रविवार, 14 अक्टूबर 2018

जुमला जी

गंभीर व्यंग यही है मेरा ढंग जुमला जी की और मेरे मन की बात!!!

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 रात आधी गुजर चुकी थी ,जुमला जी अपने सयन कच्छ में चद्दर तान के सोरहे थे ,तभी एक बुजुर्ग सर पे साफा बंधे प्रकट होता है .

जुमला जी को उठाते हुए -ऐ चौकीदार ...चौकीदार ...
जूमला जी हड़बड़ाते हुए "कौन ...कौन ...?"

बुजुर्ग "हम है देश की जनता ...जिसकी कोई नहीं सुनता ...?

जुमला जी"रात में तो छोड़ दो ...मन की बातो को विश्राम दो ...बड़ी मुश्किल से सोया था ...इस समय वैसे भी नींद कम आती है ...7साल इतनी जल्दी गुजर गये पता भी नहीं चला. "


बुजुर्ग 
"जगे हो तो पता चले ...सो ही तो रहे थे...हमने वोट सोने के लिए  थोड़े ही न दिए ...काम करो...काम ...
जुमला जी ,भड़कते हुए ,उठकर बैठ गए ,चद्दर दूर फ़ेंक दी "7साल से तुम लोगो ने जीना हराम  कर दिया ,हिसाब दो ...हिसाब दो ...?

बुजुर्ग " ठीक है हिसाब न दो त्याग पत्र देदो ,तुम्ही तो कहते हो फ़क़ीर हो ...झोला उठाओ और निकलो ?


जुमला जी"
70 साल की भरपाई 7साल में ही करलोगे... जा कर उनसे पूंछो ...जो 70 साल से सोये रहे क्या किया...जब मै जगूंगा तब  हिसाब दूंगा... अब...जाओ ?

बुजुर्ग -"
हे महात्म कुम्भकर्ण!...तुम तो निद्रा के जन्मदाता हो ...मतलब कभी जबाब नहीं दोगे ?"
जुमला जी "हम पे जितना ही कीचड़ उछालोगे...कोई फर्क नहीं पड़ेगा ...मै औरत का आदमी नहीं...मोटी चमड़ी का आदमी हूँ .

बुजुर्ग "
"इसलिए लोग कहते है ...बिना औरत का आदमी ,अपने मन की ही करता है ...
लेकिन मामला उलट गया औरत वाले आदमी भी अपने मन की करने लगे...महिलएं   "मी टू"  "मी टू" करती है ...मोटी चमड़ी वाले "इलू ...इलू"

जुमला जी 
"उनका पाप भी हमारे ही सर फोड़ दो ...इस मामले में मेरा साफ कहना है ...कानून अपने हिसाब से काम करती आरही है ."


बुजुर्ग -
"और ऐसे ही करती रहेगी ...लोग तो यहाँ तक कहते है ...सब तुम्हारे आदमी है ?"
जुमला जी ,ताल ठोकते हुए"सब उनके पुराने पाप है ...जो अब निकल के आरहे है ...सब धरा जायेंगे ...वादा है ...भाईयो बहनो विश्वास है ना ...?"


बुजुर्ग "

"विश्वास आप का नहीं हुआ तो जनता का क्या होगा ,फसाद की जड़ यही है  "

जुमला जी 

"विश्वास पे दुनिया क़ायम है ...सुना की नहीं सुना ...भाईयो बहनो ये जुमला  क्या मैंने  बनाया ...अभी तो विकाश ने रफ़्तार पकड़ी है ."

बुजुर्ग 

"मतलब की मतलब से मतलबी हो  ,हवा में रहोगे ,हवा हवाई बाते करोगे ?"
जुमला जी "बस देखते जाओ हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई जहाज से उड़ेंगे ?  "
बुजुर्ग"
पहले  जो वादे किये उसका क्या ...?15 लाख तो चलो मै भूल गया ...भूल कहे गया मन मार लिया ...
बांकी का हिसाब दो ...खूब मन की बाते की ."


जुमला जी ,अपने चिर परिचित अंदाज में -
"भाईयो बहनो मन की बात है कह देता हूँ ,दिल में नहीं रखता ...
फकीरी स्वाभाव में है."


बुजुर्ग -
"ऑंखें निकाल कर धूल मल कर ,फिर लगा देते हो. ..कम से कम ऐसे ही लाखो का सूट हम फकीरो के लिए भी बनवा दो."
जुमला जी -

 "इंतजार करो ...2024 में फिर सरकार बनाने दो ...वो काम करूँगा की दुनिया हैरान होजायेगी ."

बुजुर्ग "आह !!!
हैरान तो नहीं ...परेशान जरूर हो जायेगी."


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                                                               ~धर्मेंद्र मिश्रा~                                   

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