इस आर्टिकल के माध्यम से बॉलीवुड का देश और भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने का प्रयाश है :
इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता ;समाज की दिशा और दशा बदलने में बालीवूड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है , चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक .वांछनीय है अच्छाई जहाँ होगी ,बुराई अपने पैर पसारेगी .
एक तरह जहाँ नायक और खलनायक की अवधारणा से रचित अश्लीलता ,मार काट ,हिंसा को बढ़ावा देने वाली फ़िल्में बनती हैं ,वहीँ सामाजिक सरोकार पूर्ण फिल्मों का भी निर्माण होता .
आदर्श चरित्र निभाने वाला नायक ,नायिका आवश्यक नहीं वास्तविकता में भी उन आदर्शों के मानक पर खरे उतरें ,उनके लिए तो व्यापर हैं ,वो पहले अपना हित देखेंगे उन्हें पैसे कहाँ से आ रहे हैं .
यदि उनके हित में दर्शक का हित शामिल है यह संयोग है ,बहुत से ऐसे आदर्श चरित्र के कलाकार हुए और हैं जिन्होंने देश के सामने रियल और रील दोनों के बीच बा खूबी सामंजस्य बैठाया .
यह व्यक्ति की पसंद और नापसंद पर निर्भर करता है वह सिनेमा को किस रूप में लेता है .
आज से 20-30 साल पहले या उससे और पहले जैसी फ़िल्में दिखाई जाती थी , अब वैसी फ़िल्में दर्शक देखना पसंद नहीं करते ,बड़े कैनवास पे तकनीकी रूप से उन्नत ,फिल्मांकन देखना पसंद करते हैं, अश्लीलता पे अब उतना हो हल्ला नहीं होता दर्शक सहज भाव से स्वीकार करने लगे हैं .
बाजार का नियम डिमांड और सप्लाई पर निर्भर हैं ,जब जैसी मांग होगी वैसी ही आपूर्ति की जाएगी .
गाड़ी कभी एक पहिये पे नहीं चलती ,सामाजिक सरोकार की जिम्मेदारी एक तरफ़ा नहीं हो सकती ,दर्शक जो देखना चाहेंगे ,समाज की जब जैसी छवि होगी, वही दिखाया जायेगा .
दूसरी तरफ सितारों से भरी दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखती है अंदर से उतनी होती नहीं ,सितारों की ये जो चमक है जनता की गाढ़ी कमाई है ,आप ने जो नाम सोहरत हासिल की है जनता की बदौलत है .यदि लोग आप को देखना सुनना पसंद करते हैं तो इतनी नैतिकता उन पर भी बनती है , मनोरंजन के साथ एक आदर्श पूर्ण समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाएं

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