मंगलवार, 8 जून 2021

नेता जी न 3 में न 13 में'

 

Short Hindi Story...

                            ' नेता जी न 3 में न 13 में'


दामोदर दास जी दिल्ली  के एक बड़े ही प्रसिद्ध व्यवसायी ,कुसल राजनीतिज्ञ थे।लोग प्यार से उन्हें नेता जी कहते  दौलत सोहरत की कोई कमी न थी ,दर्जनों नौकर चाकर ,गाड़ी बग्ला ... स्वभाव से भी बड़े ही रंगीन मिज़ाजी इंसान थे , उनकी बस यही एक कमजोरी कहे या शगल था।



 सारा धन ,अय्यासी ,औरतो के पीछे लुटा देते। सुन्दर लड़की देखी नहीं की मोम की तरह पिघल जाते । 

पार्टिया करते ,सभा -समरोह करते , पार्टी के प्रचार -प्रसार में  नाचने -गाने वालो को बुलाते ,कुलमिलाकर खूब मज़े लेते। 




एक बार किसी ऐसे ही समारोह के दौरान ,उनकी नज़र सपना नाम की एक हूर की बाला ,नर्तकी पर पड़ी ,वह अपने नाम की तरह ही वह स्वप्न सुंदरी थी। जिसकी भी नज़र एक बार पड़ जाये ,हटाए नहीं हटती ,दिल समझाए नहीं समझता। 

सपना उस समारोह की खास आकसर्ण  की केंद्र थी ,सभी गिद्ध के सामान  उसके इर्द -गिर्द मडराने  लगे। 




नेता जी अपने कुछ खास मित्र मंडली के साथ वार्ता -लाप में व्यस्त थे। अचानक से सपना वहाँ पहुँच गई। मधुर कोयल सी कूकती हुई "एक्सक्यूज़ मी ?"

 नेता जी जैसे ही पीछे पलटे ,उनकी आंखे चौधिया गई ,मुँह से कुछ बोल न आया ,बस दिल जोर -जोर से धड़के   जा रहा था।  चेतना में वापिस आते हुए " अहा ! काश  ये समां यही ठहर जाये ? "




सपना चपलता से अपनी कनखियाँ उमड़ते हुए " भला ऐसा क्यों ?

नेता जी बड़ी ही चतुराई से मुस्कुराते हुए " साम तो साम ही थी मगर पहले कभी योँ रंगीन न थी। "

सपना जोर जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी " नेता जी बाते बनाना कोई आपसे सीखे। "

नेता जी नहले पे दहला मरते हुए " हमने कब मन किया ,बस आप हमें सेवा का अवसर दे ...हम आप को भी बना देंगे?"

सपना इतने सारे लोगो को अपने आस पास जमा देख झेप सी गई ,वहाँ से जाना ही उचित समझा। 





सपना वहाँ से चली  तो गई किन्तु उसकी सुंदरता नेता जी के दिल में घर कर गई ,सोते -जागते उठते बैठते  उसके ही ख्यालो में खोये रहते। 

सपना से मिलने के तरह -तरह के बहाने ढूढ़ते ,सपना भी उनके पैसो की ताकत के आगे झुक गई ,धीरे -धीरे प्रेम प्रसंग बढ़ने लगा ,पैसा पानी की तरह बहने लगा ,नेता जी महगे से महगा उपहार जब भी मिलते देते।



 

सपना ने नेता  जी को पूरी तरह से अपने प्रेम -पाँस में जकड लिया था ,सपना के लिए अब वो एटीएम मशीन की तरह थे। 

सपना का जन्म दिन निकट था , नेता जी को सरप्राइज देने की सोची ,सोचा देखूं इन्हे मेरा जन्म दिन याद रहता है की नहीं पूर्ववर्त कोई सुचना नहीं दी।  



नेता जी भी मझे हुए खिलाडी थे ,उन्होंने भी सपना को सरप्राइज देने केलिए ख़ास तैयारी कर रखी थी ,जन्म दिन के दिन सुबह ही सुबह अपने खास सहायक को एक महगी सी गाड़ी खरीद कर गिफ्ट देने  भेज दिया। 




सहायक सपना के घर पहुँच कर डोर बेल बजता है । सपना पूरी तरह सी नींद सी जगी भी नहीं थी ,ऊंघते हुए दरवाजा खोलती है " जी कहिये ?"

सहायक " मैडम ,सर ने आपके लिए ये कार भेजी है। "




सपना  ,खुशी सी उछलते हुए "  वाओ ! फिर अचानक से झेपते हुए ,दबे स्वर में "सर मीन्स ?'

सहायक " वही जिनसे आप सर्वाधिक प्रेम करती है। "

सपना ने 3 नाम गिना दिए,ये ,वो ,फलाना ,सहायक न में सर हिलाते हुए। 




सपना की भी मति मारी गई ,उसका ध्यान उस महगी गाड़ी की तरफ था ,किसी कदर उसके हाँथ लग जाये ।  आनन फानन में जल्दी -जल्दी 13 नाम गिना दिए। 

सहायक ,दामोदर दास जी का नमक खाया था ,उसे कुछ ठीक नहीं लगा ,सो उसने बिना कुछ बोले ,गाड़ी लेकर घर आगया। 



नेता जी को गाड़ी की चाभी पकड़ाते हुए " सर आप न 3 में है न 13 में है।



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Story by Dharmendra Mishra


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