अंतरात्मा
विकाश शाम को स्कूल से आते ही
,माँ पापा अभी तक ऑफिस से लौटे नहीं उनसे कुछ जरुरी बात करनी है
.
माँ बीच में ही टोकते हुए मुझे भी बता सकता है क्या बात करनी है ,विकाश चिढ़ते हुए तुम अपना काम करो ,झाड़ू
,पोंछा ,बर्तन ,इसे ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं ये बोल कर सीधे रूम पर चला गया ,,विमला देवी कई दिनों से विकाश को बात -बात पे छिड़ने से परेसां थी आखिर बात क्या है
,कुछ पूंछो तो बताता भी तो नहीं ,ये सब बाते उनके दिमाग में चल ही रही थी की अचानक बेल की आवाज सुनाई दी विकाश दरवाजे की तरफ दौड़ा जैसे इसी के इंतजार में बैठा हो .
पीछे से विमला देवी भी रोटी बना छोड़ कर दरवाजे की तरफ बढ़ी .क्योकि
घर पर विकाश के होने और न होना बराबर है स्कूल से आते ही बस मोबाइल में ही लगा रहता है .
नारायण प्रशाद जी अंदर आते ही ,साहब जादे ने दरवाजा खोला , आज पूरब पछिम से कैसे उदय हो गया .
नारायण प्रसाद जी सोफे में धसते हुए ,विमला देवी आज बहौत थके हुए लगते हो ,नारायण प्रसाद जी दम भरते हुए ,आज अविनाश का फ़ोन आया था ,अविनाश
नारायण प्रसाद जी का बड़ा बेटा जो NIT से
Btech कर रहा है इस साल उसका लास्ट ईयर चल रहा है
.
नारायण प्रसद जी को उसपर बड़ा नाज है .बचपन से ही पढाई में बहौत होसियार था आज NIT जैसे बड़े इंस्टिट्यूट में है .और जल्द ही उनके सपने साकार होने वाले है .बेटे का लास्ट सेम चल रहा है और उसके बाद किसी बड़ी कंपनी में अच्छी सी नौकरी मिलने की उम्मीद है
.
विमला देवी जी उनकी तुन्द्रा भांग करते हुए,
हां तो उसने क्या कहा
,बस पढाई के बारे बता रहा था लास्ट सेम स्टार्ट होने वाला है कुछ महीने बाद प्लेसमेंट के लिए कंपनीया आना सुरु हो जाएँगी ,बड़े गर्व से ,अब हमारा बेटा किसे बड़ी कंपनी में अच्छी सैलरी में नौकरी करने लगे और क्या .
विमला देवी
-सब ऊपर वाले की कृपा है,मिलेगी क्यों नहीं ,उसने मेहनत भी कितनी की है .उसके पीछे पैसा हमने पानी की तरह बहाया है .
विकाश भी चुप चाप बगल में खड़ा होक सब सुन रहा था
, हड़बड़ाते हुए ,पापा मै भी इस साल MBBS
की तैयारी के लिए कोटा जाने की सोच रहा था
, ये सुनते ही नारायण प्रसाद जी की भृकुटि तन जाती है ,अच्छा तुम सोचते भी हो
,आज से ही सोचना सुरु किया .
विमला देवी हकला क्यों रहा है
,मेरे सामने तो बड़ा सेर बनता है
.
नारायण प्रसाद जी उठते हुए ,अभी कही बहार जाने की जरुरत नहीं ,तैयारी करना है तो यही से करो आखिर यहाँ से भी तो बच्चे MBBS की तैयारी करते है और अच्छे नंबर लाते है
.मेहनत करो ये करो वो करो दुनिया भर का लेक्चर दे डाला .
विकाश रोनी सी सूरत बना कर चुपचाप अपने कमरे में चला गया
.
विमला देवी -उसकी इच्छा है तो जाने दो
,उसका दोस्त विक्की भी तो एग्जाम के बाद जा रहा है .
नारायण प्रसाद जी चिल्ल्ते हुए -दुनिया में हर काम इच्छा से नहीं होते , मै अंधा नहीं हु जो मुझे कुछ दिखाई नहीं देता दिन भर मोबाइल से चिपका रहता है पता नहीं क्या करता रहता है ,पढने में मन थोड़े ही न लगता है दोस्त जा रहे तो चलो हम भी वही गुलछर्रे उड़ाएंगे
.
वह पर कौन रोकने टोकने वाला होगा .
विमला जी
-दबी आवाज में बोलते हुए आखिर उसको भी तो लगता होगा जब भैया के पीछे इतना खर्च कर सकते है ,तो उसको क्यों नहीं .
नारायण प्रसाद जी चिल्लाते हुए पैसे क्या पेड़ पर लगते है
,जिसे देखो पैसा -पैसा
,मैंने कह दिया एक बार जिसकी जो मर्जी वो करो मेरा दिमाग मत खाओ
. विकाश ये सब सुन उसका मन बहौत व्यथित हो गया
,उसे गुस्सा भी आरहा था और खुद पर रोना भी .
विमला देवी चुपचाप किचन की ओर चली गई.
माँ के लाख समझने पर भी रात में उसने खाना नहीं खाया , रात भर अपने फ्यूचर के बारे सोचता रहा ,क्या होगा मेरा आगे क्या करूँगा ,पापा को समझने से कोई फायदा नही वो नहीं मानने वाले ,बड़े जिद्दी है ,उनको समझाना भैस के सामने बीन बजने के सामान है
,इन्ही बातो को सोच -सोच कर रोता रहा . नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी ,आखिर
में उसने निश्चय किया ,की एक बार फिर माँ से बात कर के देखता हु सायद मान जाएँ ,आखिर वो भी तो बाप है ,अपने बेटे की बात क्यों नहीं मानेगे
,यही सोचते
-सोचते सुभह के ४ बज गए ,सुभह के ५ ५.३० बजे होंगे,विमला देवी किचन में चाय बनाने के लिए आती है ,विकाश एक बार फिर माँ को समझने की कोशिश कर ता है ,माँ एक बार फिर पापा से बात करो ये मेरी लाइफ का सवाल है ,और मै यहाँ से अच्छी तैयारी नहीं कर पाउँगा , वहाँ पर पर अच्छी -अच्छी
कोचिंग क्लास है , और अच्छे टीचर भी है जो बहुत अच्छा पढ़ते है , अपनी चिकनी चुपड़ी बातो से मस्का लगाने की कोशिश करता है .
विमला देवी – अब तुम ही बात करो तुम दोनों के बीच मै पिसती हु
,मै नहीं करने वाली तुमहि करो बात .
विकाश रोने को हो जाता है ,माँ तो माँ ही होती है ,बेटा सही हो या गलत,बेटे की इच्छा
ही उसके लिए सब कुछ होती है
.विमला देवी फिर एक बार पति से बात करने की हिम्मत जुटाती है
, मन ही मन कहती हुई, होगा सो होगा आगे ,आखिर उसके मन में ये तो नहीं रहेगा ,मेरे माँ बाप ने मेरे लिए कुछ नहीं किया
,विमला देवी फिर एक बार पति बात कर ती है
, नारायण प्रसाद जी अंगारे की तरह बरस पड़ते है ,तुम लोगो के पास और कोई काम नहीं ,जब देखो बस एक ही रट ,जो करना है यही करो ,नहीं मत करो कोई जरूत नहीं ,पहले भी बहुत कमल किया है आगे भी यही होगा .विकाश पूरी तरह टूट जाता है ,और वही पर रह कर आगे की पढाई करता है .
लेकिन बिना मन से किये गए काम का परिणाम भी उसी तरह होता है
.
इसी तरह साल भी गया , एग्जाम भी हो गए, आज रिजल्ट आनेवाला है .
विमला देवी – साम होने को आई अभी तक आया नहीं, नारायण प्रसाद जी भी इंतजार में थे क्योकि आज रिजल्ट आने वाला था .क्या हुआ ,हुआ या नहीं हुआ कई तरह के सवाल उनके मन में चल रहे थे.
जैसे ही विकाश घर पहुँचता है ,
नारायण प्रसाद जी दरवाजे पर ही बैठे थे टोकते हुए क्या हुआ ,विकाश - पापा नहीं हुआ no कम है . नारायण प्रसाद जी मनमे निराशा के भाव लिए हुए ,बुझे स्वर में मुझे पहले से पता था कुछ नहीं होना फालतू में समय और पैसा बहा रहे हो ,तुम्हारे बस की बात नहीं . विकाश को अब चारो तरफ अँधेरा ही अँधेरा नजर आरहा था ,दिमाग पूरी तरह सुन्न पड़ता जारहा था ,सीधे कमरे जे जाकर दरवाजा बंद कर लेता है ,अन्तः वही हुआ जिस बात का दर था जो उसके दिमाग में सालो से चल रहा था .
~ धर्मेंद्र मिश्रा.
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