मंगलवार, 13 जून 2017

poetry





 आज मैंने सराफत से शराब पी है ,गम को घोल गले तक पी है.
 फिक्र गर तुम्हे है,मुझे मेरे महबूब के घर छोड़ दो जहा आज महफ़िल सजी है.
 नशे में तो आज सारा जहाँ दिखता है ,फर्क बस इतना है आज मेरे पैर लड़खड़ा गए है.
 मुझ पर जुल्म मत करो मैखाने को बंद मत करो,आज सराफत से ही कहता हु, सराब मैंने चुपचाप पी रखी है.
  हम भारत के फौजी
 हम भारत के फौजी है मन के मौजी ,चीर सीना अब दुश्मनो का वही तिरंगा लहरेँगे.
 मौत सामने देख अब दुसमन रण छोड़ेंगे,रक्तपिपासु बन अब हम उनके खून की होली खेलेंगे.
 हम भारत के वीर मौत से क्या घबरायेंगे,भारतमाँ की खातिर अब दुसमन का लहू  बहाएंगे.
 हम भारत के वीर मौत से लड़ जायेंगे ,रक्तसीचित कर इस धरती को फिर खुशहाल बनाएंगे.




 तपिश की इस धुप में खुसी की बौछार हो गई, आज बिन बादल ही बरसात हो गई.
राहत मिली ऐसे ,जैसे पपीहे की प्यास बुझ गई,आज बिन बादल ही बरसात हो गई.
 चहक रही है चिड़िया खिल रहे है फूल जैसे बहार आगई,आज बिन बादल ही बरसात हो गई.
 उमंगों से भरी जिंदगी परिंदा बन के उड़ रही जैसे मंजिल दिख गई,आज बिन बादल ही बरसात हो गई.


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1-गम में भी हसता रहु ये तरीका मैंने सिख लिया है.
हर सुरते- -हाल अदब से पेश आउ ये सलीका भी मैंने सिख लिया है .



2-माँ की बातो का कोई मोले नहीं ,बीबी के आगे बेटे का चलता कोई जोर नहीं .
बूढी माँ बैठी है सिसकती हुई ,रसोई में अब माँ का चलता  कोई जोर नहीं .
 


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