बुधवार, 19 जुलाई 2017

video script for brazil sex culture

ब्राज़ील का फूटबाल और वहाँ के  बीच तो फेमस है ही इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो आप को रोमांचित और आश्चर्यचकित कर देगा तो  इस वीडियो में हम आप को कुछ ऐसा ही बताने वाले है  .
१-ब्राज़ील का सेक्स कल्चर-
ब्राज़ील दक्षिण अमेरिका का सब  से बड़ा तथा दुनिया का ५ व बड़ा देश है ,ब्राज़ील का नाम आते ही लोगो दिल में वहाँ पर पानी  से भरे घने जगल ,फैले सुमद्री बीच ,ऊँचे -ऊँचे माउंटेन ,दीपो के समूह ,कुल मिला कर विभिन्न -विभिन्न प्रकार की विभिदातायो  से भरा देश है .लेकिन ब्राज़ील की सब से खास बात  ज्यादा तर टूरिस्ट  दिमाग में सेक्स का ख्याल लेकर आते है,ब्राज़ील में बेस्यावृति क़ानूनी तौर पर मान्य है   औरत और मर्द वयस्क होने पर खुले तौर पर इस पेसे को अपना सकते है ,लेकिन वेश्याल का संचालन सेक्स वर्कर के माध्यम से करना  क़ानूनी  तौर पर इलीगल है ,आप को ये जा कर हैरानी  होगी  ब्राज़ील गोवेर्मेंट के तरफ से पेशेवर सेक्स वर्कर को प्रमोट और जागरूक website के माध्यम से करता है  ,की किस तरह से बाहरी टूरिस्ट को अपनी   तरफ अट्रैक्ट करे जैसे -लोगो को आपने नृत्य के माध्यम से ,उनकी प्रसंसा  कर ,टूरिस्ट को स्पर्श कर ,उनके   अहकार  को जीते ,ये सब चीजे  उनको बताई जाती है वेबसाइट के माध्यम से ,ज्यादातर ये सेक्स वर्कर  नाईट क्लब ,होटल ,बीच ,बार और highwey जैसे प्लेस पर काम करते है .
 बहार से जब टूरिस्ट आते है तो इन  बेश्यायो  को किराये पर लेते है और यहाँ पर डायरेक्ट पेमेंट के साथ -साथ ,उनके साथ घूमना फिरना  ,डिनर डेट पर ले जाना ,गिफ्ट देने की  भी परंपरा है, कुलमिला कर कह सकते है गर्लफ्रंड  जैसा ट्रीट करना  .



२-ब्राज़ील में महिला और पुरुषो के कई सेक्स पार्टनर होना आम बात है -

 पारम्परिक ब्राज़ील कल्चर है की पुरुष के कई महिला साझेदार  होने चाहिए और वहाँ की औरतो से भी यही अपेछित है की कई पुरुसो के साथ सम्बद्ध रख सकती है और इसकी चर्चा अपने परिवार और और पति से भी कर सकती है की उसके सम्बद्ध किसके साथ और किते लोगो के साथ है .एडल्ट युथ जिकी ुमार १८-२४ साल उनपर एक सर्वे किया गया जिससे कई बात सामने आई जो चौकाने वाले है .आइए  जानते है वो सच्ची है क्या
ऐसी महिला जिनका सम्बन्ध केवल एक पुरुष के साथ सम्बन्ध रखती है २३.१ % है तथा  पुरुष जिनका सम्बद्ध १ महिला के साथ है  महज  ३.२% फीसदी  है .
और ऐसे महिला जिनका जिनका सम्बन्ध २ या ३ पुरुस्को के साथ है उनका ४१.६% है तथा पुरुष जो २ या ३ महिला के साथ सम्बद्ध  रख ते है उनकी सख्या ११.५% है.
४ या ५ पुरुषो  के साथ सम्बद्ध रखने वाली महिलायो  की संख्या १७.५% है ,तथा पुरुष की सख्या १६.५% है.
६ या उससे अधिक पुरुषो के साथ सम्बद्ध रकने वाली महिलाओं की सख्या १७.८% है और सबसे हैरान करने वाला अकड़ा है पुरुष जिनका सम्बन्ध ६ या अधिक  महिलायो  के साथ है उनकी संख्या ६८.८% है .
ये सर्वे ब्राज़ील के कई प्रांतो  में किया गया जैसे पोर्ट अलगेरे ,रिओ दे गेनेरिओ और सैल्वडॉर .

3-ब्राज़ील का कार्निवल  -

ब्राज़ील की बात हो और वह के कार्निवल का जिक्र न हो ऐसा भला हो सकता है ,ब्राज़ील का  कार्निवल फेस्टिवल  दुनिया भर में फेमस है .
ब्राज़ील की सड़को और वहा के समुद्री बीचो पर लड़किया अर्ध नग्न अवस्था में साम्बा और थोंग जैसे फेमस ब्राज़ीलियाई डांस ,भेद ही कामुक अंदाज में करती लड़किया ,जिसे देख बहरी पर्यटक खींचे चले आते है .
पर्यटक इन भिड़ो में अपनी पसंद की लड़कियों को चुनते है और एन्जॉय करते है ,उसी प्रकार वहा  की लड़किया भी बहरी पर्यटक को लुभाने का प्रयसस करती है .कुल मिलकर ब्राज़ील का कार्निवल फन और मस्ती से भरपूर होता है .
आपने  बहुत से ब्राज़ीलियन ट्रेवल एजेंसी की साइट में देखा होगा ,बेहद  ही कामुक अंदाज में सेक्सी लड़कियों की तवीर ,भीड़ में  मस्ती और एन्जॉय करते लोग  .तस्वीर और  वीडियोस के माध्यम से बहरी पर्यटको को अट्रैक्ट करने की कोशिस करते है  .
4-वीमेन ट्रैफिकिंग -
 ब्राज़ील में वीमेन ट्रैफिकिंग भी बड़े पमैने पर होती है यहाँ से महिला ,बच्चे ,किशोरो की तस्करी कीजाती है ज्यादा तर uneducated , low  income ग्रुप के  लोग इस समस्या का सिकार है .

5-ब्राज़ील का  बढ़ता  hiv  और एड्स-

ब्राज़ील के सेक्स की बाते तो बहुत कर ली अब आपको यहाँ पर  hiv  और एड्स से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में बताते है .ब्राज़ील में hiv  और एड्स महामारी की तरह फ़ैल रही है .
ब्राज़ील में साल 1980  से लेकर 2015  तक 798361  एड्स की केस रेजिस्ट्रेड किये गए है ,ब्राज़ील में हर साल तक़रीबन 40  हजार hiv  क़े   केस सामने आरहे है .
साल 2014  में 72000 ,  hiv  की केस idenifify किये गए है तथा साल 2015  में 81000 से ज्यादा केस identify  किये गए, यानि साल दर साल hiv  मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है .
ब्राज़ील की सरकार ने hiv  और एड्स की रोक थम की लिए कार्निवल कैंपेन "let  the  condom  join  the  party  "   नाम से मुहीम चला रही है .
इस  कैंपेन की माध्यम से कंडोम क़े महत्व और hiv  से कैसे बचे इस बात पर जोर देरही है ,फिल्म रेडियो प्रसारण ,सांग्स ,होर्डिंग ,बैनर ,जैसे कई माध्यम से लोगो को जागरूक करने का प्रयास कर रही है .

6-ब्राज़ील के वेश्यावृति का भारत से कनेक्शन-

 एक बेहद ही रोचक बात जिसे आपलोग सायद ही जानते होंगे ब्राज़ील क़े सेक्स और वेश्वावृति क़े तार भारत से भी जुड़े है ,हमारे देश में सबसे पहले 16  वि सदी में पुर्तगाली आए गोवा में अपनी व्यपारिक कोटि खोली ,और तम्बाकू का उत्पादन भी पुर्तगालियो ने ही आरम्भ किया ,पुतर्गाली भारत में आपने पैर ज़माने क़े बाद ब्राज़ील से अफ्रीकन मूल की औरते और लड़कियों का आयात करना शुरू किया ,वो इन का उपयोग आपने रिस्तेदारो ,मित्रो ,और आपने व्यापारिक साझेदरो क़े लिए सेक्स गुलाम क़े तौर पर करते थे .
 वो इन लड़कियों और औरतो को महज चीज समझते थे इनके साथ जानवरो जैसा व्य्हार करते थे , ब्रज़ीलियी वेश्यावृति की दिशा में एक छोटे से कदम क़े तौर पर देखा जाता है .

7-  ब्राज़ील में वेश्यावृति की शुरुआत कैसे हुई इसके बारे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य - .
ब्राज़ील  क़े वेश्यावृति क़े इतिहास में यहूदी वेश्यायो का विशेष तौर पर जिक्र है .
1867  में ब्राज़ील की राजधानी रिओ क़े बंदरगाह पर 70  यहूदी वेश्ये  पोलैंड से आयी जो वेश्यावृति क़े धंधे में संलिप्त थी ,फिर इसके बाद वेश्यावृति से पीड़ित कई महिलाये ,,रूस ,लिथुनिअ ,रोमानिया ,ऑस्ट्रिया ,फ्रांस जैसे कई देशो से ब्राज़ील आयी .इन महिलायो  की संख्या 1200  क़े अस पास बताई गए है .
कहा जाता है " ge  midgal " नाम का एक यहूदी दलाल माफिया था जिसके सदस्य खुद को समृद्ध व्यसायी   क़े तौर पर स्थापित किया और वो लोग  व्यासस  की आड़ में तस्करी का काम करते थे और यहूदी महिला को यौन गुलाम बनाकर रखते थे .
1900  सदी क़े मध्य तक आते -आते यहूदी वेश्यालयों की संख्या तक़रीबन 400   से अधिक होगई.
यहूदी वेश्या को अन्य यहूदियों क़े द्वारा ख़ारिज किये जाने क़े कारन इन वेश्या ने रिओ में एक अलग यहूदी समुदाय की स्थापना  की आपने लिए अलग कब्रिस्तान ,पूजा की लिए sinegon , बनाये ,अलग यहूदी फेस्टिवल मानाने की प्रथा सुरु की .
दुतियाँ विश्व युध्य क़े बाद जब वेश्यावृति और तस्करी में रोक लग गई ,तब वह की वेश्याो ने खुद को रिओ की संस्कृति में  ढ़ाल लिया और विभिन्न -विभिन्न तरह क़े कला क़े पेशे को अपनाया  .
उम्मीद है आप को  हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई  होगी .

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मुस्लिम संत ने रखी थी गोल्डन टेम्पल की नींव, जानिए स्वर्ण मंदिर से जुडी कुछ ऐसी ही ख़ास बातें


अमृतसर की सबसे खास और प्रसिद्ध जगहों में से एक है गुरुद्वारा हरमिंदर साहिब। जो गोल्डन टेम्पन के  नाम से भी जाना जाता है।श्री हरमंदिर साहिब के नाम का अर्थ “भगवान का मंदिर” है //  यह गुरुद्वारा अपनी सुंदरता और धार्मिक एकता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह धार्मिक स्थल न की सिर्फ बेहद खूबसूरत है, बल्कि इतिहास की नज़र से भी बहुत खास है। आज  के इस वीडियो में हम आपको गोल्डन टेम्पल से जुड़ी
  कुछ ऐसी बातें बताएँगे जिन्हे जान ने के बाद आप हैरान REH जाएंगे


1. गोल्डन टेम्पल के निर्माण के लिए जमीन मुस्लिम शासक अकबर ने दान की थी।

2. इस टेम्पल की नींव साईं मियां मीर नाम के एक मुस्लिम संत ने रखी थी। सूफी संत साईं मिया मीर का सिख धर्म के प्रति शुरू से ही झुकाव था। वे लाहौर के रहने वाले थे और सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी के दोस्त थे।
जब हरमंदिर साहिब के निर्माण पर विचार किया गया, तो फैसला हुआ था कि इस मंदिर में सभी धर्मों के लोग आ सकेंगे। इसके बाद सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से दिसंबर 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी।  सिखों के चौथे गुरु रामदासजी ने तालाब का निर्माण शुरू किया था।

स्वर्ण मंदिर को कई बार नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन भक्ति और आस्था के इस केंद्र का फिर से निर्माण कराया गया। ऐसा माना जाता है कि 19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने इस मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। तब महाराजा रणजीत सिंह ने इसके पुनर निर्माण  के साथ इसकी गुंबद पर सोने की परत चढ़वाई थी। मंदिर को कब-कब नष्ट किया गया और कब-कब बनाया गया, यह वहां लगे शिलालेखों से पता चलता है।

. आप जानकार हैरान होंगे की प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने जीत के लिए यहां पर अखंड पाठ करवाया था।

5. अहमद शाह अब्दाली के सेनापति जहां खान ने इस मंदिर पर हमला किया था, जिसके जवाब में सिखों की  सेना ने उसकी पूरी सेना को ही खत्म कर दिया था।

6. इस मंदिर में सभी धर्म के लोग आते हैं। मंदिर में चार दरवाज़े चारों धर्म की एकता के रूप में बनाए गए थे।

7. यहां दुनिया का सबसे बड़ा लंगर लगाया जाता है। यहां लगभग 70000 लोग रोज़ खाना खाते हैं।   लेकि त्योहारों के दिनों में ये संख्या 2 LAC को भी पार कर जाती है .
इस मंदिर में 24 घंटे हलवे की व्यवस्था रहती है। अनुमान के मुताबिक़, रोज़ यहां दो लाख रोटियां बनती हैं।

8. कहा जाता है कि मुग़ल बादशाह अकबर ने भी गुरु के लंगर में आम लोगों के साथ बैठकर प्रसाद खाया था।


10. इस मंदिर में 35 प्रतिशत पर्यटक सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों के होते हैं।

11. इस मंदिर में साधारण से लेकर अरबपति तक अपनी सेवा देते हैं। आप देख कर चौंक जाएंगे की यहां जूते पोलिश करने से बर्तन साफ़ करने वाले लोग अरबपति होते है जो यहां सेवा देने आये होते है  //

12. माना जाता है कि सरोवर के बीच से निकलने वाला रास्ता ये दर्शाता है कि मौत के बाद भी एक यात्रा होती है।

14.  स्वर्ण मंदिर पहले पत्थर और ईंटों से बना था। बाद में इसमें सफ़ेद मार्बल यूज़ किया गया।

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वो 6 चीजें जो प्रधानमंत्री मोदी को इज़रायल से भारत लानी चाहिए


1947 के आस-पास हिंदुस्तान और इज़रायल लगभग साथ में अंग्रेज़ों से आज़ाद हुए और दुनिया के नक्शे पर उभरे // कायदे से  दोनों देशों को तुरंत दोस्त बन जाना चाहिए था लेकिन भारत के प्रति झुकाव के कारण 1992 तक भारत इजराइल के रिश्ते दुनिया से छुपे रहे . फिर 1992 में हिंदुस्तान ने इज़रायल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा ही दिया. उस बात को 25 साल होने को हैं और इस मौके को यादगार बनाने के लिए भारत के इतिहास में पहली बार कोई 
प्रधानमंत्री आधिकारिक तौर पर इज़रायल गए . . अब तक हिंदुस्तान और इज़रायल अगल-अलग क्षेत्रों में एक-दूसरे का साथ देते आए हैं. लेकिन अब ये संबंध और गहरे  होने जा रहे हैं.

चारों तरफ से दुश्मनों से घिरे इस छोटे से देश ने अपनी मेहनत से ऐसा बहुत कुछ हासिल किया है जो हमारे लिए मिसाल की तरह हैं. आज के इस वीडियो में हम उन पांच चीज़ों के बारे में जानेगे जो हमें इजराइल सीखनी चाहिए .

#1. अपनी संस्कृति को सहेजना

हिंदुस्तान में भाषाओं की बड़ी विविधता रही है. 22 बड़ी भाषाएं हैं. और 1600 से ज़्यादा बोलियां है . लेकिन यूनेस्को द्वारा जारी की गई  रिपोर्ट  के मुताबिक इनमें से 196 लुप्त होने की कगार पर हैं. मतलब इन्हें बोलने वाले कम होते जा रहे हैं. इस मामले में हम दुनिया में सबसे बुरी स्थिति में हैं. भाषाएं सहेजना हम इज़रायल से सीख सकते हैं. 20 वीं सदी की शुरुआत में हिब्रू यहूदियों के धर्मग्रंथों में सिमट चुकà
 थी. वैसे ही जैसे आज हमारे यहां संस्कृत हिंदुओं के धर्मग्रंथों तक सीमित है. लेकिन जब यूरोप के अलग-अलग हिस्सों से यहूदी अपना नया मुल्क बसाने फिलिस्तीन आकर बसने लगे, तो पूरे देश को बांधने के लिए एक नई भाषा की ज़रूरत महसूस हुई. किसी विदेशी भाषा को अपनाने की बजाय यहूदियों ने अपने इतिहास को तलाशा और
 लोगों ने आपस में हिब्रू में बात करनी शुरू की. स्कूल खोले गए, जहां सिर्फ हिब्रू में पढ़ाई होती थी. इस तरह धीरे-धीरे हिब्रू का संस्कार लोगों में दोबारा पनपने लगा. आज इज़रायल की 3 बड़ी यूनिवर्सिटीज पूरी तरह से हीब्रू में पढ़ाई कराती हैं, वो भी इंजीनियरिंग जैसे विषयों की. इज़रायल की पढ़ाई का दुनिया लोहा मानती है.

#2. खेती की नयी तकनीक 

हिंदुस्तानी 40 पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं. हमारे यहां खेती के लिए अकूत संसाधन हैं. लेकिन उपज हो न हो, हमारा किसान आज भी बेहाल है. वहीं इज़रायल छोटा सा देश है, अपने यहां के मिज़ोरम के बराबर. उसमें से भी सिर्फ 20 फीसदी ज़मीन ऐसी है जिस पर खेती हो सकती है – सिर्फ 1 लाख 26 हज़ार एकड़ में. ऊपर से पानी की कमी है. बावजूद इसके इज़रायल खेती के मामले में दुनिया में सबसे अव्वल देशों में गिना जाता है. प्रकृति  की चुनौतियों को इज़रायल ने तकनीक से जवाब दिया है. यहां खेती में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी दुनिया में सबसे उन्नत है. इज़रायल में सिर्फ पौने चार फीसदी लोग खेती करते हैं लेकिन वो अपने देश की ज़रूरत का 95 फीसदी खाना उगा लेते हैं. साथ ही ढेर सारा माल एक्सपोर्ट भी करते हैं.


कुछ इलाकों को छोड़ भारत में खेती में इज़राइल जैसी कोई चुनौती नहीं है. इज़रायल के अनुभवों से हम काफी कुछ सीख सकते हैं, खासकर राजस्थान जैसे सूखे इलाकों में , जहाँ की ज़मीन इजराइल के  जैसी है 

#3. स्टार्ट-अप कल्चर

भारत में इन दिनों सरकार लगातार स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने की बात कर रही है. इस एक चीज़ में तो इज़रायल दुनिया का बॉस है. इज़रायल के टेक्नीशियन गूगल और सिस्को जैसी कंपनियों में नौकरियां ही नहीं करते हैं, बल्कि अपने वेंचर भी लॉन्च करते हैं. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नैसडैक (NASDAQ) पर जितनी इज़राइल की कंपनियां लिस्टेड हैं, उतनी उसके बाद के पांच देशों की मिला कर भी नहीं है 

हमें इज़रायल से दो सबक सीखने चाहिए – इज़रायल में ‘इंटेलिजेंट फेलियर’ की बात होती है. माने अगर आपसे पहलकदमी करते हुए गलती हो जाए तो आपका करियर खत्म नहीं माना जाता. तो आदमी बिना डरे रिस्क लेता है. इज़रायली लोग मल्टीटास्किंग में बड़ा विश्वास रखते हैं. एक आदमी एक ही समय में तरह-तरह की चीज़ें आज़मा कर देखता है.

#4. डायस्पोरा का इस्तेमाल

इज़रायल दुनिया भर से आकर बसे लोगों का देश है. तो दुनिया भर में उनके सगे संबंधी रहते हैं. इस एक चीज़ का  इज़रायल भरपूर फायदा उठता है  //. वहां की सरकार जहां गुंजाइश हो, इज़रायल कनेक्शन ढूंढ लेता है और उसे अच्छी तरह भुनाता है. अमरीकी इंडस्ट्री और फिल्म बिज़नेस में यहूदियों की तगड़ी पकड़ है. लाज़मी तौर पर वे इज़रायल से सहानुभूति रखते हैं. तो अमरीकी इंडस्ट्री से इज़रायल को पू
 री मदद मिलती है और हॉलिवुड के ज़रिए इज़रायल का नज़रिया दुनिया भर में गूंजता रहता है. ये ठीक वही काम है जो हम दुनिया भर में बसे भारतवंशियों के ज़रिए होते देखना चाहते हैं.


#5. डिफेंस

इज़रायल चारों तरफ से दुश्मन देशों से घिरा है. जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और मिस्र के साथ-साथ सभी अरब देश अंदर ही अंदर इज़रायल खिलाफ दुश्मनी पाले हुए  हैं. सब के सब मिल कर इज़रायल पर हमले करते रहे हैं. इनके अलावा गाज़ा और वेस्ट बैंक से हमास और फतेह के उग्रवादी भी इज़रायल के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. बावजूद इसके इज़रायल आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से काफी सुरक्षित है. छोटी मोटी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन 
 लंबे समय से कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है .

भारत इस मामले में इज़रायल से दो सबक सीख सकता है. पहला इज़रायल की तरह इंटेलिजेंस इकट्ठा करना और उस पर समय रहते अमल करना. दूसरा अपने पास मौजूद तकनीक का भरपूर इस्तेमाल. इज़रायल के आयरन डोम के चलते उसे होने वाला नुकसान हमेशा कम से कम रहता है. आयरन डोम एक मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी है.


6. सोशल सिक्योरिटी और हेल्थ

इज़रायल की सरकार अपने नागरिकों का बड़ा ध्यान रखती है. यहां का सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में एक शख्स की पढ़ाई से लेकर उन्हें काम देकर सेटल करने तक का ध्यान रखा जाता है. कोई बीमार पड़े तो दुनिया का बेहतरीन हेल्थ केयर सिस्टम तुरंत हरकत में आ जाता है. यहां की एम्बुलेंस सर्विस ‘द रेड स्टार ऑफ डेविड’ आम इज़रायलियों के साथ-साथ उन सीरियन और अरब लड़ाकों में भी उतनी ही प्रसिद्ध है जो इज़रायल पर हमला 
 करने आते हैं और फौज की कार्रवाई में घायल हो जाते हैं. भारत के सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम को अभी बहुत आगे जाना है और इस क्षेत्र में हम इजराइल से बहोत कुछ सीखते है .

शनिवार, 15 जुलाई 2017

मोदी और ट्रम्प की जुगलबंदी क़े मायने


मोदी और ट्रम्प की  जुगलबंदी  क़े मायने
समय के साथ भारत और अमेरिका के रिस्तो में जो धुंद,खटास थी मिटती जा रही है देख कर तो ऐसा ही लगता है ,दोनों देशो के रिस्तो में नई गर्माहट देखने को मिल रही है .कल तक जो देश भारत को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था आज बराबरी का दर्जा देने को तैयार है .इसकी वजह है भारत का दक्षिण एशिया में बढ़ता प्रभाव ,अफगानिस्तान ,बांग्लादेश,श्रीलंका ,भूटान और मम्यार जैसे देशो से भारत ने ना सिर्फ सम्बन्धो में प्रगाढ़ता दिखाई है बल्कि सक्रिय भूमिका भी निभा रहा है .ये बात अमरीका को भली भाती पता है यदि चीन के बढ़ते कदम को रोकना है,आतंकवाद से लड़ना है , तो भारत को साथ ले कर चलना पढ़ेगा, एक प्रमुख बजह ये भी है अफगानिस्तान में अमेरिका की नाकामयाबी जो अमेरिका के लिए दुखती रग की तरह है ,२६/११ के बाद अमेरिका को लस्कर-ऐ-तोइबा ,तालिबान,हक्कानी नेटवर्क ,जैसे आतंकी संगठन के खिलाफ जंग में माकूल सफलता न मिलपाना ,इन आतंकी संगठनों का प्रभाव काम होने की वजाये दिन बा दिन बढ़ता ही जाना . इराक और सीरिया जैसे देशो को तो प्रत्यक्ष और आप्रत्यक्ष तौर पर isis जैसे आतंकी संगठन ने आपने कब्जे में ले लिया है .रूसी और अमेरिकी सैनिक मैदान में है आतंक की जाड़े उखाड़ने के लिए भारी मात्रा में गोला और बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है. दोनों ही मुल्क दुनिया में बादशाहत कायम करना चाहते है .इस होड़ में कौन आगे जायेगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इन सब के बाबजूद अमरीका ने लस्कर -रे -तोइबा संगठन का प्रमुख आतंकी ओसामा बिन लादेन को मरने में सफल रहा लेकिन आतंकवादी संगठन की जड़े अभी भी फल- फूल रही है .अमेरिकी सेना का संघर्ष अभी भी अफगानिस्तान , सीरिया और इराक में जारी है .तब से लेकर आज तक हजारो अमरीकी सैनिक मरे गए,भारी आर्थिक छति भी हुई ,ये ऑपरेशन बराक ओबामा की सबसे बढ़ी नकामबी की रूप में सामने आई .इसकी झलक हॉलीवुड की हालिया प्रदर्शित फिल्म वार मशीन में भी देखने को मिलती है .
इस फिल्म में बताया गया है की अफगानिस्तान को ले कर ओबामा की कोई ठोस रड़नीती नहीं थी ,वहा की हालात को सुधरे बगैर सैनिको की कमी करना ,जरुरी सुभिदाये मुहैय्य न करवा पाना ,ओबामा को एक फेकू और भासड बाज बतायाजना जो सिर्फ बड़ी -बड़ी बाते करते है कुल मिलकर फिल्म का उद्देश्य ओबामा की छवि को धूमिल करना ,डेमोक्रेटिक पार्टी की हार प्रमुख वजह में से एक है .अमेरिका में लोगो का ट्रम्प के समर्थन की एक बजह ये भी है ,ट्रम्प की मुस्लिम बिरोधी छवि ,दुनिया में बढ़ते isis का प्रभाव ,इस्लामिक कट्टरता की प्रति सख्त रवईया ये बाते ट्रम्प की राष्ट्रपति बनाने की बाद साफ देखि जा सकती है ,ट्रम्प बराक ओबामा की नाकामयाबी के अपनी ताकत बनाना चाहते है ,ओबामा से भी बड़ा लीडर खुद के साबित करना चाहते है .ट्रम्प खुद एक बिज़नेस मैन है और भारत को एक बहुत बड़े बाजार के तौर पर देख रहे,एशिया में यदि अपने पैर जमाना है ये सब  
बिना भारत को  साथ लिए ये संभव नहीं.भारत के अफगानिस्तान के साथ हर तरह क़े आर्थिक और सामरिक ताल्लुकात बहुत अच्छे है,भारत अफगानिस्तान के आर्थिक प्रगति के किये हर संभव मदत कर रहा है ,ये बात अमेरिका की अफगानिस्तान निति के लिए फायदे मंद साबित हो सकती है  .अफगानिस्तान  से आतंकवाद की जड़ उखाड़ना है ,अफगानीयो का दिल जितना है तो भारत के साथ ही बढ़ाना होगा ,भारत को भी पता है उसका भी हित इसी में निहित है,भारत के लिए भी पाकिस्तानी आतंकवादी और चीन का बढ़ता प्रभाव प्रमुख समस्या है , मोदी और ट्रम्प की अमरीका में हुई मुलाकात इसी भावि रड़नीति की ओर इशारा करती है . 
                                                                             धर्मेंद्र मिश्रा

खाद्य पदार्थ में मिलावट और कालाबाजारी


                                      


                                                खाने के साथ कही हम धीमा जहर तो नहीं ले रहे ?
प्राचीन काल से ही भारतीय भोजन में मसालो का प्रचलन रहा है ,जो न सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट  बनाते है अपितु स्वस्थवर्धक भी होते है ,लेकिन मिलावट की वजह से यही मसाले धीमा जहर बन जाते है जो की  विभिन्न प्रकार की बिमारिओ का कारण होती है .आज खुले और बंद हर तरह के मसाले बाजार में उपलब्ध है जो मिलावट से भरपूर है .इसका कारण सरकार की उदासीनता ,सरकारी अधिकारियो  की घूसखोरी ,पैसो के लिए लोगो के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है .बाजार में उपलब्ध आज  हर चीज मिलावटी है ,आप किसी भी चीज को पूरी तरह प्योर,सुद्ध नहीं कह सकते .

हालत ये है की आप नमक को छोड़  बाजार में उपलब्ध किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवक्ता पर यकीन नहीं कर सकते .तेल से लेकर मसालो तक व्यपारी बिना रोक टोक धड़ल्ले  से मिलावट और कलाबाजारी का खेल खेल रहे है . .
आप  रिफाइंड आयल को ही ले लीजिये जिसमे  ३० फिदी से लेकर ७० फीसदी तक पोम आयल मिलाया जाता है .और ये पोम आयल(pom oil) महुए के रस ,धान  की भूसी ,अरंडी के तेल और चकौड़े के तेल से मिला कर बनाया जाता है .एक बहुत ही खास बात जो आप को जननी चाहिए - पोम आयल ,अर्थिटिस,घुटे के दर्द के सम्बंधित जितनी भी तरह की बीमारी होती है,उसकी  एक प्रमुख बजह है.
व्यपारी गर्मियों के मौसम में रिफाइंड  आयल में  पोम आयल की मात्रा  ७० फीसदी तक मिलते है  और जैसे -जैसे ढंड का मौसम अाता  है ये मात्रा ३० फीसदी तक कर दी जाती है ,क्योंकी पोम आयल ढंड के मौसम में जमने लगता है.

अब  हम बात करते है हल्दी की यह भी एक प्रमुख  मसाला है जो खाने में जरूर ही इस्तेमाल की जाती है,और इसमें भी मिलावट की जाती है जैसे चावल की टुकड़ी को पीसकर ,येलो powdwer मिला कर सस्ते दाम की हल्दी तैयार कर मार्केट में बेंच दी जाती है .
और इसी प्रकार धनिया में भी धनिये की डंठल को पीसकर हरे पाउडर  के साथ मिला कर तैयार किया जाता है .लिस्ट बड़ी लम्बी है ,हर चीज मिलावटी है किस चीज पे क्या मिलाया जाता है ये जानना जरुरी नहीं बल्कि ये सवाल लोगो  के जेहन में होना चाहिए की  सरकार मिलावट और कालाबाज़ारी या कहे ब्लैक मार्केट  को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है ?
तो दोस्तों अब जानते है हमारी सरकार इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयाश कर रही है -सरकार ने मिलावट और कालाबाजारी को रोकने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग का गठन किया है .
 कंपनी माल तैयार करती है और उसके अनुमोदन के लिए विभाग के पास सैंपल टेस्ट करवाना  पड़ता है .अगर कोई माल,खाद्यपदार्थ  उस टेस्ट में पास नहीं होता तो कंपनी द्वारा निर्मित पुरे स्टॉक को रिजेक्ट कर दिया जाता है .लेकिन  खाद्य विभाग के अधिकारी उस टेस्ट को पैसे लेकर उचित मानक को पूरा किये बगैर कंपनी के माल को क्लीन चिट दे देते है  .

छोटे और खुदरा व्यापरी भी अपना माल इसी तरीके से बड़ी आसानी से  लोकल मार्किट में रिटेलर और खाद्य विभाग  के अधिकारिओ के साथ साठ -गाठ  कर अपने  माल को बाजार में बेंच देते है .
छोटे व्यपारी ज्यादातर खुला  मसाला या कहे unpacked स्पाइस को मार्केट में बेंचते है .

खुले और पैकेट बंद मसालों में फर्क बस इतना है ,खुले मसालो  में मिलावट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे खुदरा व्यापारियों की लगत मूल्य कम आती है और रिटेलर को भी सस्ते दामों में उपलब्ध हो जाती है ,जिनसे हम (अल्टीमेट) माल खरीदते है .

लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश है खास कर europin कंट्री में  खाद्य और सुरक्षा  के मानक बहुत सख्त है ,उनकी सरकारे  अपने लोगे के स्वाथ्य के प्रति बेहद संवेदनशील है .तय मानक से नीचे काम करने वाले व्यपारियो  पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही भी की जाती है . लेकिन हमारे देश में सरकार के लिए जनता सिर्फ वोट है ,वायदे तो  बहौत करती है लेकिन मिलावट और काला बाजारी  को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती,सरकारी नियम कानून तो  सिर्फ कागजो पर ही चलते है .यदा -कदा ही ढोस कर्यवाही किसी -किसी पर की जाती है जब की जरूत तो सभी पर लगाम कसने की है .


brazil sex culture

ब्राज़ील दक्षिण अमेरिका का सब  से बड़ा तथा दुनिया का ५ व बड़ा देश है ,ब्राज़ील का नाम आते ही लोगो दिल में वहाँ पर पानी  से भरे घने जगल ,फैले सुमद्री बीच ,ऊँचे -ऊँचे माउंटेन ,दीपो के समूह ,कुल मिला कर विभिन्न -विभिन्न प्रकार की विभिदातायो  से भरा देश है .लेकिन ब्राज़ील की सब से खास बात  ज्यादा तर टूरिस्ट  दिमाग में सेक्स का ख्याल लेकर आते है,ब्राज़ील में बेस्यावृति क़ानूनी तौर पर मान्य है   औरत और मर्द वयस्क होने पर खुले तौर पर इस पेसे को अपना सकते है ,लेकिन वेश्याल का सचालन सेक्स वर्कर के माध्यम से करना  क़ानूनी  तौर पर इलीगल है ,आप को ये जा कर हैरानी  होगी  ब्राज़ील गोवेर्मेंट के तरफ से पेशेवर सेक्स वर्कर को प्रमोट और जागरूक website के माध्यम से करता है  ,की किस तरह से बाहरी टूरिस्ट को अपनी   तरफ अट्रैक्ट करे जैसे -लोगो को आपने नृत्य के माध्यम से ,उनकी प्रसंसा  कर ,टूरिस्ट को स्पर्श कर ,उनके   अहकार  को जीते ,ये सब चीजे  उनको बताई जाती है वेबसाइट के माध्यम से ,ज्यादातर ये सेक्स वर्कर  नाईट क्लब ,होटल ,बीच ,बार और highwey जैसे प्लेस पर काम करते है .
बहार से जब टूरिस्ट आते है तो इन  बेश्यायो  को किराये पर लेते है और यहाँ पर डायरेक्ट पेमेंट के साथ -साथ ,उनके साथ घूमना फिरना  ,डिनर डेट पर ले जाना ,गिफ्ट देने की  भी परंपरा है, कुलमिला कर कह सकते है गर्लफ्रंड  जैसा ट्रीट करना  .
पारम्परिक ब्राज़ील कल्चर है की पुरुष के कई महिला साझेदार  होने चाहिए और वहाँ की औरतो से भी यही अपेछित है की कई पुरुसो के साथ सम्बद्ध रख सकती है और इसकी चर्चा अपने परिवार और और पति से भी कर सकती है की उसके सम्बद्ध किसके साथ और किते लोगो के साथ है .एडल्ट युथ जिकी ुमार १८-२४ साल उनपर एक सर्वे किया गया जिससे कई बात सामने आई जो चौकाने वाले है .आइए  जानते है वो सच्ची है क्या
ऐसी महिला जिनका सम्बन्ध केवल एक पुरुष के साथ सम्बन्ध रखती है २३.१ % है तथा  पुरुष जिनका सम्बद्ध १ महिला के साथ है  महज  ३.२% फीसदी  है .
और ऐसे महिला जिनका जिनका सम्बन्ध २ या ३ पुरुस्को के साथ है उनका ४१.६% है तथा पुरुष जो २ या ३ महिला के साथ सम्बद्ध  रख ते है उनकी सख्या ११.५% है.
४ या ५ पुरुषो  के साथ सम्बद्ध रखने वाली महिलायो  की संख्या १७.५% है ,तथा पुरुष की सख्या १६.५% है.
६ या उससे अधिक पुरुषो के साथ सम्बद्ध रकने वाली महिलाओं की सख्या १७.८% है और सबसे हैरान करने वाला अकड़ा है पुरुष जिनका सम्बन्ध ६ या अधिक  महिलायो  के साथ है उनकी संख्या ६८.८% है .
ये सर्वे ब्राज़ील के कई प्रांतो  में किया गया जैसे पोर्ट अलगेरे ,रिओ दे गेनेरिओ और सैल्वडॉर .
barzil  में इसतरह के सेक्स कल्चर की जो प्रमुख वजह है , वहाँ की सामाजिक इस्थिति ,गरीबी , और शिक्षा का आभाव .

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

article over pm modi and trump meet

                                                         मोदी और ट्रम्प की जुगलबदी क़े मायने
समय के साथ भारत और अमेरिका के रिस्तो में जो धुंद,खटास थी मिटती जा रही है देख कर तो ऐसा ही लगता है ,दोनों देशो के रिस्तो में नई गर्माहट देखने को मिल रही है .कल तक जो देश भारत को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था आज बराबरी का दर्जा देने को तैयार है .इसकी वजह है भारत का दक्षिण एशिया में बढ़ता प्रभाव ,अफगानिस्तान ,बांग्लादेश,श्रीलंका ,भूटान और मम्यार जैसे देशो से भारत ने ना सिर्फ सम्बन्धो में प्रगाढ़ता दिखाई है बल्कि सक्रिय भूमिका भी निभा रहा है .ये बात अमरीका को भली भाती पता है यदि चीन के बढ़ते कदम को रोकना है आतंकवाद से लड़ना है , तो भारत को साथ ले कर चलना पढ़ेगा, एक प्रमुख बजह ये भी है अफगानिस्तान में अमेरिका की नाकामयाबी जो अमेरिका के लिए दुखती रग की तरह है ,२६/११ के बाद अमेरिका को लस्कर-ऐ-तोइबा ,तालिबान,हक्कानी नेटवर्क ,जैसे आतंकी संगठन के खिलाफ जंग में माकूल सफलता न मिलपाना ,इन आतंकी संगठनों का प्रभाव काम होने की वजाये दिन बा दिन बढ़ता ही जाना . इराक और सीरिया जैसे देशो को तो प्रत्यक्ष और आप्रत्यक्ष तौर पर isis जैसे आतंकी संगठन ने आपने कब्जे में ले लिया है .रूसी और अमेरिकी सैनिक मैदान में है आतंक की जाड़े उखाड़ने के लिए भारी मात्रा में गोला और बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है. दोनों ही मुल्क दुनिया में बादशाहत कायम करना चाहते है .इस होड़ में कौन आगे जायेगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इन सब के बाबजूद अमरीका ने लस्कर -रे -तोइबा संगठन का प्रमुख आतंकी ओसामा बिन लादेन को मरने में सफल रहा लेकिन आतंकवादी संगठन की जड़े अभी भी फल- फूल रही है .अमेरिकी सेना का संघर्ष अभी भी अफगानिस्तान , सीरिया और इराक में जारी है .तब से लेकर आज तक हजारो अमरीकी सैनिक मरे गए,भारी आर्थिक छति भी हुई ,ये ऑपरेशन बराक ओबामा की सबसे बढ़ी नकामबी की रूप में सामने आई .इसकी झलक हॉलीवुड की हालिया प्रदर्शित फिल्म वार मशीन में भी देखने को मिलती है .
इस फिल्म में बताया गया है की अफगानिस्तान को ले कर ओबामा की कोई ठोस रड़नीती नहीं थी ,वहा की हालात को सुधरे बगैर सैनिको की कमी करना ,जरुरी सुभिदाये मुहैय्य न करवा पाना ,ओबामा को एक फेकू और भासड बाज बतायाजना जो सिर्फ बड़ी -बड़ी बाते करते है कुल मिलकर फिल्म का उद्देश्य ओबामा की छवि को धूमिल करना ,डेमोक्रेटिक पार्टी की हार प्रमुख वजह में से एक है .अमेरिका में लोगो का ट्रम्प के समर्थन की एक बजह ये भी है ,ट्रम्प की मुस्लिम बिरोधी छवि ,दुनिया में बढ़ते isis का प्रभाव ,इस्लामिक कट्टरता की प्रति सख्त रवईया ये बाते ट्रम्प की राष्ट्रपति बनाने की बाद साफ देखि जा सकती है ,ट्रम्प बराक ओबामा की नाकामयाबी के अपनी ताकत बनाना चाहते है ,ओबामा से भी बड़ा लीडर खुद के साबित करना चाहते है .
बिना भारत के साथ लिए ये संभव नहीं.भारत के अफगानिस्तान के साथ हर तरह क़े आर्थिक और सामरिक ताल्लुकात बहुत अच्छे है,भारत अफगानिस्तान के आर्थिक प्रगति के किये हर संभव मदत कर रहा है ,ये बात ट्रम्प को भली भाती पता है .अफगानिस्तान से यदि आतंकवाद की जड़ उखाड़ना है ,अफगानीयो का दिल जितना है तो भारत के साथ ही बढ़ाना होगा ,भारत को भी पता है उसका भी हित इसी में निहित है,भारत के लिए भी पाकिस्तानी आतंकवादी और चीन का बढ़ता प्रभाव प्रमुख समस्या है ,हाली हे में मोदी और ट्रम्प की अमरीका में हुई मुलाकात इसी भावि रड़नीति की ओर इशारा करती है .
                                                                                                                        धर्मेंद्र मिश्रा