खाने के साथ कही हम धीमा जहर तो नहीं ले रहे ?
प्राचीन काल से ही भारतीय भोजन में मसालो का प्रचलन रहा है ,जो न सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट बनाते है अपितु स्वस्थवर्धक भी होते है ,लेकिन मिलावट की वजह से यही मसाले धीमा जहर बन जाते है जो की विभिन्न प्रकार की बिमारिओ का कारण होती है .आज खुले और बंद हर तरह के मसाले बाजार में उपलब्ध है जो मिलावट से भरपूर है .इसका कारण सरकार की उदासीनता ,सरकारी अधिकारियो की घूसखोरी ,पैसो के लिए लोगो के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है .बाजार में उपलब्ध आज हर चीज मिलावटी है ,आप किसी भी चीज को पूरी तरह प्योर,सुद्ध नहीं कह सकते .
हालत ये है की आप नमक को छोड़ बाजार में उपलब्ध किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवक्ता पर यकीन नहीं कर सकते .तेल से लेकर मसालो तक व्यपारी बिना रोक टोक धड़ल्ले से मिलावट और कलाबाजारी का खेल खेल रहे है . .
आप रिफाइंड आयल को ही ले लीजिये जिसमे ३० फिदी से लेकर ७० फीसदी तक पोम आयल मिलाया जाता है .और ये पोम आयल(pom oil) महुए के रस ,धान की भूसी ,अरंडी के तेल और चकौड़े के तेल से मिला कर बनाया जाता है .एक बहुत ही खास बात जो आप को जननी चाहिए - पोम आयल ,अर्थिटिस,घुटे के दर्द के सम्बंधित जितनी भी तरह की बीमारी होती है,उसकी एक प्रमुख बजह है.
व्यपारी गर्मियों के मौसम में रिफाइंड आयल में पोम आयल की मात्रा ७० फीसदी तक मिलते है और जैसे -जैसे ढंड का मौसम अाता है ये मात्रा ३० फीसदी तक कर दी जाती है ,क्योंकी पोम आयल ढंड के मौसम में जमने लगता है.
अब हम बात करते है हल्दी की यह भी एक प्रमुख मसाला है जो खाने में जरूर ही इस्तेमाल की जाती है,और इसमें भी मिलावट की जाती है जैसे चावल की टुकड़ी को पीसकर ,येलो powdwer मिला कर सस्ते दाम की हल्दी तैयार कर मार्केट में बेंच दी जाती है .
और इसी प्रकार धनिया में भी धनिये की डंठल को पीसकर हरे पाउडर के साथ मिला कर तैयार किया जाता है .लिस्ट बड़ी लम्बी है ,हर चीज मिलावटी है किस चीज पे क्या मिलाया जाता है ये जानना जरुरी नहीं बल्कि ये सवाल लोगो के जेहन में होना चाहिए की सरकार मिलावट और कालाबाज़ारी या कहे ब्लैक मार्केट को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है ?
तो दोस्तों अब जानते है हमारी सरकार इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयाश कर रही है -सरकार ने मिलावट और कालाबाजारी को रोकने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का गठन किया है .
कंपनी माल तैयार करती है और उसके अनुमोदन के लिए विभाग के पास सैंपल टेस्ट करवाना पड़ता है .अगर कोई माल,खाद्यपदार्थ उस टेस्ट में पास नहीं होता तो कंपनी द्वारा निर्मित पुरे स्टॉक को रिजेक्ट कर दिया जाता है .लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारी उस टेस्ट को पैसे लेकर उचित मानक को पूरा किये बगैर कंपनी के माल को क्लीन चिट दे देते है .
छोटे और खुदरा व्यापरी भी अपना माल इसी तरीके से बड़ी आसानी से लोकल मार्किट में रिटेलर और खाद्य विभाग के अधिकारिओ के साथ साठ -गाठ कर अपने माल को बाजार में बेंच देते है .
छोटे व्यपारी ज्यादातर खुला मसाला या कहे unpacked स्पाइस को मार्केट में बेंचते है .
खुले और पैकेट बंद मसालों में फर्क बस इतना है ,खुले मसालो में मिलावट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे खुदरा व्यापारियों की लगत मूल्य कम आती है और रिटेलर को भी सस्ते दामों में उपलब्ध हो जाती है ,जिनसे हम (अल्टीमेट) माल खरीदते है .
लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश है खास कर europin कंट्री में खाद्य और सुरक्षा के मानक बहुत सख्त है ,उनकी सरकारे अपने लोगे के स्वाथ्य के प्रति बेहद संवेदनशील है .तय मानक से नीचे काम करने वाले व्यपारियो पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही भी की जाती है . लेकिन हमारे देश में सरकार के लिए जनता सिर्फ वोट है ,वायदे तो बहौत करती है लेकिन मिलावट और काला बाजारी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती,सरकारी नियम कानून तो सिर्फ कागजो पर ही चलते है .यदा -कदा ही ढोस कर्यवाही किसी -किसी पर की जाती है जब की जरूत तो सभी पर लगाम कसने की है .
प्राचीन काल से ही भारतीय भोजन में मसालो का प्रचलन रहा है ,जो न सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट बनाते है अपितु स्वस्थवर्धक भी होते है ,लेकिन मिलावट की वजह से यही मसाले धीमा जहर बन जाते है जो की विभिन्न प्रकार की बिमारिओ का कारण होती है .आज खुले और बंद हर तरह के मसाले बाजार में उपलब्ध है जो मिलावट से भरपूर है .इसका कारण सरकार की उदासीनता ,सरकारी अधिकारियो की घूसखोरी ,पैसो के लिए लोगो के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है .बाजार में उपलब्ध आज हर चीज मिलावटी है ,आप किसी भी चीज को पूरी तरह प्योर,सुद्ध नहीं कह सकते .
हालत ये है की आप नमक को छोड़ बाजार में उपलब्ध किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवक्ता पर यकीन नहीं कर सकते .तेल से लेकर मसालो तक व्यपारी बिना रोक टोक धड़ल्ले से मिलावट और कलाबाजारी का खेल खेल रहे है . .
आप रिफाइंड आयल को ही ले लीजिये जिसमे ३० फिदी से लेकर ७० फीसदी तक पोम आयल मिलाया जाता है .और ये पोम आयल(pom oil) महुए के रस ,धान की भूसी ,अरंडी के तेल और चकौड़े के तेल से मिला कर बनाया जाता है .एक बहुत ही खास बात जो आप को जननी चाहिए - पोम आयल ,अर्थिटिस,घुटे के दर्द के सम्बंधित जितनी भी तरह की बीमारी होती है,उसकी एक प्रमुख बजह है.
व्यपारी गर्मियों के मौसम में रिफाइंड आयल में पोम आयल की मात्रा ७० फीसदी तक मिलते है और जैसे -जैसे ढंड का मौसम अाता है ये मात्रा ३० फीसदी तक कर दी जाती है ,क्योंकी पोम आयल ढंड के मौसम में जमने लगता है.
अब हम बात करते है हल्दी की यह भी एक प्रमुख मसाला है जो खाने में जरूर ही इस्तेमाल की जाती है,और इसमें भी मिलावट की जाती है जैसे चावल की टुकड़ी को पीसकर ,येलो powdwer मिला कर सस्ते दाम की हल्दी तैयार कर मार्केट में बेंच दी जाती है .
और इसी प्रकार धनिया में भी धनिये की डंठल को पीसकर हरे पाउडर के साथ मिला कर तैयार किया जाता है .लिस्ट बड़ी लम्बी है ,हर चीज मिलावटी है किस चीज पे क्या मिलाया जाता है ये जानना जरुरी नहीं बल्कि ये सवाल लोगो के जेहन में होना चाहिए की सरकार मिलावट और कालाबाज़ारी या कहे ब्लैक मार्केट को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है ?
तो दोस्तों अब जानते है हमारी सरकार इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयाश कर रही है -सरकार ने मिलावट और कालाबाजारी को रोकने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का गठन किया है .
कंपनी माल तैयार करती है और उसके अनुमोदन के लिए विभाग के पास सैंपल टेस्ट करवाना पड़ता है .अगर कोई माल,खाद्यपदार्थ उस टेस्ट में पास नहीं होता तो कंपनी द्वारा निर्मित पुरे स्टॉक को रिजेक्ट कर दिया जाता है .लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारी उस टेस्ट को पैसे लेकर उचित मानक को पूरा किये बगैर कंपनी के माल को क्लीन चिट दे देते है .
छोटे और खुदरा व्यापरी भी अपना माल इसी तरीके से बड़ी आसानी से लोकल मार्किट में रिटेलर और खाद्य विभाग के अधिकारिओ के साथ साठ -गाठ कर अपने माल को बाजार में बेंच देते है .
छोटे व्यपारी ज्यादातर खुला मसाला या कहे unpacked स्पाइस को मार्केट में बेंचते है .
खुले और पैकेट बंद मसालों में फर्क बस इतना है ,खुले मसालो में मिलावट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे खुदरा व्यापारियों की लगत मूल्य कम आती है और रिटेलर को भी सस्ते दामों में उपलब्ध हो जाती है ,जिनसे हम (अल्टीमेट) माल खरीदते है .
लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश है खास कर europin कंट्री में खाद्य और सुरक्षा के मानक बहुत सख्त है ,उनकी सरकारे अपने लोगे के स्वाथ्य के प्रति बेहद संवेदनशील है .तय मानक से नीचे काम करने वाले व्यपारियो पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही भी की जाती है . लेकिन हमारे देश में सरकार के लिए जनता सिर्फ वोट है ,वायदे तो बहौत करती है लेकिन मिलावट और काला बाजारी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती,सरकारी नियम कानून तो सिर्फ कागजो पर ही चलते है .यदा -कदा ही ढोस कर्यवाही किसी -किसी पर की जाती है जब की जरूत तो सभी पर लगाम कसने की है .
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