Short Hindi Story...
"बिल्ली की हज यात्रा ' कहानी '
सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली,यह खबर हज देव
को पता चली।हज देव ने दूत भेजा ।दूत ने हज देव का सन्देशा कह सुनाया " जा पहले कुछ फजल करे ?"
बिल्ली बडी चतुर,चालाक थी,दुहाई देने लगी "
बद किरदार हूँ हुजूर,खतावार ये जिस्मानी लिबास है,जिसने मुझ से ये गुनाह करवाये, रूहानी खुदा की निसबत मे ही रही ।
दूत "तेरे लिबास बहुत दागदार है ,गुनाह की गर मुआफी चाहिए ये लिबास उतार फेंक ?
बद बख्त बिल्ली बिल बिलाने लगी"नही हुजूर कोई बीच का रस्ता अख्तियार करे ?
दूत "जिस्मानी भुँख जब तक नही मिटेगी,रूह ए पाक नही होगी ।
सातिर बिल्ली समझ गई,दाल नही गलने वाली"फिर तो मरे मेरे दुसमन,मै तो चली चूहे खाने ।
खुदा के दूत पर खुदा का करम था,उसने बिल्ली पर तरस खाया, हिदायत दी " ऐ नामकूल बिल्ली,
रूह ए पाक ,वही आब ए जमजम है । खुदा की खिद्मत मे हो,फजल से कभी महरूम न होगी ।
बिल्ली "क्या मेरे गुनाह मुआफ होंगे ?
दूत " बफात का हमवार हयात है,तू ऊसकी हिफाजत कर ,जिन्दगानी का जरिया बन ,मुस्ताक ए दीद कर ।
ये कहानी किसी भी प्रकार से किसी की धार्मिक भावना को आहत करने या बढावा देने के उद्देश से नही लिखी गाई है । इस रचना का उद्देश्य नेक नियत से मनुष्यता को दर्शाती है ।
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