गुरुवार, 19 जुलाई 2018

मंगल पांडे 'Freedom fighter'

       


!!!जंग-ए-आजादी के प्रथम स्वंत्रता सेनानी मंगल पांडे !!!




freedomfighter_mangalpandey




"जन्मांध कापुरुष होते है ,
जो ठकुरसुहाती बाते करते है ,
धीर वीर तो जननी जन्म भूमि,
  पर मरने की बाते करते है। 
                  


ऐसा ही एक वीर जन्मा हिन्द की ,
धरा पे सन 19 जुलाई 1827 में ,
इतिहास गवाही देता  है,
आज भी उस दिन का,



बिगुलफूँका जिसने  जंग ए आजादी का,
वो दिन था सन 1857 की क्रांति का ,
मूर्छित कौम में जन फूंक दिया,
किया मान मर्दन  अंग्रेजो का,


 
सीने में धधकती ज्वाला ले ,
जाग उठा वो समर मतवाला, 
रक्त में उबाल सिंह मानिंद  ललकार,
अदम्य,सौर्य साहस का  परिचय देता,
आजादी के हवन कुंड में समिधा हुआ ,
 "किन्तु" हुआ न नतमस्तक !
 



स्वंतत्र समर अमर सेनानी ,
उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में जन्मा ,
वो "मंगल पांडे" लोक जन नायक था... "

शनिवार, 14 जुलाई 2018

वो गुजर गया जो जमाना...कविता


...कविता...
वो गुजर गया जो जमाना,
इतिहास का पन्ना बन गया.
हकीकत के आईने में एक किरदार ,
आज भी नजर आता है,
गहे बगाहे रोज ही वो सुर्ख़ियों में
रहता है.
मजमा लगा के दिल्ली दरबार *में,
सारे दरबारी* जब इकठा  होते है.
तू तू मै मै न वो तेरा न वो मेरा,
कोई पैरोकार न उसका फिर भी ,
 चर्चे होते है .
वो मक़ाम मिला उसे जो न मिला,
जंग-ए-आजादी के सिपहसालारों को.
वो कर गया जो कोई न कर गया,
गोडसे  मरा नहीं अमर होगया...
आप का ह्रदय से आभार ,अपने बहुमूल्य समय का कुछ हिस्सा हमें देने के लिए ...यह एक अस्तरीय रचना है ...ऐसा बिलकुल भी  नहीं ,इस रचना में ,यति ,गति ,विराम ,मात्रा व्यवस्थित करने की चेष्टा नहीं की है , अपितु भाव को सब्दो के माध्यम से लय और तुक में बांध दिया है .
उद्देश्य...
"साहित्य समाज का निचोड़ तथा वर्तमान द्वारा भविष्य को दिया गया अमूल्य धरोहर है "