मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023

mp election 2023

 

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में इस बार लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं ,भाजपा बनाम जनता की होती दिख रही है ;

rajendra sharma,congress,bjp


मध्य प्रदेश में   2019 में जनता द्वारा चुनी गई प्रदेश में कॉंग्रेस सरकार को केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने अपने सेट एजेंडा के तहत जनतंत्र की मर्यादा को भंग कर धन बल के प्रयोग से जिस प्रकार भाजपा की सरकार बनाई इससे देश और प्रदेश की जनता बहुत आहत और दुखी है .

लोकतंत्र जनतंत्र का प्राण है , जनता अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है ,भाजपा की लूट और भ्रष्टाचार की सरकार में जहाँ जन तो हैं लेकिन जन की कोई सुनवाई नहीं है .

जनता केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार से तंग आ चुकी है .

जिस जनत्रंता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्योछाबर कर दिया ,आज सुरते हाल ये है कि जनता लोकतंत्र के इस लूटते हुए काफिले को मूक दर्शक कि भांति देखने को मजबूर है .

लोकतंत्र में वोट जनता कि सबसे बड़ी ताकत होती है वो अपने एक वोट से सरकार बदल सकते हैं ,अपने और अपने आने वाली पीढ़ी के कल को बदल सकते हैं .

 अगर परिवर्तन नहीं होगा तो भ्रष्ट तानासाही देश को अराजकता के दलदल में धकेल देगी .

समय है परिवर्तन का और परिवर्तन कि इस कड़ी में मध्य प्रदेश विधान सभा सीट जो भाजपा का गढ़ मानी जाती है जहाँ  भाजपा से राजेंद्र शुक्ल चार बार विधायक चुनकर आए, राज्य  में मंत्री भी रहे लेकिन रीवा में कोई उल्लेखनीय विकास  का काम नहीं किया .उन्होंने सिर्फ वही काम किया जिसमें उनका व्यक्तिगत हित सध सके .

रोड से लेकर हाईवे ,पूल से लेकर ब्रिज ,हॉस्पिटल से लेकर स्कूल ऐसा कोई सरकारी काम नहीं है जहाँ उनका कमीशन सेट न हो . उनपर हमेशा से ये आरोप लगते रहे है कि जो भी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट हैं सिर्फ अपने आदमियों को ही देते हैं .रीवा को पूरी तरह से कंगाल कर दिया .

रोजगार का कहीं नामोनिशान नहीं युवा नौकरी के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं .

नशा खोरी इतनी बढ़ गई है कि आए दिन हमें आपराधिक वारदात कि ख़बरें सुनाई पड़ती हैं .

किसानों कि समस्या अलग ही है ,किसान खेती नहीं करना चाहते ,खाद बीज से लेकर बेंची कि समस्या .

जिस काम से वो अपना और अपने परिवार का पेट न पाल सके ऐसा काम कोई क्यों करना चाहेगा .

व्यापारी gst की मार तो पहले से ही झेल रहें थे ऊपर से बढ़ती डीजल ,पैट्रोल और गैस की कीमत ने कचूमर निकाल दिया .

दूर -दूर से देखने पर भी जनता को भाजपा की सरकार और नेताओं से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है .

शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार की भरमार है ,कहाँ से सुरु करेंगे ,कहाँ ख़तम करेंगे; पोषण आहार  घोटाले से लेकर बिजली घोटाला ,खनन घोटाले से लेकर शराब घोटाला ,वृछारोपण घोटाला ,बीज प्रमाणीकरण घोटाला ,ऐसे बहुत से घोटाले हैं जो चंद कुछ करोड़ों के नहीं हजारों लाखों करोड़ों में हैं .

ऐसे  में भाजपा से परेशान और तंग आ चुकी जनता के पास सिर्फ कांग्रेस ही एक विकल्प बचता है .

अब हालत पहले जैसे नहीं हैं ; रीवा कि जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है ,राजेंद्र शुक्ल की राह इस बार हमवार नजर नहीं आ रही है .

इस बार उनके टक्कर में कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र शर्मा हैं जो ईमानदार और जनलोकप्रिय छवि के नेता हैं ,अमीर से लेकर गरीब ,व्यापारी से लेकर युवा और किसान हर वर्ग का समर्थन उन्हें मिलता दिख रहा है .

जनता उम्मीद लगाए बैठी है ,इस बार राजेंद्र शर्मा जीत कर आएं और रीवा को भ्रष्टाचार ,माफिया तंत्र से मुक्ति दिलाएं जहाँ विकास हो सुशासन और स्वराज हो ,जन सुनवाई हो ,उनके हित में फैसले लिए जाएँ .

                                                                                                   -धर्मेंद्र मिश्रा

   


मंगलवार, 17 अक्टूबर 2023

how Bollywood shaping Indian society

 इस आर्टिकल के माध्यम से बॉलीवुड का देश और भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने का प्रयाश है :

dark secret ,Bollywood


इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता ;समाज की दिशा और दशा बदलने में बालीवूड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है , चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक  .वांछनीय है अच्छाई जहाँ होगी ,बुराई अपने पैर पसारेगी .

एक तरह जहाँ नायक और खलनायक की अवधारणा से रचित  अश्लीलता ,मार काट ,हिंसा को बढ़ावा देने वाली फ़िल्में बनती हैं ,वहीँ सामाजिक सरोकार पूर्ण फिल्मों का भी निर्माण होता .

 आदर्श चरित्र निभाने वाला नायक ,नायिका आवश्यक नहीं वास्तविकता में भी उन आदर्शों के मानक पर खरे उतरें ,उनके लिए तो व्यापर हैं ,वो पहले अपना हित देखेंगे उन्हें पैसे कहाँ से आ रहे हैं .

यदि उनके हित में दर्शक का हित शामिल है यह संयोग है ,बहुत से ऐसे आदर्श चरित्र के कलाकार हुए और हैं जिन्होंने देश के सामने रियल और रील दोनों के बीच बा खूबी सामंजस्य बैठाया .

यह व्यक्ति की पसंद और नापसंद पर निर्भर करता है वह सिनेमा को किस रूप में लेता है .


आज से 20-30 साल पहले या उससे और पहले जैसी फ़िल्में दिखाई  जाती थी , अब वैसी फ़िल्में दर्शक देखना पसंद नहीं करते ,बड़े कैनवास पे तकनीकी रूप से उन्नत ,फिल्मांकन देखना पसंद करते हैं, अश्लीलता पे अब उतना हो हल्ला नहीं होता दर्शक सहज भाव से स्वीकार करने लगे हैं .

बाजार का नियम डिमांड और सप्लाई पर निर्भर हैं ,जब जैसी मांग होगी  वैसी ही आपूर्ति की जाएगी . 

गाड़ी कभी एक पहिये पे नहीं चलती ,सामाजिक सरोकार की जिम्मेदारी एक तरफ़ा नहीं हो सकती ,दर्शक जो देखना चाहेंगे ,समाज की जब जैसी छवि होगी, वही दिखाया जायेगा .

दूसरी तरफ सितारों से भरी दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखती है अंदर से उतनी होती नहीं ,सितारों की ये जो चमक है जनता की गाढ़ी कमाई  है ,आप ने जो नाम सोहरत हासिल की है जनता की बदौलत है .यदि लोग आप को देखना सुनना पसंद करते हैं तो इतनी नैतिकता उन पर भी बनती है , मनोरंजन के साथ एक आदर्श पूर्ण समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाएं