रविवार, 20 मार्च 2022

इन्साफ का किरदार कौन अदा करेगा,क्या कश्मीरी पंडितो को उनका हक़ मिलेगा ?

                          

                           'The Kashmir Files'

या कश्मीर फाइल ,फाइल में ही सरकार दर सरकार सरकती रहेगी। हाल फिल हाल ये मुद्दा फिर से गर्मजोशी पर है ,भाजपा कह रही है ,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है...देखना है जोर कितना विपछी दल में है।

                                                                               

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 इसका  कारण  "कश्मीर फाइल" नाम की एक फिल्म रिलीज़ हुई है ,जिसके जरिये राष्ट्र वाद की लहर की सुनामी चल पड़ी है।  बीजेपी के प्रधान मंत्री से लेकर  मंत्री MP ,MLA कार्यकर्ता सब प्रचार प्रसार करते दिख रहे है ,बीजेपी शासित सभी राज्ज्यों ने इस फिल्म को टैक्स फ्री भी कर दिया है। 

फिल्म राष्ट्रवाद के पंख सहारे ,दिन दूनी रात चौगुनी कमाई कर रही है। फिल्म के निर्माता निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री को लोग बहुत बड़े राष्ट्रवादी के तौर पर देख रहे  है। सिनेमा के दृस्टि कोण से भी लोगो का कहना है फिल्म अच्छी बनी है। 

Film के प्रति लोगो का रुझान और प्रतिक्रिया सकारात्मक है , कश्मीर जैसे एक संवेदन शील मुद्दे पर भावनात्मक जुड़ाव भी है। जिसका फायदा बॉक्स ऑफिस के टिकट विंडो में भी  है ,महज कुछ ही दिनों में 200 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर ली,ऐसा मिडिया वालो का कहना है ।

 हो सकता है आने वाले वक़्त में ऐसे ही और भी फिल्मे इस ढर्रे पे बने ,राष्ट्रवाद एक तरह से हिट मशीन है ,फिल्मे थोड़ा बहुत भी ठीक ठीक हो तो चल जाती है। अपनी माँ और मातृभूमि के प्रति हर व्यक्ति का किसी न किसी रूप में लगाव होता ही है। 

यह प्रकृति जन्य व्यवहारिक परिवर्तन है ,जो चीज अनुभव में होती है ,स्वाभाव की अनुकूलता भी उसी अनुरूप होती है। 

मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री माननीय श्री शिवराज मामा,कही  सरकारी फिल्म की स्क्रीनिंग रखे रहे होंगे , जब वे थिएटर से बाहर आये तब पत्रकारों ने उनसे  Film से सम्बंधित सवाल पूंछे ,मामा जी बड़े ही भावुक हुऐ ,जैसा की अक्सर वे होजाते है ,आंसू तो उनकी आँखों में धरे ही रहते है ,बस मौका मिलना चाहिए।

 Real Life और Reel Life दोनों को समानंतर रूप से समझे तो ,अनुपम  खेर से किसी भी मायने में अभिनय में कमतर नहीं है। उसी बात पे आपको हंसा सकते है ,उसी बात पे रुला भी सकते है। 

उनका अंदाज ए बयां और नेताओ से हटके किरदार के बहुआयामी रंग, बहुरुपिया नहीं कहेंगे। 

Film देख कर जैसे ही बाहर आये ,अपनी पल्टन में घुसने लगे। पत्रकार ने सवाल दागा "फिल्म कैसी लगी ?

मामा ,पहले से ही डिफेनसीव् मोड़ में अपने किरदार में  कुछ सेकंड की ख़ामोशी तोड़ते हुऐ ग़मगीन भाव से ,फिल्म का कोई सा डायलॉग याद आगया "सच जब एक कदम चलता है ,झूठ पूरी दुनिया के एक चक्कर लगा लेता है। फिल्म और फिल्म के निर्देश की तारीफ में कसीदे पढ़े । विधवा -भौजाई कांग्रेस को जम के कोशा । 

जो भी है यह अपने अपने दृश्टिकोण पर निर्भर करता है ,चीजों को  कैसे लेता है। जहाँ एक तरफ कुछ लोगो का मानना है यह Film राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने वाली है। वही विपछ का कहना है ये मोदी सरकार का चुनावी स्टंट है ,भ्रामक प्रचार प्रसार कर लोगो को गुमराह करती है । 

विवेक रंजन अग्निहोत्री पर भी ,विपछ  आरोप लगाता रहा है की वे मोदी सरकार के अजेंडे केलिए काम करते है। कुछ साल पहले दुनिया के जाने माने चित्रकार M. F.हुसैन ने हिन्दू देवी देवताओ की आपत्तिजनक तस्वीर बनाई जिसका विरोध सभी जन ,मन ,धर्म के लोगो ने किया ,ऐसा होना लाजिम था।

 वही विवेक रंजन अग्निहोत्री, M. F. हुसैन के पछ से थे। खैर ये विस्तृत चर्चा का अलग ही विषय है। 

 उनका व्यक्तिगत अधिकार है ,कोई भी हो किसी भी पछ से हो हम सब को एक दूसरे की निजता का सम्मान करना चाहिए। 

जहाँ तक रही बात  धर्म की ,यह उस धर्म को मानने वाले जन जन पर निर्भर करता है , उसकी छवि कैसी होगी।विषय पर आते है ,

कश्मीरी पंडित 

सरकार Government आती रही जाती रही 30 सालो तक कुछ न हुआ ,जो हुआ वह तुस्टीकरण के नाम पर खाना पूर्ति। राजनैतिक महकमे में ये तुष्टिकरण शब्द बहुधा सुनने को मिलता है।

 जहाँ एक पछ ,दूसरे पछ को बेहूदा कहता है ,एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते है ,फला पार्टी ,दल अपनी दाल गलाने केलिए किसी खास मुद्दे के आधार पर किसी ,जाती ,वर्ग ,समुदाय या धर्म के साथ पछपात पूर्ण रवैया अपनाती है। 

 राष्ट्रवाद Patriotism को लेकर अपनी अपनी परिभाषाये है। वर्तमान केंद्र की महिमामंडन  सरकार को ही लेले 8 साल होगये ,लेकिन लाखो  विस्थापित कश्मीरी पंडितो के हित में कोई ठोस पहल या  विस्थापितों के पनर्वास केलिए  राजनैतिक संकल्प नहीं दिखा ,सिर्फ उनके चुनावी वादे और प्रपत्र में ही है। 

कटघरे में देश की भोथरी मिडिया भी रही है ;जिन्हे आज के वर्तमान दौर में गोदी मिडिया के नाम से भी जाना जाता है ,हाला की नाम कई है लेकिन ख़म खा किसी का जिक्र करना वाजिब नहीं है।  लेकिन मेरी एक पसंदीदा Godi Media पत्रकार है ;"अंजना ॐ कश्यप" जिनकी जुबान कैंची की तरह चलती है लेकिन वो कैंची सिर्फ विपछ पर ही चलती है। मोदी सरकार  पर कोई आरोप आये तो ये विपछ का आरोप होता है।

 महिमामंडन  सरकार को सॉफ्ट कार्नर में रख कर विपछ पर हमला वर हो जाती है। क्या ऐसे पत्रकारों का  राष्ट्रीय चरित्र  है  ? या जहाँ  मिले माल मलाई वही जाना है ? मतलब से मतलब की छट पड़ेकी हर हर गंगे ?

खैर ये मेरा सवाल नहीं जनता के मन की जिज्ञासा है। जो भी हो  इन्हे जनता से क्या लेना देना ,हम इनसे कोई उम्मीद भी नहीं करते, ये सरकारी अजेंडे पे अपना प्रपोगेंडा सेट करते रहे। 


  जहाँ तक रही बात  राष्ट्रवाद की  स्पष्ट मानना है ;

"जो सम्पूर्णता के भाव से देश हित में हो वही राष्ट्रवाद है। "



लोकतंत्र में राष्ट्र किसी दल हेतु नहीं है यदि सभी राष्ट्रवाद को अपने हित और पछ से सोचेंगे तो आपसी टकराव ,मतभेद होना स्वाभाविक है। जिसका खामियाजा राष्ट्र को ही भुगतना पड़ता है। 


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