गुरुवार, 11 जनवरी 2024

religion vs politics

 धर्म vs राजनीती 


इन दिनों हमें बस यही दिखाई और सुनाई पड़ रहा है;धर्म और राजनीती ।

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जब ये बार बार हमें दिखाई और सुनाई पड़े तब होता है धर्म का राजनीतीकरण  या कहें  धार्मीक -राजनैतिक समीकरण ।

जिस प्रकार एक स्त्री और पुरुष वासना के मद में अंधे होकर उन्मत्त हो !इस बात में फिर कोई अन्तर नहीं रह जाता कौन किसके साथ है, मर्यादा -अमर्यादा ,प्रेम -वासना में कोई भेद नहीं रह जाता ,इन्द्रिय सुख ही जीवन का परम लक्ष्य मालूम पड़ता है।  

पहले ऐसी चीजें हम कट्टर धार्मिक देशों में ही देखते,सूनते आए हैं, उनकी क्या हालत है,यह भी किसी से छिपा नहीं,किस कदर धार्मिक कुंठा और उन्माद से ग्रसित हैं जो वैज्ञानिक ,सामाजिक और अर्थिक प्रगती में बाधक है ।एक देश के रुप में हम भी उसी ओर कदम बढ़ा चुके हैं ।

देश के मौजूदा चारो पीठ जो सनातन संस्कृति का प्रमुख ध्वज वाहक है,उससे भी बड़ी पीठ अयोध्या को बनाया जा रहा है जहाँ से धर्म और राजनीती दोनों एक साथ साधी जायेंगी, फिलहाल के लिए उस पीठ का सबसे बड़ा धर्माचार्य कौन बनने जा रहा आप जानते हैं ।

अब वे ही निर्धारित करेंगे कौन धर्म में है कौन धर्म के विरुद्ध है, जो सत्ता के साथ हाँ में हाँ नहीं मिला पा रहे,वे लोग राम विरोधी, धर्म विरोधी यहाँ तक की सरकारी सूचना तंत्र  द्वारा जो प्रमुख सत्ता विरोधी दल और नेता हैं उन्हें राष्ट्रद्रोही तक साबित किया जा सकता है ।

आम जन मानस में डर और संसय का ऐसा माहौल निर्मित किया जायेगा, कि वे ये सोचने पर मजबूर होंगे, कहीं वे मौजूदा सत्ता का विरोध कर अपने  धर्म और अराध्य का तिरस्कार तो नहीं  कर रहे, जो अपने लोग हैं अपने जान पहचान वाले हैं ,वे क्या सोचेंगे, समाज में आपसी मन मुटाव और विद्वेष की भावना बड़ी तेजी से फैलेगी ।

ऐसे में देश समाज में जो समाजसेवी संगठन और धर्माचार्या जो अभी भी यह मानते हैं,सरकार जो कर रही है वो गलत है तो, उन्हें खुल के सामने आना होगा। 




धर्म का इस प्रकार हो रहे राजनीतीकरण का विरोध करना होगा, विद्वेषपूर्ण राजनीती का खंडन करना होगा ,मुखर होना होगा, जन जागरण के माध्यम से पीड़ा रखनी होगी ।

ऐसे विध्वंसकारी वातावरण में,एक धार्मीक ,आस्थावान होने के नाते अपने मन मंदिर में बसे प्रभू श्री राम जी से यही प्रार्थना है; प्रभु आपकी प्राण प्रतिष्ठा के नाम पर जो राजनैतिक सडयंत्र रचा जा रहा है, उसमें आप भी सम्लित ना हो!

                                                                                                                                         -धर्मेंद्र मिश्रा