रविवार, 24 अप्रैल 2022

क्या आप राष्ट्रवादी है ?

 राष्ट्रवाद vs पाखंडवाद'

 किसी को प्रमाण पत्र दिखाने की न ही किसी से लेने की अवस्य्क्ता है। ये देश आप का है। हमारा है। हर नागरिक का है। जो हक़ किसी से कोई नहीं छीन सकता। चाहे वो राष्ट्रवादी हो या राष्ट्र द्रोही। लेकिन अपनी विचारधारा और सोच के आधार पर हम सब को यह आकलन करना चाहिए और वास्तविकता में जीना चाहिए। 



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 जिस पे जो गुजरे वही जाने ,जिस पे न गुजरे वो दूर से दे ताने और मज़े ले। ऐसा ही होता है कमजोर चरित्र ,चाल चलन, आचरण वाले यही करते है। अपना लाभ तो पसु भी जानता है यदि मानव भी उतना ही जाने तो फिर कुछ भी न जाने।

ये बात बिलकुल सही है जो मुझे नापसंद है ,वो आप को पसंद हो ? जो आप को पसंद हो मुझे न पसंद हो ? 

लेकिन पसंद और नापसंद के आगे एक सामूहिक विचार धारा होती है ,जिसका नेतृत्त्व सरकार और सरकार की नुमाइंदगी करने वाले लोग करते है।


 वह एक तरह से आदर्श परिस्थिति है ,हमारा संविधान Constitution  भी कहता है।  लोकतंत्र Democracy  में सरकार की नैतिक जिम्मेदारी होती है वो समाज के हर वर्ग के विकास केलिए काम करे बिना  भेद-भाव किये। नेता लोग भले ही ऐसा न करे,न सोचे लेकिन हर कोई उनसे उम्मीद यही करता है।  

 हर व्यक्ति की अपनी विचार धारा होती है ,उस आधार पर अपनी राय बनाता है।कथन और कथानक  के आधार पर स्वयं ही मालूम चल जायेगा, देश में  अभी हाल ही में 2022  Rajjya Chunaav में  19 फरवरी को पंजाब में वोटिंग थी। 


ऐन मौके पर Voting से दो ,तीन दिन पहले वर्तमान केंद्रीय सत्ता पछ केलिए अपनी भक्ति ,उपयोगिता साबित करने केलिए कुछ शिगूफे छोड़े गए "आम आदमी पार्टी खालिस्तान समर्थित है। Kejriwal देश के दो टुकड़े करना चाहते है।

 स्वयं को स्वतंत्र पंजाब का प्रधानमंत्री बनाना चाहते है। ऐसे बहुत से आरोप लगाए, यह व्यक्तिगत राजनैतिक मसला है,बात में कितनी सच्चाई है,किसी के आरोप के आधार पर तै नहीं किया जा सकता ।खैर इन बातो को  आधार बना कर वर्तमान PM पद बैठा सक्स सभी बुराइयों की जो मूल जड़ है।


  उन् बातो को अपनी सभाओ में जिक्र कर चुनाव अपने पछ में करने की यथेष्ट चेष्टा भी की।  ठीक है यह एक तरह से चुनाव को किसी पार्टी विशेष के पछ में करने का राजनैतिक मुद्दा हो सकता है। 

हमारे बघेली में एक बहुत पुरानी कहावत है "मरत रहय खांड का ,चुरुक्कय लगय भात " खांड क्या है ? चावल पकाते है ,उससे जो पानी निकलता है ,उसे खांड कहते है ,देश में जब बहुत गरीबी थी ,घरो में जन ज्यादा होने के कारण लोग वो पानी भी पी जाते थे ,उस अवस्था में यदि चावल मिल जाये तो वह किसी छपन भोग से कम नहीं था।  


आम आदमी पार्टी (AAP) भी सिंगल ,डबल से हाफ सेंचुरी की सोच रही होगी लेकिन  पंजाब चुनाव के जब परिणाम आये सब को चौकाने वाले थे। यहाँ तक की चुनावी विश्लेषणों को धता बताते हुए ,पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को सेंचुरी के करीब 90+ पंहुचा दिया। 

चौके,छक्कों की बरसात हुई साधारण बैकग्राउंड के आम सहरी उम्मीदवारो ने भी बड़े बड़े धुरंधरों को चारो खाने चित्त कर दिया। एक मैकेनिक ने वर्तमान मुख्या मंत्री चन्नी को पछाड़ दिया। 


निःसन्देश यह आम आदमी पार्टी (AAP) केलिए ऐतिहासिक है। जब तलाक इस धारा पे आम आदमी पार्टी की रूह कायम रहेगी ,जिक्र आएगा। 

 वर्तमान जितनी भी छेत्रिय दल है उनमे से एक आम आदमी पार्टी ही ऐसी पार्टी है जो एक राज्य से  दूसरे राज्ज्य में सरकार बनाने में सछम होपाई और कई राज्ज्यों में अपनी पैठ मजबूती से बढ़ा रही है।

 प्यास जितनी अधिक ,प्रयास भी उतना ही ज्यादा और जिसकी प्यास बुझ गई वो सिर्फ जिंदगी की छांछ पीता है। "

 वे लोग जो ये कहते रहे ;जैसा चलता है वैसा ही चलने दो ,सड़ी-गली व्यवस्था में सुधार होते नहीं देखना चाहते। जिनका मूल मंत्र है 



                                                           
"देश लूटो ,देश भक्त बनो "


 वे खुद तो ऐश अय्याशी करे ,इनके बच्चे विदेश पढ़े, सर्व सुविधा संपन्न रहे ,आम जन राजनीती में घुन की तरह पिसते रहे और वे पिस्ता बादाम खाये।

 खुद को सर्वो सर्व मान बैठे वे लोग खुद से सवाल करे , क्या देश की आम जनता को अपनी मूल भूत अवस्य्क्ता ,बिजली ,पानी ,अच्छी सिछा ,रोजगार का हक़ नहीं है ?

जो देश की बात नहीं करते ,देश के मुद्दों पर बात नहीं करते ,कही सरकार नराजाज न होजाये ?आम जन से सिर्फ उनका सरोकार अपने मतलब से मतलब केलिए है,वे किस बात के देश भक्त बनते है ?

देश भक्त बनना है तो राजनीती के दलदल में सड़ने की बजाय ? उसे साफ़ करने केलिए ,हर किसी जागरूक इंसान को अपने अस्तर पर  नैतिकता के आधार पर जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य पूरा करना होगा।

 जब आप इंसान ही अच्छे न हो पाएंगे ,कितने ही बड़े होने का ढोंग करे ,इसे कुछ फर्क नहीं पड़ता ,बस चाटुकारिता और चाटुकार के आसरे ,लाभ के वास्ते जिंदगी खपाना ही होगा, जीवन के असली सुख और लाभ से वंचित होना होगा।  

                                                                                                                                   ~धर्मेंद्र मिश्रा  


   

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