परिचय
“धर्मेंद्र मिश्रा मूलतः मध्य प्रदेश रीवा जिले से सम्बन्ध रखते है, प्रारम्भिक शिक्षा रीवा से प्राप्त करने बाद ,उच्च स्तरीय तथा तकनीकि शिक्षा बिजनेस से मास्टर डिग्री ,देवी अहिल्या विश्विद्यालय इंदौर मध्य प्रदेश से प्राप्त की। कई वर्षो तक राज्य तथा राज्य के बाहर व्यवसायिक संस्थानों में नौकरी की साथ ही विज्ञापन तथा साहित्य लेखन छेत्र से जुड़े रहे।
लेखन, पठन- पाठन जीवन के शुरुआती चरण से ही रूचि होने के कारण ज्ञान को और ज्यादा विस्तृत ,गहन और गूढ़ ढंग से समझने की चेष्टा स्वरुप कई किताबो का लेखन किया जो "राजमंगल प्रकाशन" द्वारा प्रकाशित है। मुहाना उपन्यास फैंटेसी रहस्य ,रोमांच पर आधारित है ,दायरा उपन्यास सामाजिक राजनीतिक सडयंत्र ,प्यार , सामाजिक बंधनो पर आधारित मर्डर मिस्ट्री है ।
,कहानी ,ड्रामा ,हास्य ,व्यंग
पर आधारित है।
"आलेख संग्रह" ऐतिहासिक ,विज्ञान पर
आधारित आलेखों का संग्रह है। "मेरी
सूछ्म अनुभूति "लेखक
के व्यक्तिगत अनुभव
पर आधारित ,कहानी
,कविता , मुक्तक संकलन
है।
हिंदी साहित्य लेखन के सम्बन्ध में लेखक का स्पष्ट रूप से मानना है ,साहित्य किसी भी विधा ,भाषा , विषय पर आधारित हो
भाव तथा भाषा के तकनीकि ,व्यवहारिक पछ को केंद्र बिंदु पे रख कर ही करना चाहिए जहाँ भाव व्यावहारिक तथा भाषा तकनीकि पक्ष है जिनका आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है । मौखिक या लिखित ,सांकेतिक रूप से विचारो का आदान -प्रदान किया जाता है, यदि मौखिक की बात करे;सिनेमा चल -चित्र , संगीत आदि माध्यमों से मानव मस्तिष्क का जुड़ पाना सहल होता है।
इसका वैज्ञानिक कारण तकनीकि पछ है जिसके विस्तार में ना जाकर बस इतना समझे मानव संवेदनाये छीड़ पड़ जाती जिस समय कोई विषय वास्तु देखते सुनते है, उस विषय वास्तु की संवेदना मानव मस्तिष्क में प्रबल रूप में होती है।
वही लिखित माध्यम की बात करे: पढ़ते समय मानव संवेदनाये अपने प्रबल रूप में होती है जो भी पढ़ते है सब्दो के भाव को अपनी संवेदना से जोड़ने की चेष्टा करते है यदि वह विषय वस्तु,भाषा ,सब्द -संयोजन ,शैली आदि मनोनुकूल ना हुआ तो बोझिल अनुभव होता है। भाषा में मार्मिकता, सब्द संयोजन ,शैली ,विषय वास्तु सार्थक तथा प्रासंगिक है तो शून्य भाव में भी संवेदना का संचार कर देती है, स्वयं से बांध देती है ।
भाषा का मर्म
भी यही है
की वो भाव
प्रकट करे, भावनात्म
दृष्टि से मानव
मस्तिष्क में संवेदना
का संचार करे
,तभी कलम सार्थक
है । कलमकार
के रूप में
उपंन्यास ,कहानी , कविता ,आलेख
, विचार बोध तथा
अनन्य माध्यम से
मानव चेतना का
विस्तार, आयाम दे
पाऊँ यही प्रयास
है।
लेखक के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी तथा जुड़ने हेतु उनके सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ सकते है ।“
~ धर्मेंद्र मिश्रा~
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