रविवार, 28 फ़रवरी 2021

विचार अवधारणा"बौद्ध दर्शन"

       विचार अवधारणा का जीवन में महत्व



विचार  अवधारणा  का  हमारे जीवन में क्या महत्व है कैसे  हमारे जीवन की दिशा को बदलते तथा सार्थक बनाते है ,इस विषय-वस्तु पर विस्तार पूर्वक जानते है...



"अमूमन हर व्यक्ति का  मन ज्यादातर सम्भोग और धन के विचरण में ही लगा रहता  है।

 जीवन के लिए मूलभूत आवस्यक चीज है ,जिसके पास नहीं है ,उसके लिए सब कुछ है,जिनके पास है ,उनके लिए कुछ भी नहीं है।  किन्तु हर समय स्मरण करने से ,कई और मनोविकार को जन्मती तथा जीवन की गति को असंतुलित imbalance करती है। ऐसी अवस्था जीवन के मूल उद्देश्य से भटकाव का कारण है। बुराई बुरी है फिर भी चाह कर भी रोक क्यों नहीं पाते ? कहना जितना आसान है ,पालन उतना ही मुश्किल है।


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मन बांधे नहीं बांधता ,लगाए नहीं लगता, स्वतंत्र प्रवाह से ही गति करना चाहता है; इस दलदल में धसता जाता है जो प्रयासों द्वारा भी निकल नहीं पाता।  निकालना भी कौन चाहता है ?



इसी में तो मज़ा है। लेकिन जो गहरे तक  उतर गया ,घर का रहा न घाट का ,निकना चाहे तो निकल नहीं पता ,पूरी तरह धसना चाहे तो गहरे तक उतर नहीं पता ,एक पाँव यथार्थ में एक पाँव सांसारिक जंजाल में ।

ऎसे ही उहा -पोह में जीवन ढका जाता है।

 अंदर से कोई आवाज आती है ? नहीं आती ,आत्मा sprite कूड़े के ढेर में दब गई ,कभी -कभी जीवित होने का अहसास कराती है। समय ही नहीं मिलता ,काम बहुत है ,एक बार ये फला काम अच्छे से होजाये ,फिर कोई चिंता नहीं आराम से सुनेंगे।  चित्त में चिंता बेलागाम घोड़े की तरह सरपट दौड़ती चली जाती  है। 

ईश्वर GOD भी एक धारणा है ,मन के माने मान है ;मान लिया यही भगवान् GOD है ,इसमें गलत क्या है, हर समय ,सोते जागते इसी में  ही मन लगा रहता है तो इसकी पूजा करने में बुराई क्या है? 

जिसे भजोगे ,उसे ही प्राप्त होंगे ? संसार का नियम तो यही कहता है। फिर क्या देवता GOD प्रसन्न होगये ,जिसे भजा वह प्राप्त होगया , व्यवसाय खोल कर देदिया ,जीवन में सब आनंद मंगल। लेकिन ये मस्ती ज्यादा दिनों तक खटाती नहीं ,कुछ समय ही गुजरे फिर से जीवन

 निराश ,उबाऊ और तनाव से भर गया जीवन ही कूड़े का ढेर होगया। फिर से कोई देवता खोजो  ,जो जीवन को सास्वत और टिकाऊ बनाये।

भावार्थ:Summery:

"जीवन टिकाऊ तभी होगा ,जब यह ज्ञात होगा ,जीवन पद्धति अनुसार किन विचारो का कितना सेवन करना है।"

~धर्मेंद्र मिश्रा ~

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शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

मॉर्डन ट्रेंड, हिंदी कविता "Modern trend ,Hindi Poetry"

            !!!हिंदी कविता!!!  

                " मॉर्डन  ट्रेंड "

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"देशी बीबी विदेशी ढंग,

मॉडर्न ट्रेंड का है ये रंग,

खाना बनाने में बीबी का BP बढे,

बाहर के खाने में कोलेस्ट्रॉल बढे,

हफ्ते में ६ दिन तो बीबी डाइट Diet से रहे,

अजीब कसम-कश में है पतिदेव,

करे तो आखिर क्या करे ,

सुबह से साम तक नौकरी करे, 

साम को बीबी की धौस भी सहे,

मेरी मानो पिज़्ज़ा-बर्गरPizza-Burger ,

ऑर्डर करके मगवा लेना। 


 

                                                                    ~धर्मेंद्र मिश्रा ~

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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

Short Story

                                  

"चरण वंदन समारोह "

  कहानी का संछिप्त परिचय सार...

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दीनानाथ ,पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता है जो पिछड़ी जाती से आते है...तन मन धन से पार्टी की सेवा में लगे रहे ,बावजूद टिकट नहीं मिल पा रही ।

 

वही सुमेर सिंह जिसकी मुख्यामंत्री से काफी अच्छी साठ गांठ है अपने धन बल के प्रभाव से उसी विधान सभा छेत्र से टिकट मिलना मिलाना तैय है। दीनानाथ पूरी तरह से अंदर ही अंदर टूट जाते है । पार्टी छोड़ने का मन बना लिया । दीनानाथ के एक मित्र है ,दिवाकर प्रसाद जो सहर के बड़े क्रिमिनल लॉयर है ...उन्होंने दीनानाथ को टेढ़ी ऊँगली से घी निकालने का सुझाव दिया।

 

दीनानाथ ने वैसा ही किया। बागी तेवर अख्तियार कर लिया ,जाती आधारित राजनीत को हवा देनी सुरु कर दिया। सभी पिछड़ा समुदाय को एक जुट करने की मुहीम छेड़ दी।

 

कई सभाये की ,उत्प्रेरक भाषणों के माध्यम से छुआछूत -गरीबी ,शोषण ,सामाजिक व्यवस्था पर कटाछ करते। 

Poor_Life_Life_in_hell

चरण वंदन समारोह नाम से एक सभा का आयोजन किया ...जिसमे मेहतर ,धोबी ,सफाई कर्मचारी ,आदि का सम्मान किया जाता है ,पैर धुंवाये ...सुमेर सिंह को मंच के माध्यम से चुनौती दी। सुमेर सिंह ने अपनी तरफ से ,ले देकर मानने की कोशिश करता है ।

 

दीनानाथ अपनी बात पे अडिग रहे ,सुमेर सिंह को घर से बेइज्जत कर निकाल दिया।

 

सुमेर सिंह ने दीनानाथ की आगामी सभा को समसान में बदलने भीड़ के माध्यम से बड़ी गहरी साजिश रची। जिसमे कई लोग मारे गए ,दीनानाथ पहले से ही सतर्क थे।

 

सुमेर सिंह की बाजी उलटी पड़ गई। दीनानाथ की बगावत ने और जोर पकड़ लिया ...इस घटना के बाद सभी समुदाय के लोगो की सहानभूति दीनानाथ के साथ होगई। मुख्यमंत्री को दबाब में आकर सुमेर सिंह की जगह दीनानाथ को टिकट देना पड़ा गया ।

"प्रकाशित पुस्तक सबदरंय का अंश... 

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~धर्मेंद्र मिश्रा ~


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शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

मनुष्य को प्रकृति से क्या सीखना चाहिए ?

 " मानव प्रकृति - स्वाभाव "






Human_nature,Co existence_with_nature

       मनुष्य  के  मनुष्य  होने  और  जिन्दा  होने  का  अर्थ , 

मन , कर्म ,वचन  तीनो  से  एक  होना . यदि  नहीं  तो  पशु  जानो ?

पशु  में  भी  कुत्ता  वफादार  है  ,मनुष्य  इंद्रियों  के  वशीभूत  होने  के 

कारण  स्वाभाव  से   दोगला  है , 

इस अर्थ  में  मनुष्य  का  कुत्ता  होना  भी  कोई  बुरी  बात  नहीं है। 

हर  मनुष्य  के  लिए  अव्सय्क  नहीं  की  वो  मनुष्य  ही  हो ,  

किन्तु  जो  मनुष्य  है , उनके  लिए आवस्यक   है  की  वो  विभेद  करे। "

              

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क्या "Covaxin" से चीन और कोरोना का इलाज संभव है ?

                                         

क्या "Covaxin" से चीन और कोरोना का इलाज संभव है ?

Plasma therpy aur covaxine dono hi saman siddhnt par kaam karte hai, mare hue corona virus ko antigen, ke rup me human body ke andar inject kiya jata hai, jisse manushya ke andar ka rachha tantra wbc task force sachet hojaye, aur parypat antibody ke rup me militry   seema par deploy kar sake, jaise hi china Namdar  corona akrman kare to mauke par hi maar giraya jaye,

jinke pas parypt antibody maujud hai, unhe ess vaccine se rahat mil sakti hai?


lekin vitnam, tiwan jaise desh,bade ,bujurg, bache,kisi gambhir bimari se grast Hong kong jo parypt antibody nahi bana sakte, unki chhmta hi utni nahi hai, uss awstha me antrik sakti vardhan ke alawa bahri sakti ki awsykta padegi jo antrik, surchha  ke sath, Dusman par sidha prahar kare, Ess disha me kai desho ki vaccine jinka parichhan manushya jaati par chal raha hai.


 jinme WHO ki fehlist me sabse upar oxford dwara banai gai vaccine jo samannya majhole kuchh aise visadu jo sardi, jukam ke prati uttar dai hai, jinka nakartmak prabhav manav sarir me kam padta hai ya nahi ke barabar padta hai, ka parichhan chal raha hai, ab ye to bhavishya Ke garbh me hai.


 Briten ne jis Hong kong ko China ko lise par diya tha,China dwara siver attacks hone par kaise respond karta hai ,ya phir America jiase kuchh power ful vaccine ki khoj ki awsykta Hogi, jo Banki kamjor,chhote desh,tiwan ,vitnam jaise kam umar, jyada umar, kai gambheer bimari se pravhaviton par saman pravhav se kaam kare , chhote mote desh ki antibody, ko nuksan bhi na pahunchaye aur unki samprabhuta, akhndta bhi surchhit rahe.


yadi safal parichhan elaj sambhav hopaya,to aise desh ke sansadhano ka samuchit  upyog south china sea me kiya ja sakega, Phil haal abhi to door ki kaudi hai,China,Corona,Namdar ke vyvhaar, karypradali par sodh samjh jis gati aur gahrai se badhti ja rahi, umeed  hai ki
Bhavishya me elaj sambhav ho payega."

China ,Corona,Namdar,Plasma therapy


बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

मनुष्य का एक दूसरे से अलग होने का वैज्ञानिक कारण


 " व्यावहारिक विज्ञानं,Behavioral science"




Behaviour_science_Human_Nature_motivational_story

                                         

हर प्रजाति जीव अपनी प्राकृतिक संरचना अनुसार दृश्टिगत समानता  है किन्तु  व्यावहारिक मूल तत्त्व ,गुण जीवन को औरो से किस प्रकार भिन्न बनाते है ,इस विषय पे गहराई से जानते है ...

 

हर  पदार्थ element की  अपनी  प्रॉपर्टी  अपना  मूल  गुण  धर्म  होता  है , किसी  कारक   की उपस्थिति में  मिलान   मिक्स  करने  पर  मूल गुण -धर्म , प्रॉपर्टी  में बदलाव होने   लगता  है। कहावत proverb भी है तरबूजा  तरबूजे को देख कर रंग बदलता है मिश्रित  कुछ  चमकीला bright रंग  होजाता  है। 

 

...यदि  ऐसा  नहीं  होता  ,एक  दूसरे  को  प्रतिकर्षित  करते  है  इसका  अर्थ  ,मौजूदा पदार्थ  element का गुण धर्म  property, में कोई समानता  नहीं  है ।

 

 उसी  प्रकार  मनुष्य  के  व्यव्हार  में  भी  यही  बात  लागु  होती  है ,स्वतंत्र  अवस्था  में  वह  अपने अनुसार  कर्म -साध्य  व्यव्हार   करता  है।

 

 परिस्थिति   को  कारण  भूत  solvent मानते  हुए  किसी  और  मनुष्य  के  संपर्क  में  आने पर व्यव्हार  में  परिवर्तन  स्वाभाविक परिक्रिया  हो सकता है। 

 

 ऐसा न होने पर   ...इसका  अर्थ means व्यव्हार  एक  दूसरे  के  अनुकूल  नहीं  है ...विरोध  वाद - विवाद  कारण  स्वरुप  परिलछित  होता  है ।

 

संछेप में यदि समझे मनुष्य  को  अपनी  प्रकृति  के  अनुसार  ही  व्यक्ति   का  चुनाव  करना  चाहिए  ,जो छिपे हुए गुणों में उभार लाये  जीवन  को  बेहतर better तथा  सार्थक useful  बनाये।"


                                                                                                     ~धर्मेंद्र मिश्रा ~

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मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

हनुमान जी रामसेतु गिलहरी का आपस में क्या सम्बन्ध है ?


रामायण के सन्दर्भ से गिलहरी पर  प्रसंग" 


Hanuman ji_Rmsetu_Ramayan




रामायण हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक है ,जो हमें जीवन जीने की प्रेरणा उत्कर्ष और प्रकर्ष पे ले जाने वाली है ,यदि हम उन सीखो को अपने जीवन पे लागु करे ,न सिर्फ जीवन जीने का ढंग बल्कि हम अपने जीवन को सफल बना सकते है ,ऐसे ही रामायण के सन्दर्भ से एक बड़ा ही रोचक प्रसंग ,वाक्य है जिस विषय पर हम इस आलेख के माध्यम से जानेंगे  ... 



                     "रामायण से सम्बंधित एक कथा है विस्मरण हो  इससे  अच्छा  पुनः स्मरण से स्मृति  जीवंत होजाये -

        हनुमान जी महाराज जब लंका गए , अशोक  वाटिका  तहस - नहस  कर रहे  थे  रावण  ने      अक्षय  कुमार  को भेजा  ,

 

हनुमान जी के प्राण  घातक  आघात  से अक्षय कुमार  अचेत  हो  गिर  पड़ा ,तभी उसके  मुख  से राम  निकला ,राम की कृपा से मोछ स्वरुप  गिलहरी के रूप में उसे अभय दान मिला।


तदुपरांत वो गिलहरी एक पेड़ पे जा कर चढ़ गई। हनुमान जी महाराज जब लंका  अग्नि देव को  समर्पित कर  पुनः प्रस्थान केलिए उड़न भरी वो गिलहरी उनके विशाल काय पूंछ में चढ़ गई। ये वही गिलहरी है...


,रामसेतु निर्माण में स्वयं के सारीर को गिला कर रेत में लोट -पोट होकर पत्थरो के बीच की दरार को भरने का काम किया । कहने का तात्पर्य संसार में हर चीज ,किसी न किसी कारण सारभूत रूप से है ,उपहास परिहास द्वारा श्रेष्ठता का निर्धारण नहीं किया जा सकता ,हर किसी के प्रति आदर और प्रेम का भाव ही जीवन है। "

                                                                                                                                "धर्मेंद्र मिश्रा "

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