सोमवार, 7 मई 2018

संविदावाले गुरु जी,कविता

  

संविदावाले गुरु जी,कविता



संविदावाले गुरु जी पढ़ा रहे थे क्लास में की
गंगा जी कहाँ से निकल कर कहाँ समाती है .

उद्गम से संगम और संगम से उद्गम तक,
गंगा मैया कैसे और कहाँ जाती है .

बच्चे बेचारे चौथा और पचमा के का जाने,
गंगा कहाँ से निकल कर कहाँ जाती है . 

ऊ ता इहौ न जाने की गंगा आय का,
छेरी की पढिया की जंगल की हांथी है .

गुरु जी बताये रहे गंगा जी अमरकंटक से,
निकल के सतपुड़ा जंगल में विलुप्त होजाती है .

भोपाल,जबलपुर ,रायपुर छुहिया औ,
रेवा का पर करि चचाई में समाती है .

दोहा

"खिड़की से इतना सुन हेडमास्टर जैसूर,
आये अंदर ताव से देखिन आँखि घूर ".

मूरख का पढ़ा रहे हो स्कूल का ऐसे ही चलेगी,
दो नवा का ज्ञान नहीं मास्टरी का ऐसे ही चलेगी.

गंगा जी अमरकंटक से कैसे निकलेगी,
एतनि बड़ी गंगा कूड़ा मा कैसे रहेगी.

हमका बताबा कब ऋषिकेश,हरिद्वार,
काशी,पटना इलाहाबाद ,में बहेगी.

हिमालय से निकल कर कब फैली,
कब जमुना जी से संगम करेगी.

गुरु जी बोले या संविदा के वेतनिया मा,
गंगा जी  जइसन चाहे ओइसन बहेगी.

जब तक न बढे हमार वेतनिया,
गंगा जी मध्य प्रदेशय मा बहेगी.

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