कविता
(Poetry Ref.Word- तफ्तीश- खोज,पड़ताल . ताल्लुक-ए-खातिर-सम्बन्ध रखना ,आक़िबत- परिणाम ,अंत . जर्ब- घाव ,चोट .ऑग-राग- एक तरह का लेप जो चेहरे को सुन्दर बनता है .
तकसी-मलिन ,उदासी,विषाद . निगार- छवि ,परछाई . अरशी- आइना . खलिश-कमी ,मन में विरक्त भाव आना .
जिल्लत-अपमान ,तिरस्कार . इल्लत- आदत ,अभ्यस्त होना किसी चीज के लिए .
मंतजिर-इंतजार ,प्रतिक्छा,wait .जार-जार-विलाप करना ,फूट -फूट कर रोना ,अत्यधिक दुःख की अवस्था)
जिंदगी की तफ्तीश,कविता
जिंदगी भर जिंदगी की तफ्तीश करता रहा ,
जिंदगी मेरी थी मगर कोई और जीता रहा ,
खुद को खुद से ही दूर रख कर ,
सफर जिंदगी का करता रहा ,
ताल्लुक-ए-खातिर ज़माने से थी ,
मगर खुद से ही अनजान बना रहा ,
ख्वाइशे जिंदगी की कभी पूरी हुई नहीं ,
आधी-अधूरी जिंदगी के साथ ही जीता रहा,
कौन जाने ये जिंदगी कहाँ ठहर जाएगी ,
आक़िबत से बेखबर जिंदगी जीता रहा ,
अपनी खलिश का जाहिरा न किया कभी ,
जिल्लत को इल्लत समझ कर जीता रहा ,
ज़माने से जर्ब को सीने में छुपके,
ऑग-राग ऊपरी दिखावा करता रहा ,
जिंदगी एक खिलौना थी,
इस हकीकत से ताउम्र बेखबर रहा .
तकसी भरी निगार जिंदगी की,
अपनी ही आँखों में पर्दा रहा ...
खुद को खुद से ही तारूफ करा दूँ,
कभी मौका ही न मिला ,
अपने लिए नहीं अपनों के लिए ,
ताउम्र जिंदगी जीता रहा ,
फुर्सत में हूँ,बैठा हूँ अकेले,
आज कोई साथ नहीं,
दो घडी मेरे पास बैठ जाये,
किसी को इतनी भी फुर्सत नहीं ,
बूढ़ा हूँ ,खाली हाँथ हूँ,
थोड़ा चिड़चिड़ा भी होगया हूँ ,
क्या करू उम्र ही कुछ ऐसी है ,
कुछ याद रहता नहीं ,
किसी काम का जो नहीं ,
किसे कहु अपना अपने,
भी अब अपने रहे नहीं ,
जार-जार है ये दिल किसी,
से अब कुछ कहता नहीं ,
मंतजिर है तो बस मौत का
जिंदगी की ख्वाइश अब रही नहीं ...

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