Book Review

इस भाग में किताब और उससे सम्बंधित विषय वस्तु के बारे में जानकारी साझा की जाएगी.
In this section, information about the book and its related subject matter will be shared...


Latest Hindi Novel Muhana

                    जीवन आपके लिए  है या आपके माध्यम से कोई अंत-हींन खेल ?

मनुष्य कल्पना  Imagination पहले  करता है  जो  ज्ञान  के  रूप  में  मन  मस्तिष्क  में  संरक्षित store रहता  है  ,समय  के  साथ   प्रयोग  द्वारा  सिद्ध  होने  पर  विज्ञानं  science होजाता है ,या  यूँ  कहे   विज्ञानं ज्ञान  का  प्रायोगिक  रूपांतरण Experimental transformation  है  लेकिन  मानव  मस्तिष्क  ज्ञान  और  विज्ञानं  का  अनुभव   एक  तरह  से  गतिशीलता  Kinetic Motion के  माध्यम  से करता है या कहे समय के साथ जो की मानव मस्तिष्क का बोध है जोकि  दुनिया  में उपलब्ध हर जीव के लिए अलग- अलग होता है जिसका सीधा प्रभाव उनके जीवन संरचना, आयु पे पड़ता  है 


किन्तु जीवन का अस्तित्व  existence आज भी एक अबूझ पहेली है ,मनुष्य स्वयं को स्वयं द्वारा ही प्रमाणित  करता रहा ,ये ऐसा ही है जैसे मनुष्य द्वारा बनाये मशीनी  उपकरण Mechanical Instrument  अपनी संरचना और कार्य पद्धति के आधार पर जीवन का अनुभव करे 


ये उपन्यास  Novel ऐसे ही विषय पर आधारित है , जहाँ पात्र    गतिशीलता  Kinetic  और  स्थिरता  Static  का  अनुभव  एक  साथ  करते है ;


जीवन  परिकल्पना  Hypothesis  है या  वास्तविक्त  Real  है  ,अगर  है  तो  पहले  परिकल्पना  ने  वास्तविकता  को  जन्म  दिया  या  वास्तविकता  ने  परिकल्पना  को ? कल्पना  और  वास्तविक  दुनिया  में  कोई  अंतर  मालूम  नहीं पड़ता  


 जीवन  के  अस्तित्व  को  जानने की जद्दोजहद में  जीवन  से  उठने  वाले  हर  सवाल  उसे बेईमानी से  लगते  है ,जैसे खाली  मन  का  चढ़ाव  और  उतार  ,सागर  में   ,उठती- गिरती  लहरे  ,एक  छोर  से  देखने  पर  आती  हुई  प्रतीत  होती  है  ,दूसरे  छोर  से  देखने  पर  जाती  हुई  प्रतीत  होती  है ,भौतिक सीमा  Physical Boundaries में बधे होने के कारण  व्यक्ति एक साथ दोनों  छोर  का  दृष्टा अवलोकन  नहीं कर करसकता 


  जीवित व्यक्ति  मृत्यु के बाद के सत्य को प्रमाणित  नहीं कर सकता ,मृत व्यक्ति जीवन को प्रमाणित  नहीं कर सकता ,  इसके लिए उस व्यक्ति का दोनों सिरे पर एक ही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है।


चलते  है  एक  ऐसे  ही  समय के जाल  में उलझी रहस्य ,रोमांच  और विज्ञानं  के अद्धभुत प्रयोग  से  भरे  सफर  में  जहाँ  काल्पनिक  और  वास्तविक  दुनिया  के   मुहाने पर  जिंदगी  और  मौत  एक  साथ  रूबरू  है 


उपन्यास ऑनलाइनE-books और PaperBack माध्यम से उपलब्ध है ... पुस्तकें लिंक और जानकारी यहां से भी प्राप्त की जा सकती हैं या आप सीधे Amazon Prime ... फ्लिप कार्ट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्राप्त कर सकते है। "

  Click Download


                                                                हिंदी अनुवाद

प्रकाशित उपन्यास दायरा से संछिप्त अंश…

पीछे बालकनी से कोमल मधुर आवाज  आई "हाउ डेयर यू टू प्लक द फ्लावर,  व्हाट आर यू डूइंग हियर , हु  द हेल आर यू ?

इंग्लिश में एक साथ कई सवाल बुलेट की तरह दागने लगी ,आरिफ़ को कुछ समझ नहीं आया

आरिफ़ - इधर-उधर देखते हुए "कोयल ने कूक लगाई .... कहां से आयी " बालकनी की तरफ नजर गई, रूपा को देखते ही आंखे ठहर जाती है।  छरहरे बदन की एक खूबसूरत कमसिन हसीना , अंग्रेजी में कहें तो शायद जीरो साइज़  इसी को कहते हैं, शरीर का एक भी अंग ना कम ना ज्यादा सब कुछ नपा -तुला जालीदार टॉप, कमर से चिपका टाइट जीन्स, जो छिपा  कम दिखा  ज्यादा रहा था। आरिफ  को कुछ समझ आया हो तो जबाब दे , बस उसकी तरफ घूरे जा रहा था ।

मन ही मन मुस्कुराते हुए ये लड़किया भी न हैंडसम लड़का देखा नहीं  i love you  बोलने ...जमाना एडवांस है।

रूपा- "he mr  !!! इशारा करते हुए। "

आरिफ -" मोहतरमा आपकी अंग्रेजी तो समझ ना आई, हां इतना जरूर पता है फ्लावर  मतलब फूल होता है ,ब्यूटीफुल फूल  ।"

रूपा- यू डोन्ट हैव एनी मैनेर्स ?

अरिफ- "मैडम लगता है आपसे हिंदी नहीं  आती मुझे अंग्रेजी तो बिलकुल भी  नहीं आती।"

रूपा,झल्लाते हुए - "तुम हो कौन हो? यहां पर क्या कर रहे हो वो भी बिना पूंछे ऐसे कैसे? "

इतने में रमेश आ जाता है ,चेहरे पे बनावटी गुस्से के भाव से  "मैंने बोला था न ?

आरिफ ,रूपा की नजर से नजर मिलाते हुए- अच्छा  हुआ, तू आ गया ,अब तू ही जबाब  दे ?ये मोहतरमा क्या बोल रही है "

रमेश जैसे ही पलट कर देखता है , उसका भी दिमाग  चकरा जाता है ।

रूपा रमेश का ध्यान तोडते हुए "अब तुम कौन हो ? "

रमेश- "अब तक तो रमेश था "

 रमेश- कुछ जरूरी काम है, इनसे अगर कोई गलती हुई हो तो माफी चाहंगा।"

आरिफ - तू माफ़ी क्यों मागेगा ,गलती मेरी मै ही माफ़ी मागूंगा ...जी आप मुझे जो सजा देना चाहे दे ...उफ़ तक न  करूूँगा, इस फूल के बदले चाहे जान लेले मेरी ?

रूपा ,आंखे तरेरते "mr हिंदी में ,यहाँ से दफा होजाओ ?

माली की तरफ इसारा करते हुए "बाहर करो इन्हे खड़े खड़े तमाशा देख रहे हो ।"

आरिफ -ये तो आप मुल्जिम को बिना  सजा दिए ही  छोड़ रही है, मुझे सजा दीजिये ?"

रमेश, ग्लानि बोध से - सॉरी फार दैट...हम खुद ही चले जायेंगे। "

आरिफ - "अंग्रेजी बोलने से कोई होसियार  नहीं बन जाता... चल भाई ...ये लो मैडम अपना फूल ,जहाँ  देखो फूल ही फूल। "

रमेश आरिफ  का मुंह बंद कराते हुए " बस इसके आगे कुछ कहने की जरूरत नहीं ।"

 

 

 English Translation 

A brief excerpt from the published novel  Dayra…

A soft sweet voice came from the balcony behind "How Dare You to Pluck the Flower, What Are You Doing Here, Who the Hell Are You?"

In English, Arif was not able to understand anything as many questions started being fired like bullets.

Arif - While looking around, "The cuckoo spit .... Where did it come from", looked at the balcony, eyes turned on seeing Rupa. Hasina, a beautiful kamasin of slim body, probably says zero size in English, not a single part of the body is more or less everything. . If Arif has understood anything, then reply, just staring at him.

Even  smiling mind, neither did see the handsome boy, I love you speaking ... The era is advanced.

Rupa- "he mr !!! pointing."

Arif - " i did not understand you, yes, definitely know that flower means fool in hind, beautiful flower."

Rupa - You Don't Have Any Managers?

Arif- "Madam, you do not know Hindi, I do not know English at all."

Rupa, fretting - "Who are you? What are you doing here like that?"

Ramesh comes in hurry, on the face of artificial anger, "I told you, didn't I?"

Arif, looking at Rupa's eyes- Well done, you have come, now you answer her ...What is this beauty saying?"

As soon as Ramesh turns around, his mind also gets chuckled.

"Who are you now?" Broke Rupa Ramesh's attention.

Ramesh- "Till now Ramesh was"

 Ramesh - There is some important work, I will apologize if I have made any mistake.

Arif - Why will you apologize, I will apologize for my mistake ... Yes, whatever punishment you want to give me ... I will not do it even if I want to know about this flower instead of me?

Rupa, Shouting with gazing eyes "mr in Hindi, get out of here?

"Look out the spectacle standing outside, doing this" towards the gardener.

Arif - you are leaving the culprits without any punishment, punish me? "

Ramesh, with guilty feeling - Sorry for that… we will go ourselves. "

Arif - "Speaking English does not make you a wise ... Come on brother ... take it, throing flower at her "madam, your flower, where you see flowers."

"No need to say anything just next to it", silencing Ramesh Arif.


 Story" Aabru"


इतने में रानी को बगल में पड़ा  ईंट का एक टुकड़ा  दिखा, बड़ी कोशिस के बाद हाँथ किसी कदर उस टुकड़े तक पहुँच गया।  रानी ने उस ईंट के टुकड़े को  सुपरवाइजर  के सर पे देमारा । सुपरवाइजर दर्द से कराहते हुए अपना सर पकड़ कर बैठ गया। इस सीना -झपटी में रानी के कपडे तो  पूरी तरह से फट चुके थे फिर भी  जो कपडे बचे थे उन  चीथड़ों को समेटते हुए वहाँ से भागी। विनाश काले विपरीत बुद्धि निचे की तरफ भागने की बजाय   उस बहुमंजिला इमारत में   ऊपर की तरफ भागने लगी उधर सुपरवाइजर  दर्द से कराहते हुए जैसे ही होश आया  इधर उधर देखने लगता है। रानी को वहां न पाकर इमारत  की  सीढ़ियों से इधर -उधर देखने लगा। इतने में ऊपर की सीढ़ियों से एक पत्थर का टुकड़ा गिरा सुपरवाइजर समझ गया सीकर जाल में फस चूका  है।



                                           ~ धर्मेंद्र  मिश्रा~




 

0 Comment to "Book Review"

एक टिप्पणी भेजें

Useful, valuable comments are welcome!!!