सियासी कलह से बंटता हुआ देश -
अपने ही देश को अब अपना कहने पर आप को सौ बार सोचना होगा किसे खुश करना है और किसे नाखुश ।
यही सियासत है,कल को ये आप को मुर्दा घोषित कर देंगे और उसके फायदे भी बताएँगे और आप उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे क्योकिं आप के अंदर अँध भक्ति का जहर घोल दिया गया है ।
आप को क्या सोचना है,क्या नहीं सोचना है सरकार निर्धारित करेगी ।
प्रचार प्रसार के माध्यम से भाड़े पर लिए गए सरकारी करिन्दे चारो तरफ से सूचना कि ऐसी बॉम्ब बार्डीग करेंगे कि आप कि सोचने,समझने कि क्षमता क्षीण पड़ जाएगी ।
किसी पक्ष में जाने से पहले निरपेक्ष रुप से आप सोचिए;
क्या अब एक ही देश के अंदर दो देश होंगे?
जो भाजपा गठबंधन को वोट करते हैं अब वो भारतीय नहीं कहलायेंगे ?
जो कांग्रेस गठबंधन दलों को वोट करते हैं अब वो इंडियन कहलायेंगे ?
तो फिर जो किसी को वोट नहीं करते अब वो क्या कहलायेंगे ?
दोनों ही पक्ष के लोग एक दूसरे को ऐसे देखेंगे जैसे भारत सर्वनाम इंडिया vs पकिस्तान ।
देश कि हर उपलब्धी पर प्रपोगेड़ा करने वाली मोदी सरकर वैचारिक रुप से देश के बंटवारे का श्रेय भी लेगी ?
निषकर्ष:
किसी पार्टी का पक्षकार होने से पहले ध्यान रखें;
"भारतीयता अलाप में नहीं ,क्रिया कलाप में होनी चाहिए ।"

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