prose, as he also delved into screenwriting for web series and composed devotional songs released on prominent audio platforms. Additionally, he contributed to academic literature, authoring Hindi grammar books for class 1 and class 2. 

 Personal Interests: 


 Beyond his literary pursuits, Dharmendra finds joy in various activities. He nurtures a love for playing cricket and badminton while unleashing his creativity in the realms of graphics and web development. 

 Legacy and Philanthropy:


 Dharmendra’s life philosophy centers on following the path of truth and fulfilling social responsibilities. He believes in contributing positively to the country and society in both his personal and professional life. Dharmendra Mishra’s literary journey showcases his profound commitment to the world of literature and his relentless pursuit of creativity. His words inspire, evoke emotions, and take readers on a transformative journey, leaving an indelible mark on the landscape of Hindi literature.