क्या मान सिंह और मृगनैनी की प्रेम कहनी पर आधारित है बाहुबली -२ की कहानी ?
बाहुबली -२ मूवी कहानी की सच्चाई जो सायद इस मूवी के राइटर के आलावा किसी को भी ना पता हो .
इस लेख के माध्यम से सिलसिलेवार दोनों कहानियो का तुलनात्मक ढंग से बताने की कोसिस है की कैसे मaन सिंह और ममृगनैनी की प्रेम कहनी को तोड़- मरोड़ कर बाहुबली -२ की कहनी को लिखा गया है .
इतिहास के पन्नो में कई प्रेम कहानिया दर्ज है जैसे हीर-राँझा से लेकर लैला-मजनू,साहजंहा-मुमताज ,से लेकर जोधा -अकबर तक लेकिन आपने सायद ही ग्वालियर के राजा मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी सुनी होगी जो उतनी ही दिलचस्प और रोमांचक है.ग्वालियर वैसे तो अपने ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है जिसे "किलो के रत्न "की संज्ञा दी जाती है .
लेकिन हम यंहा पर ऐतिहासिक तथ्यों पर बात नहीं करेंगे अपितु मानसिंह -मृगनयनी की प्रेम कहानी के साथ -साथ बाहुबली-२ मूवी की कहानी कैसे इनकी प्रेम कहानी से प्रेरित है या कहे बाहुबली -२ कहानी मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहनी पर आधारित है दोनो ही कहानी को हम तुलना करते आगे बढ़ते है:
मानसिंह का राज्याभिषेक १४८६ में हुआ और १५१८ तक ग्वालियर के राजा रहे उस दौरन ग्वालियर के समीपवर्ती राज्य मालवा जिसे अब इंदौर रीजन के नाम से जाना जाता है .वहाँ का शासक गयासुद्दीन खिलजी जो अल्लाउदीन खिलजी का वंसज था तब मालवा की राजधानी महेश्वर थी जिसे प्राचीन काल में महिस्मती के नाम से जाना जाता था . बाद में मालवा की रानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा 1836 में राजधानी बदल कर इंदौर कर दिया गया था.
गयासुद्दीन ने ग्वालियर पर कई बार आक्रमण किया लेकिन मान सिंह के राजा रहते कभी सफल न हो सका .
मान सिंह और मृगनयनी के विवाह से पूर्व मान सिंह की 8 रनिया थी .फिर ऐसा क्या हुआ की मान सिंह का दिल मृगनयनी पर आगया और जिंदगी भर उसी के हो कर रह गए .
मृगनयनी ग्वालियर के राइ नमक गॉव में एक साधारण गुजर जाती में जन्मी जिसके बचपन का नाम निन्नी था .
निन्नी गॉव में न सिर्फ अनुपम सौंदर्य और खूबसूरती की मिसाल थी अपितु तलवार,भला और तीर चलने में भी निपुण एक अनाथ लड़की थी .उसके माता पिता बचपन में ही गयासुद्दीन खिलजी के आक्रमण में मरे गए थे.परिवार के नाते अब सिर्फ एक बड़ा भाई बचा था और दोनों ही युद्ध कला में माहिर थे .
पुरे छेत्र में निन्नी के बहदुरी के सामने कोई न टिक पता जब भी गॉव में कोई बाहरी आक्रमण होता उसकी सुरक्षा की जिम्मेदाई निन्नी और उसके भाई पर रहती जिसका निर्वहन ये दोनों बखूबी करते इस कारण पुरे छेत्र में दोनों को काफी मान -सम्मान और प्रतिस्ठा मिलती .
इस तरह निन्नी के खूबसूरती और बहादुरी के चर्चे गयासुद्दीन के कानो तक पहुँची और उसकी सबसे बड़ी कमजोरी औरत और सराब थी.उसने निन्नी को अपनी रानी बनाने का फैसला किया और अपने सैनिको को निन्नी को लाने का हुक्म दिया.
अब बहुबली -२ मूवी में चलते है-इस मूवी में भी देवसेना के भाई को एक छोटे से राज्य का राजा बताया गया है और इनके राज्य में बाहरी आक्रमण होते रहते है . देवसेना को अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ उनका मुकाबल करते हुए दिखया गया है .
बाहुबली-2 में भी भल्लादेव का करैक्टर भी इसी से प्रेरित है .भल्ला देव को देवसेना की खूबसूरती के चर्चे उसके गुप्तचरों द्वारा मिलती है .भल्लादेव उसकी तस्वीर को देख कर मोहित हो जाता है और देवसेना को लाने का प्रयाश बाहुबली के माध्यम से करता है क्योंकी यंहा पर भल्ला देव और बाहुबली दोनों भाई है वंहा पर मानसिंह और गयासुद्दीन दो दुसमन राज्य के राजा थे इसलिए कहनी में ट्विस्ट होना लाजमी है .मूवी में बाहुबली और देवसेना का मिलान फिल्म को मनोरंजक बनाने के लिए एक युद्ध के द्वौरान दिखाया गया है जो फिल्म का पहला vfx technique द्वारा फिल्माया गया एक खूबसूरत दृश्य है जिसका विसुअल इफ़ेक्ट बहुत ही अच्छा है सायद पूरी फिल्म का ही सबसे बेहतर सीन है क्योकि बाद के जो vfx द्वारा फिल्माए दृश्य है वो किसी कार्टून मूवी की तरह एनिमेटेड विसुअल इफेक्ट्स लगते है.
अब मान सिंह - मृगनयनी की कहानी में आगे बढ़ते है .मृगनयनी आखेट करने जाती है और उसकी मुठभेड़ गयासुद्दीन के सैनिको से होती है .
मृगनयनी अकेले ही अपने तीर और भाले से उन सैनिको को ढेर कर देती .
इस तरह मृगनयनी के बहादुरी के चर्चे पुरे राज्य में फ़ैल जाते है और ये बात मान सिंह के कानो तक भी पहुँच गई .मानसिंह मृगनयनी से मिलने के लिए बड़े लालायित हुए .
अगले ही दिन राज्य भ्रमण के बहाने राइ गॉव जा पहुंचे ,जंहा पर औरते और मर्द अपने राजा का स्वागत फूल और मालो से किया और उस क़तर में सब से पहले स्वागत मृगनयनी द्वारा किया गया. मृगनयनी ने राजा के माथे में कुमकुम और हल्दी से तिलक किया ,पुष्प पगड़ी की तरफ फेका उन्ही पुष्पों में से एक पुष्प राजा ने जमीन से उठा कर अपनी पगड़ी में लगा लिया . इस तरह से मान सिंह अपना दिल मृगनयनी को दे बैठे और ये उनकी तरफ से मौन सुकृति थी .इस दृश्य को देखकर गॉव के लोग मुस्कुराने लगे उनको भी समझ में आगया की उनकी निन्नी जल्द ही अब ग्वालियर की महरानी बनने वाली है .
मान सिंह ने रात का पड़ाव राई गॉव में ही डाला पूरी रात संगीत का कार्यक्रम चलता रहा .अगली सुबह मान सिंह ने मृगनयनी की वीरता देखने के लिए आखेट की योजना बनायीं .मान सिंह मचान पे बैठ कर आखेट के लिए निकले उनके साथ मृगनयनी भी अपनी तलवार और तीर कमान के साथ चली उनके पीछे राजा की सेना ढोल नागडा बजाते हुए साथ चल रही थी जिससे खेत में जो भी जंगली सूअर और भैंसे छुपे थे बहार निकल आएं और उनका सिकार आसानी से किया जा सके उधर मृगनयनी भी तैयार थी अपने तीर कमान के साथ .ढोल -नगाड़े की आवाज से जैसे ही जंगली सूअर इधर -उधर भागने लगे ,मृगनयनी बिना देर किये एक -एक कर सभी जंगली सूअर को ढेर करती जा रही थी मगर एक विशाल सरीर वाला जगली भैंसा मृगनयनी के तीर से घायल होकर ,जोर -जोर से चिंघाड़ते हुए मृगनयनी की तरफ लपका ,ये देख मान सिंह अपनी बन्दुक से गोली चलने ही वाले थे की क्या देखते है ,मृगनयनी भैंसे की सींग मरोड़ते हुए बिजली की गति से अपना भला भैंसे के माथे पर भोप देती है और भैंसा वही पर ढेर हो जाता है .
अब बाहुबली-2 से तुलना करते है -इस फिल्म की कहानी भी कुछ इसी तरह आगे बढ़ती है देवसेना बाहुबली के साथ आखेट पर जाती है ,और खेत में कई जंगली सूअर का शिकार अपने तीर से करती है.
लेकिन फिल्म को मनोरंजक बनने के लिए देवसेना और बाहुबली का मिलान एक युद्ध के दौरान दिखाया गया है ,जंहा पर देवसेना एक साथ कई दुश्मनो को अपने तलवार से मरती है .सायद यही से वो बाहुबली और देवसेना के पहली बार मिलने का कांसेप्ट बाहुबली -२ के राइटर ने उठाया है . बाहुबली मृगनयनी की वीरता से प्रभावित हो कर देवसेना के साथ उसके राज्य में चला जाता है .यंहा पर एक गौर करने वाली बात है ,मूवी का ये दृश्य वहाँ से उठाया गया है जंहा पर मृगनयनी यासुद्दीन की सेना से मुकाबला करती है लेकिन वंहा पर मान सिंह से मुलाकात नहीं होती राइटर ने स्टोरी के पार्ट को आगे पीछे कर दिया .
फिर मूवी में आगे रात में एक गीत सोजा-सोजा नाम का बजता है , (मानसिंघ और मृगनयनी की कहानी में भी संगीत का कार्यक्रम चलता है) फिर vfx तकनीक द्वारा एक नाटकीय ढंग से युद्ध का दृश्य फिल्माया जाता है और अगली सुबह बाहुबली देवसेना को लेकर महिस्मती के लिए रवाना हो जाता है .
अब आते है मान सिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी में -आखेट के बाद मानसिंह मृगनयनी के भाई से मृगनयनी का हाँथ मांगते है और मृगनयनी के भाई ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर अपनी हैसियत के हिसाब से धूम- धाम से विवाह कर देता है उसके बाद मानसिंह मृगनयनी को लेकर ग्वालियर आजाते है ,लेकिन मृगनयनी को मान सिंह के परिवारवालो और उनकी बीबियो द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है ,जिससे आहत होकर मान सिंह ने मृगनयनी के लिए एक नए महल का निर्माण करवाते है जिसे आज गुजरी महल के नाम से जाना जाता है .
मृगनयनी सुंदरता और युद्ध कला में निपुण तो थी ही उसके साथ -साथ चित्रकला और संगीत में भी रूचि लेने लगी जो बाद में मान सिंह के लिए एक प्रेरणा का श्रोत बानी मृगनयनी हमेसा मान सिंह को प्रजा की भलाई के लिए प्रेरित किया करती थी.
एक और दिलचस्प बात प्रसिद्ध संगीतकार बैजू बाबरा ,मृगनयनी के ही संरक्षण में राग -रागनी की रचना की थी .इसी तरह कुछ साल बीतने के बाद मृगनयनी दो बेटो को जन्म देती है जिनको छत्रिया होने का दर्जा नहीं मिला और मृगनयनी को ग्वालियर से निर्वासित कर दिया जाता है .
मृगनैनी अपने दोनों बेटो को साथ लेकर जंगल में चली गई और एक नए गोत्र को अपनाया जिससे आज तोमर समुदाय के नाम से जाना जाता है.
अब आते है बाहुबली -२ की तरफ -बाहुबली और देवसेना को भी महल से उनके परिवार द्वारा निष्कासित कर दिया जाता है और वो दोनों किसी और महल में रहने लगते है.उसके बाद फिल्म पहले पार्ट के संकल्पना के आधार पर चलती है जैसे - बाहुबली को मार दिया जाता है फिर उसके बेटे की एंट्री होती है . vfx तकनिकी द्वारा फिल्माए हैवी दृश्य जिससे फिल्म को भव्य रूप देकर फिल्म का समापन कर दिया जाता है .यानि अब तीसरा पार्ट नहीं बनेगी क्युकी मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी में आगे कोई रोचकता नहीं .
बाहुबली -२ मूवी कहानी की सच्चाई जो सायद इस मूवी के राइटर के आलावा किसी को भी ना पता हो .
इस लेख के माध्यम से सिलसिलेवार दोनों कहानियो का तुलनात्मक ढंग से बताने की कोसिस है की कैसे मaन सिंह और ममृगनैनी की प्रेम कहनी को तोड़- मरोड़ कर बाहुबली -२ की कहनी को लिखा गया है .
इतिहास के पन्नो में कई प्रेम कहानिया दर्ज है जैसे हीर-राँझा से लेकर लैला-मजनू,साहजंहा-मुमताज ,से लेकर जोधा -अकबर तक लेकिन आपने सायद ही ग्वालियर के राजा मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी सुनी होगी जो उतनी ही दिलचस्प और रोमांचक है.ग्वालियर वैसे तो अपने ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है जिसे "किलो के रत्न "की संज्ञा दी जाती है .
लेकिन हम यंहा पर ऐतिहासिक तथ्यों पर बात नहीं करेंगे अपितु मानसिंह -मृगनयनी की प्रेम कहानी के साथ -साथ बाहुबली-२ मूवी की कहानी कैसे इनकी प्रेम कहानी से प्रेरित है या कहे बाहुबली -२ कहानी मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहनी पर आधारित है दोनो ही कहानी को हम तुलना करते आगे बढ़ते है:
मानसिंह का राज्याभिषेक १४८६ में हुआ और १५१८ तक ग्वालियर के राजा रहे उस दौरन ग्वालियर के समीपवर्ती राज्य मालवा जिसे अब इंदौर रीजन के नाम से जाना जाता है .वहाँ का शासक गयासुद्दीन खिलजी जो अल्लाउदीन खिलजी का वंसज था तब मालवा की राजधानी महेश्वर थी जिसे प्राचीन काल में महिस्मती के नाम से जाना जाता था . बाद में मालवा की रानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा 1836 में राजधानी बदल कर इंदौर कर दिया गया था.
गयासुद्दीन ने ग्वालियर पर कई बार आक्रमण किया लेकिन मान सिंह के राजा रहते कभी सफल न हो सका .
मान सिंह और मृगनयनी के विवाह से पूर्व मान सिंह की 8 रनिया थी .फिर ऐसा क्या हुआ की मान सिंह का दिल मृगनयनी पर आगया और जिंदगी भर उसी के हो कर रह गए .
मृगनयनी ग्वालियर के राइ नमक गॉव में एक साधारण गुजर जाती में जन्मी जिसके बचपन का नाम निन्नी था .
निन्नी गॉव में न सिर्फ अनुपम सौंदर्य और खूबसूरती की मिसाल थी अपितु तलवार,भला और तीर चलने में भी निपुण एक अनाथ लड़की थी .उसके माता पिता बचपन में ही गयासुद्दीन खिलजी के आक्रमण में मरे गए थे.परिवार के नाते अब सिर्फ एक बड़ा भाई बचा था और दोनों ही युद्ध कला में माहिर थे .
पुरे छेत्र में निन्नी के बहदुरी के सामने कोई न टिक पता जब भी गॉव में कोई बाहरी आक्रमण होता उसकी सुरक्षा की जिम्मेदाई निन्नी और उसके भाई पर रहती जिसका निर्वहन ये दोनों बखूबी करते इस कारण पुरे छेत्र में दोनों को काफी मान -सम्मान और प्रतिस्ठा मिलती .
इस तरह निन्नी के खूबसूरती और बहादुरी के चर्चे गयासुद्दीन के कानो तक पहुँची और उसकी सबसे बड़ी कमजोरी औरत और सराब थी.उसने निन्नी को अपनी रानी बनाने का फैसला किया और अपने सैनिको को निन्नी को लाने का हुक्म दिया.
अब बहुबली -२ मूवी में चलते है-इस मूवी में भी देवसेना के भाई को एक छोटे से राज्य का राजा बताया गया है और इनके राज्य में बाहरी आक्रमण होते रहते है . देवसेना को अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ उनका मुकाबल करते हुए दिखया गया है .
बाहुबली-2 में भी भल्लादेव का करैक्टर भी इसी से प्रेरित है .भल्ला देव को देवसेना की खूबसूरती के चर्चे उसके गुप्तचरों द्वारा मिलती है .भल्लादेव उसकी तस्वीर को देख कर मोहित हो जाता है और देवसेना को लाने का प्रयाश बाहुबली के माध्यम से करता है क्योंकी यंहा पर भल्ला देव और बाहुबली दोनों भाई है वंहा पर मानसिंह और गयासुद्दीन दो दुसमन राज्य के राजा थे इसलिए कहनी में ट्विस्ट होना लाजमी है .मूवी में बाहुबली और देवसेना का मिलान फिल्म को मनोरंजक बनाने के लिए एक युद्ध के द्वौरान दिखाया गया है जो फिल्म का पहला vfx technique द्वारा फिल्माया गया एक खूबसूरत दृश्य है जिसका विसुअल इफ़ेक्ट बहुत ही अच्छा है सायद पूरी फिल्म का ही सबसे बेहतर सीन है क्योकि बाद के जो vfx द्वारा फिल्माए दृश्य है वो किसी कार्टून मूवी की तरह एनिमेटेड विसुअल इफेक्ट्स लगते है.
अब मान सिंह - मृगनयनी की कहानी में आगे बढ़ते है .मृगनयनी आखेट करने जाती है और उसकी मुठभेड़ गयासुद्दीन के सैनिको से होती है .
मृगनयनी अकेले ही अपने तीर और भाले से उन सैनिको को ढेर कर देती .
इस तरह मृगनयनी के बहादुरी के चर्चे पुरे राज्य में फ़ैल जाते है और ये बात मान सिंह के कानो तक भी पहुँच गई .मानसिंह मृगनयनी से मिलने के लिए बड़े लालायित हुए .
अगले ही दिन राज्य भ्रमण के बहाने राइ गॉव जा पहुंचे ,जंहा पर औरते और मर्द अपने राजा का स्वागत फूल और मालो से किया और उस क़तर में सब से पहले स्वागत मृगनयनी द्वारा किया गया. मृगनयनी ने राजा के माथे में कुमकुम और हल्दी से तिलक किया ,पुष्प पगड़ी की तरफ फेका उन्ही पुष्पों में से एक पुष्प राजा ने जमीन से उठा कर अपनी पगड़ी में लगा लिया . इस तरह से मान सिंह अपना दिल मृगनयनी को दे बैठे और ये उनकी तरफ से मौन सुकृति थी .इस दृश्य को देखकर गॉव के लोग मुस्कुराने लगे उनको भी समझ में आगया की उनकी निन्नी जल्द ही अब ग्वालियर की महरानी बनने वाली है .
मान सिंह ने रात का पड़ाव राई गॉव में ही डाला पूरी रात संगीत का कार्यक्रम चलता रहा .अगली सुबह मान सिंह ने मृगनयनी की वीरता देखने के लिए आखेट की योजना बनायीं .मान सिंह मचान पे बैठ कर आखेट के लिए निकले उनके साथ मृगनयनी भी अपनी तलवार और तीर कमान के साथ चली उनके पीछे राजा की सेना ढोल नागडा बजाते हुए साथ चल रही थी जिससे खेत में जो भी जंगली सूअर और भैंसे छुपे थे बहार निकल आएं और उनका सिकार आसानी से किया जा सके उधर मृगनयनी भी तैयार थी अपने तीर कमान के साथ .ढोल -नगाड़े की आवाज से जैसे ही जंगली सूअर इधर -उधर भागने लगे ,मृगनयनी बिना देर किये एक -एक कर सभी जंगली सूअर को ढेर करती जा रही थी मगर एक विशाल सरीर वाला जगली भैंसा मृगनयनी के तीर से घायल होकर ,जोर -जोर से चिंघाड़ते हुए मृगनयनी की तरफ लपका ,ये देख मान सिंह अपनी बन्दुक से गोली चलने ही वाले थे की क्या देखते है ,मृगनयनी भैंसे की सींग मरोड़ते हुए बिजली की गति से अपना भला भैंसे के माथे पर भोप देती है और भैंसा वही पर ढेर हो जाता है .
अब बाहुबली-2 से तुलना करते है -इस फिल्म की कहानी भी कुछ इसी तरह आगे बढ़ती है देवसेना बाहुबली के साथ आखेट पर जाती है ,और खेत में कई जंगली सूअर का शिकार अपने तीर से करती है.
लेकिन फिल्म को मनोरंजक बनने के लिए देवसेना और बाहुबली का मिलान एक युद्ध के दौरान दिखाया गया है ,जंहा पर देवसेना एक साथ कई दुश्मनो को अपने तलवार से मरती है .सायद यही से वो बाहुबली और देवसेना के पहली बार मिलने का कांसेप्ट बाहुबली -२ के राइटर ने उठाया है . बाहुबली मृगनयनी की वीरता से प्रभावित हो कर देवसेना के साथ उसके राज्य में चला जाता है .यंहा पर एक गौर करने वाली बात है ,मूवी का ये दृश्य वहाँ से उठाया गया है जंहा पर मृगनयनी यासुद्दीन की सेना से मुकाबला करती है लेकिन वंहा पर मान सिंह से मुलाकात नहीं होती राइटर ने स्टोरी के पार्ट को आगे पीछे कर दिया .
फिर मूवी में आगे रात में एक गीत सोजा-सोजा नाम का बजता है , (मानसिंघ और मृगनयनी की कहानी में भी संगीत का कार्यक्रम चलता है) फिर vfx तकनीक द्वारा एक नाटकीय ढंग से युद्ध का दृश्य फिल्माया जाता है और अगली सुबह बाहुबली देवसेना को लेकर महिस्मती के लिए रवाना हो जाता है .
अब आते है मान सिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी में -आखेट के बाद मानसिंह मृगनयनी के भाई से मृगनयनी का हाँथ मांगते है और मृगनयनी के भाई ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर अपनी हैसियत के हिसाब से धूम- धाम से विवाह कर देता है उसके बाद मानसिंह मृगनयनी को लेकर ग्वालियर आजाते है ,लेकिन मृगनयनी को मान सिंह के परिवारवालो और उनकी बीबियो द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है ,जिससे आहत होकर मान सिंह ने मृगनयनी के लिए एक नए महल का निर्माण करवाते है जिसे आज गुजरी महल के नाम से जाना जाता है .
मृगनयनी सुंदरता और युद्ध कला में निपुण तो थी ही उसके साथ -साथ चित्रकला और संगीत में भी रूचि लेने लगी जो बाद में मान सिंह के लिए एक प्रेरणा का श्रोत बानी मृगनयनी हमेसा मान सिंह को प्रजा की भलाई के लिए प्रेरित किया करती थी.
एक और दिलचस्प बात प्रसिद्ध संगीतकार बैजू बाबरा ,मृगनयनी के ही संरक्षण में राग -रागनी की रचना की थी .इसी तरह कुछ साल बीतने के बाद मृगनयनी दो बेटो को जन्म देती है जिनको छत्रिया होने का दर्जा नहीं मिला और मृगनयनी को ग्वालियर से निर्वासित कर दिया जाता है .
मृगनैनी अपने दोनों बेटो को साथ लेकर जंगल में चली गई और एक नए गोत्र को अपनाया जिससे आज तोमर समुदाय के नाम से जाना जाता है.
अब आते है बाहुबली -२ की तरफ -बाहुबली और देवसेना को भी महल से उनके परिवार द्वारा निष्कासित कर दिया जाता है और वो दोनों किसी और महल में रहने लगते है.उसके बाद फिल्म पहले पार्ट के संकल्पना के आधार पर चलती है जैसे - बाहुबली को मार दिया जाता है फिर उसके बेटे की एंट्री होती है . vfx तकनिकी द्वारा फिल्माए हैवी दृश्य जिससे फिल्म को भव्य रूप देकर फिल्म का समापन कर दिया जाता है .यानि अब तीसरा पार्ट नहीं बनेगी क्युकी मानसिंह और मृगनयनी की प्रेम कहानी में आगे कोई रोचकता नहीं .
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