ऊर्जा का विशाल भंडार वो भी अंतरिछ में,
... जो बदल देगा पूरी दुनिया...
दावा नहीं ये हकीकत है ,दुनिया का भविष्य बदलने वाला है , विशाल ऊर्जा का भंडार अंतरिछ में मिला है ,कौन उस तक सबसे पहले पहुंचेगा ,किसके हाँथ लगेगी की बाजी ,कौन पलट देगा बाजी ,कौन बनेगा दुनिया का सुपर पावर ?
वो तेल का कुंआ किसका होगा ?, कौन पहुंचेगा उस तक ? पहुँच भी गाए तो कैसे लाएंगे यहाँ तक ?
वो तेल का कुंआ है कहाँ ,इन सभी सवालों के जबाब है 'हीलियम -3 '
ये हीलियम -3 क्या है जो दुनिया बदल सकता है ? दरसल ये हिलिम -3 भी युरेनियम की तरह परमाणवीय ऊर्जा पदार्थ है।
जो सूर्य की किरणों द्वारा उच्च ताप और दाब द्वारा निर्मित होता है। ये पृथ्वी पर भी बनता है लेकिन इसकी मात्रा न के बराबर है ।
इसका कारण पृथ्वी का वातावरण ,ओज़ोन परत जो सूर्य की किरणों द्वारा पूरी तरह एक्सपोज़ नहीं होपाता है। जिस कारण हिलिम ३ के निर्माण केलिए वो ताप और दाब नहीं बन पाता। वही उल्का पिंड ,धूमकेतु चंद्रमा ,मंगल जैसे और भी गृह जिनका खुद का वातावरण नहीं है ,सूर्य की तेज हवा के दबाब में प्रचुर मात्रा में हीलियम-3 का निर्माण करते है।
1972 में नशा के एक मिशन के अंतर्गत अपोलो-17 यान ने चंदमा के डार्क साइड में मिटटी की खुदाई कर कुछ सैंपल कलेक्ट किये थे उसी में हीलियम-3 की मौजूदगी का पाता चला था। संछेप में यदि इसके रासायनिक गुण धर्म की बात की जाये तो इसमें 2 प्रोटोन(Z) और 1 न्यूट्रॉन(N) होता है ,इसका Spin 1/2 ,isotope mass ,3,0160293 u
short name ( he -3) है। हिलिम ३ को यदि जमीन पर लाना समभाव हो सका तो ये ऊर्जा की हजारो हजार साल की जरुरत को पूरा कर सकता है।
इसका सबसे बड़ा लाभ क्लीन और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा इसका कारण जब ये हाइड्रोजन से फ्यूज़न कर ऊर्जा का निर्माण करता है तब इससे हानिकारक रेडिओ एक्टिव वेव नहीं निकलती जबकि वर्तमान में चलने वाले परमाणुवीय ऊर्जा संयत्रो द्वारा आस पास भारी मात्रा में हानिकारक किरणों के साथ ,परमाणुवीय कचरा निकलता है ,और ये इतना खतरनाक होता है की इससे सीधा जमीन पर या कही पानी पर भी नहीं फेंका जा सकता। इसके निस्तारीकरण केलिए इसे जमीन के अंदर गड्ढे खोद कर डाला जाता है या समंदर की तलछटी में दबाया जाता है।
वही हीलियम -3 के जो रिएक्टर लगाए जायेंगे वो हाइड्रोजन की मदत से फ्यूज़न तकनिकी पर काम करेंगे ,हलाकि ये इतना आसान नहीं है ,अभी इस तकनिकी पर काम नहीं हुआ है ,रासयनिक पदार्थ से सनी मिटटी को कई हजार सेंटीग्रेड ताप पर पिघलाकर हीलियम -3 को अलग करना फिर हाइड्रोजन के साथ रिएक्ट संलयन करवाना ये जटिल प्रोसेस है।
लेकिन उससे भी मुश्किल अंतरिछ से धरती पर हीलियम -3 लाया कैसे जाये ,माइनिंग कैसे की जाए ,माइनिंग केलिए हैवी मशीनरी पृथ्वी से बाहर अंतरिछ में कैसे पहुंचेगी ?
असंभव सा लगता है ,लेकिन असंभव भी संभव होते है ,पहले भी होते रहे ,आगे भी होते रहेंगे ,कब और कैसे होगा ये भविष्य के कोख में छिपा है। लेकिन चद्र्मा से इसे बाहर लाने में ,चीन ,अमेरिका ,रूस जैसे देश अग्रणी है वही भारत का इस्रोरो भी इस मिशन पर कई सालो से काम कर रहा है।
जो चन्द्रमा ( Moon ) के डार्क सरफेस Dark Surface पर अपने रॉबर्स को भेजने की तयारी में कई सालो से लगा है। यदि मिशन सफल रहा तो भारी मात्रा में चन्द्रमा की मिटटी की खुदाई की जाएगी , परिछण करने पर जहाँ पर भी Helium-3 की मात्रा बहुतायत में होगी ,माइंस द्वारा खुदाई कर स्पेस शटर Space Shutter के जरिये धरती पर लाया जायेगा।
अनुमानतः 1 टन से 10 साल से ज्यादा भारत की ऊर्जा जरुरत को पूरी किया जासकता है ,इससे परमाणविया ऊर्जा Atomic Energy के परम्परागत श्रोत युरेनियम Uranium , थोरियम Thorium ,प्लूटोनियम Plutonium पर से निर्भरता पूरी तरह ख़त्म होजायेगी।
क्या होगा ,कैसे होगा ,ये तो आने वाला वक़्त ही तय करेगा ,लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है और रहेगी। यही हम इंसानो की नियति है।
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