शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

गरीबी से देश का बुरा हाल,BJP कह रही है चल रहा है अमृत काल


बदहाली से गुजरता देश 

एक तरफ भुँख्मरी सूचकांक में  जहाँ भारत  94 स्थान पर है वहीँ हमसे अपेक्षा कृत कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश  नेपाल 73 वे ,बांग्लादेश 85  ,पाकिस्तान 88 वे पायदान पे हैं । 




परिस्थिति कितनी भयावह है  ? देश भुँख्मरी  ,बेरोजगारी ,आर्थिक मंदी ,महगाई  से गुजर रहा है।  वैश्विक महामारी  इसका एक प्रमुख कारण तो है ही लेकिन सरकार  इससे निपटने के सार्थक उपाय करने के वजय अपने फिक्स राजनैतिक अजेंडे पर ही  चल रही है .


 धर्म - राजनीति  की सांठगांठ ऐतिहासिक परिदृश्य की कालिमा वर्तमान में पोतना ,चुनावी मुद्दों के जिन्न खोद कर बाहर निकालना, मोह भंग जनता पर एक तरह से निस्तेजाक औषधि  का प्रयोग  है। लेकिन सवाल यथावत है,  इस तरह की विघटनकारी नीतियों से देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? आपके कृत्य  इर्षा द्वेष पैदा करने वाले हैं। इतिहास आप का द्वेष पूर्ण है। सुधार का विषय हो सकता है।


किन्तु  आप का लक्ष्य अपने वर्तमान को सुधारते  हुए भविष्य की ओर लेजाना जो वैश्विक मानक पर विकशित  देशो  से प्रतिस्पर्धा कर सके होना चाहिए ।


 यह तभी संभव है जब आपकी कथनी और करनी में अंतर न हो। जो आपके साथ नहीं हैं  ,वे आपके विपक्षी  हो सकते है किन्तु यह सुनिश्चित करें वह देश के शत्रु न हों।


  आप जिसे अल्पसंख्यक  मानते हैं वह बहुसंख्यक आबादी के अनुपात में अल्पसंख्यक हो सकते  हैं। किन्तु वैश्विक परिदृश्य में  25 से 30 करोड़ की आबादी दुनिया के कई विकशित देशो की आबादी को मिलाकर भी ज्यादा है। देश की इतनी बड़ी जनसंख्या नकारात्मकता के संचार से  देश के विकाश में बाधक न हो ,सरकार को सुनिश्चित करना होगा ।

 सामंतवादी व्यवस्था और लोकतंत्र में फिर क्या अंतर रह जाता है। मानवीय क्रूरता की  भीषणता  यही कहती है ,वह जो कहती  है ;वही सही है ,लोग उसी का अनुसरण करे  किन्तु धर्म आपकी  निज -आस्था का प्रश्न है ,जिसका उत्तर आपको स्वयं से  प्राप्त करना चाहिए ,जरुरी नहीं आप  की जिस धर्म या व्यक्ति में आस्था है। उसी धर्म को मानने वाले  अन्य व्यक्ति के आस्था में समानता हो ,एक ही परिवार में रहते हुए अपने अन्य परिवार जन में अलग अलग व्याख्या हो सकती है। 

धार्मिक - कट्टरता का भीषण परिणाम दुनिया के समक्ष है जो हिंसा त्यागने पर विवस करती  करती है ,

अहिंसा के पथ पर चले स्पष्ट संकेत है । धर्म की सार्थकता जनसँख्या वृद्धि  से नहीं अपितु बेहतर जीवन शैली  से है। जीवन का  उद्देश्य गतिशीलता है  जो कार्य करें अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करे।  किसी के द्वारा किसी को किसी भी प्रकार की कष्ट और पीड़ा हो वह सर्वथा अनुचित है ।

 इसका कारण जीवन के आधार में स्थिरता का होना। हर व्यक्ति का देश की प्रगति में  सकारात्मक योगदान हो यह सुनिश्चित करे। 

 

आदर्श प्रकृति है जो समय और परिस्थिति के अनुसार आदर्श का चुनाव करती है ,समर्थ और सार्थकता प्रदान करती है समय के साथ उसे तिरोहित ,नवीनता और बदलाव लाती है।


आप के समक्ष सवाल आदर्श के चुनाव का नहीं  स्वयं के भीतर स्वयं को पहचानने की है, आदर्श स्वरुप प्रकृति को बाहर लाने की है ,यही आपके जीवन की पराकष्ठा ,आदर्श चुनौती है,जिसे सहर्ष मन से स्वीकार कर  सकारात्मक  बदलाव की ओर  बढ़ना चाहिए ।


अमेरिका 19 सदी से ही विज्ञान और तकनीकी छेत्र में दुनिया में अग्रणी रहा है,खोज और नवाचार  (Research & Development ) हर अमेरिकी के सायकी (Psychology ) का हिस्सा है। विज्ञान वो  टूल है जो जीवन को बेहतर और उन्नत बनता है ,जीवन के हर पहलु में  उसे शामिल करना , प्रयोग के प्रति सजग, सचेत रहना ,विज्ञान में छोटा सा बदलाव  व्यापक वैश्विक परिवर्तन लासकता है । विकाशवाद का अर्थ मूल्ल्यहीन जीवन नहीं होना ,अपितु जीवन को सार्थक बदलाव की ओर ले जाना होना चाहिए।


विज्ञान से भयावह परिणाम की आशंका को यदि  दरकिनार कर दे ,अतीत की कलुषता,व्याधि का उपचार होसकता है ,जो सुखद भविष्य की ओर लेजाने वाला है। यह आप पर निर्भर है ,समय की गतिशीलता में स्वयं को कैसे ढालते है।


~धर्मेंद्र मिश्रा 


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हिंदी उपन्यासकार ,कहानीकार ,दार्शनिक ,प्रकाशित पुस्तकें " धारणावाद ;अमूर्त दर्शन, मुहाना सीरीज , घोस्ट हंटर , दायरा ,कहानी की दुनिया ,सैर सपाटा ,आबरू ,लम्पट ,किड्स बूस्टर ,कलर मी, नोट बुक "इत्यादि। Online, e-book, paper back ,amazon, flip kart ,notion press. Podcast Audio Book; Shool bhadra vs Andh karni

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