शनिवार, 9 मार्च 2024

Rahul Gandhi vs Narendra Modi

 

नरेंद्र मोदी vs राहुल गाँधी

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"भारत की मूल भावना के साथ कैसे खेलना है ,

राजनैतिक हित कैसे साधना है और राजनैतिक द्वेष कैसे भुनाना है, मोदी सरकार अच्छे से समझती है,

इसी को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाते हैं ।

उस बली की वेदी से जारी फरमान काले कानून ने हजारों किसानों को मरवा दिया , ऐसे तानाशाह से देश के किसान अभी भी कोई उमीद रखते हैं, यह अपने आप में उनके लिए नउमीदी ,हतासा कि अभिव्यक्ति मात्र है ।

यह कैसी प्रकृति है,और उसकी कैसी माया?


गरीबी की दुहाई देते देते मोदी,नामदारी के सर्वोच पद तक पहुँच गए , गरीबों को रासन और वोट तक सीमित कर दिया, स्वयं अमीरों और नामदारों का मसीहा बन गए 

वहीं राहुल गांधी जिन्हेंने कभी गरीब और गरीबी देखी तक नहीं, गली गली खेत खलिहान, मजदूर, युवा,किसान तक पहुंच रहे हैं ।

 

 जिनके हृदय में सत्य है वे गिर के भी संभल गए,उन्हें  'राम चरित्र ' मिल गया ,वे न्याय पथ की ओर बढ़ चले।

वहीँ धर्म के नाम पर पाखंड रचते रचते मोदी और उसकी विचार धारा वाले रसातल की ओर ही गए... 'रावण चरित्र' अपना लिया ।


देश का कितना बड़ा दुर्भाग्य है, उसे एक ऐसा तानाशाह पीएम मिला है,जो  देश को  सशक्त आधार और संबल प्रदान करने वाले अपने ही किसानों के रास्ते  पर कीलें बिछाई जा रही हैं, वहीं गैर मुल्क के लोगों से गल बहियाँ karte  हैं, जिनसे आप का कोई आत्मीय संबंध नहीं है, सिर्फ दिखावे का है ।


सिर्फ इसलिए की वो अमीर हैं उससे आप की शानो-सौकत में इजाफा होगा और किसान गरीब हैं,वे देने केलिए नहीं बल्की कुछ माँगने केलिए हैं 'हक '

क्या इस देश में न्याय की बात करना गुनाह है ।


उन्हें यह कह कर खारिज कर दिया जायेगा वो विरोधी हैं ।

सरकार के पक्ष में नहीं हैं इसलिए उन्हें न्याय पाने का अधिकार नहीं है?

 लोग गुलामी की मानसिकता से जकड़ चुके हैं,

इसलिए वे मुखर तो हो नहीं सकते,फिर भी कहने को इंसान अभी भी हैं, आत्मा अभी मरी नहीं,बस उसके होने का बोध नहीं है । कुछ देर के लिए सरकार द्वारा बनाई गई धारणा से निकल कर देश और अपने आस-पास समाज में सत्य को परखना है फिर स्वयं के अंदर झाकंना है उस फर्क को महसूस करना है ।


क्या अभी भी हम एक समाज हैं ?

या अपनी धारणा अनुरुप व्यक्तियों का चुनाव कर एक अलग ही समाज का निर्माण कर लिया है ।

 देश के नागरीक के रुप में हमारा धर्म है कि परिस्थतियों को समझते हुए चलें, न्याय,हक और ईमान की अवाज को बुलंद करें, जो इसके लिए लड़ रहे हैं उनके साथ खड़े हों, अर्थिक,सामाजिक, राजनैतिक हर दृष्टिकोण से उनका सहयोग करें ।

विपक्ष को खत्म करने  की जी तोड़ कोशिश में  लगे  हैं  ,उनके  सभी  अकाउंट  फ्रीज़  कर  दिया  ,जिससे  वो  जनता  तक  न  पहुँच  सकें  ,अपनी  बात  न  रख  सकें।  

विपक्ष को  खत्म  करने  का  मतलब  है  लोकतंत्र  का  खत्म करना।  रूस, चाइना  ,उत्तर  कोरिया  जैसे  देशों  में  देखते  हैं । सरकार अपने  हर  मनमानी  फैसले आप  पर  थोप  देगी  और  कुछ  कह  भी  नहीं  पाएंगे। 

अभी समय  है  जग  जाइये  ,नहीं  फिर  सोइये  या  जागिये  कोई  फर्क  नहीं  पड़ने  वाला।  

अब ये  आप  पर  निर्भर  करता  है  की  आप  लोकतंत्र  के  साथ  हैं  या  लोकतंत्र  को  खत्म  करने  वालों  के  साथ  हैं ? 

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