शनिवार, 30 मार्च 2024

Arvind kejriwal vs Narendra Modi

नमस्कार !

दिल्ली शराब घोटाला साजिश सडयंत्र  है या इस में वास्तविकता है ?

इस आलेख के माध्यम से हम विस्तार से इस पूरे मामले को समझने की कोशिश करते हैं।

इस समय अरविन्द केजरीवाल की चर्चा सिर्फ भारत में ही नहीं हो रही बल्कि दुनिया भर की न्यूज़ एजेंसी और दीगर मुल्क जैसे अमेरिका ,फ़्रांस ,ब्रिटेन ,जर्मनी यहाँ तक की यून के आधिकारिक प्रवक्ता ने भी अरविन्द केजरीवाल पर प्रतिक्रिया दी है।

कुछ ऐसे बयान जो चर्चा में है /क्वोट करता हूँ ;

"अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा है ;अमेरिका ,अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुडी रिपोर्ट पर बारीक़ नजर रख रहा है और वह निस्पक्छ क़ानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने के पक्ष  में खड़ा है। "

 

यून  एंटोनी गुटेरेस के प्रवक्ता ने कहा कि "

हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे किसी भी देश की तरह जहाँ चुनाव हो रहा है, भारत में भी राजनीतिक और नागरिक अधिकारों के साथ-साथ सभी लोगों के हितों की रक्षा होनी चाहिए.

 दुनिया को उम्मीद है कि हर कोई स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में भारत के संसदीय चुनावों में वोट कर सकेगा."

 

आखिर अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा क्या कर दिया जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए।

शराब घोटाला ? होल्ड। मैं नहीं कह रहा हूँ। इस पर क्वेश्चन मार्क है।

क्वेश्चन मार्क ईडी सीबीआई जैसी उन तमाम जाँच एजेंसी पर भी है जिस पर हर कोई सवाल कर रहा है। ये काम कैसे करती है।

क्या सरकार के इशारों पे विपक्ष को ख़त्म करने केलिए किसी मिशन के तहत काम कर रहीं हैं ?

95 फीसदी मामले ऐसे ही हैं। ये आधिकारिक डाटा है। जो सिर्फ विपक्ष को निशाने पे लेकर किये गए।

क्या जो सिर्फ विपक्ष में हैं वही सिर्फ भ्रस्टाचारी हैं। अगर वे भ्रष्टाचारी हैं भी तो वे लोग जो बीजेपी में शामिल हो जाते हैं दूध के धुले कैसे हो जाते हैं।  वहीँ उनके अपने वाले जो भ्रष्टाचारी हैं ,वे तो पहले से ही रास्ट्रवादी संस्कारी हैं।लोग कब से मोदी जी से इस सवाल का जवाब जानना चाहते है। 


लेकिन मोदी सरकार से कोई सवाल नहीं कर सकता । मनाही है, हम ऐसी गलती नहीं कर सकते लेकिन इस दिल का क्या करें आखिर वो तो सब समझता है

आपने कभी किसी न्यूज़ चैनल  या  अख़बार  में कभी  देखा  -सुना  या  पढ़ा  बीजेपी  के किसी नेता  या  पार्टी  से जुड़ा  हुआ हो उस  पर किसी प्रकार  की जाँच हुई  हो।  नहीं न। क्योकिं  लोकतंत्र का चौथा  स्तम्भ भी अब सरकारी तंत्र के सडयंत्र  का हिस्सा बन चूका  है। सरकार की तनखाह  पर चल रहा है। 

सरकार को जिसे  नौकरी देनी चाहिए उसे तो देती नहीं देश में 83 फीसदी युवा बेरोजगारी की मार झेल  रहा है। हम नहीं कह रहे ,ऐसा रिपोर्ट कहती है।


देश के मुद्दों पर जब  बात आती  है मोदी सरकार की दलीलें  ऐसी  हैं जैसे बीरबल  की खिचड़ी । हवा  हवाई  बातें  ,सिर्फ प्रचार  में विकास दीखता  है ;होर्डिंग ,बैनर ,टीवी, विज्ञापन ।  इधर देश हुआ नंगा ,अडानी ,अम्बानी  का धंधा  चंगा ।

 धन्ना सेठों पर गुजराती भाई जुमला सेठ मोदी जी की कृपा है गुजराती -गुजराती भाई-भाई।

अब मुद्दे पर आते हैं। तथाकथित शराब घोटाला। इसे संछेप में समझते हैं ;

ईडी ने केजरीवाल को हिरासत में लेलिया। मजे की बात ये है जिस सरकारी गवाह के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया वो हैं  हैदराबाद का बिज़नेसमैन पी सरथ चंद्र रेड्डी जिसने बीजेपी एलेक्ट्रोरल बांड के जरिए तक़रीबन 60 करोड़ों का चंदा दिया।

इस व्यक्ति पर  ईडी का आरोप  है इसने 100 करोड़ रुपये केजरीवाल को गोवा चुनाव में एलेक्ट्रोरल बांड के जरिए दिए। बदले में केजरीवाल सरकार से शराब नीतियों से इस व्यक्ति को फायदा हुआ। इस आधार पे  ईडी ने इस पी सरथ चंद्र रेड्डी को गिरफ्तार किया ,कई महीनों जेल भी रहा।

फिर जेल से छूटने केलिए इसने बीजेपी को करोड़ों का चंदा दिया और केजरीवाल के खिलाफ सरकारी गवाह बन गया और जेल से छूट गया।

लेकिन ईडी के पास अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ इस पी सार्थ चाँद रेड्डी से लिए गए पैसों का कोई पुख्ता सबूत नहीं कोई  मनी ट्रेल नहीं ईडी का मनमानी ट्रेल है  । खाली इस व्यक्ति के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

कुलमिलाकर ये समझे ये सब एक प्रपोगेंडा ,ड्रामा की तरह फ़िल्मी है केस।  पी सार्थ चाँद रेड्डी पहले घोटाले का खंडन किया तो ईडी ने हिरासत में लेलिया 6 महीने जेल में रखा। खूब परेशान ,टॉर्चर किया गया होगा तो सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गया।

बीजेपी को करीब 60 करोड़ के आस -पास फिरौती न कह कर चुनावी चंदे के नाम पर रिहा कर दिया। एक पार्टी को दिया गया चंदा क़ानूनी ,दूसरी पार्टी को दिया गया चंदा गैर क़ानूनी हो जाता है। जैसे कांग्रेस पार्टी के चंदे पे ईडी ने फंदा डाल दिया। पार्टी का अकाउंट ही फ्रीज कर दिया।

 अब इसी पी सार्थ चाँद रेड्डी नाम की हड्डी को केजरीवाल की गले की हड्डी बना कर ईडी  लटकाना चाहती  है। खैर ,,,

ईडी को क्या पड़ी है उसकी केजरीवाल से कोई जातीय दुश्मनी तो है नहीं। दुश्मनी तो मोदी जी और अमित साह से है। शहनसाह  के नाक निचे कोई दूसरी सरकार कैसे चल सकती है। वो भी डंके की चोट पर ,मोदी और अमित साह को चुनौती देकर।

खैर ,इस मामले में भी निष्पक्षता की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती ,जैसा की बांकी सभी मामलों में होता रहा है।

जिस मोदी की छवि को लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़ी -बड़ी ढींगे हाँकी जाती है। वहां इस तरह के मामले न सिर्फ मोदी सरकार बल्कि भारत और उसके लोकतान्त्रिक व्यवस्था की छवि को धूमिल करती है।

 

क्या भ्रष्टाचार के नाम पर मोदी सरकार  रैकेट चला रही है।  जिससे उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचला जा सके।

जैसे पुतिन ने रसिया में किया ,चुनाव हुआ जैसा यहाँ पर होता है ,महज औपचारिकता, पुतिन थे ,पुतिन हैं ,पुतिन ही रहेंगे राष्ट्रपति । खैर  पुतिन ,मोदी के मित्र भी अच्छे  हैं , गाहे बगाहे दोनों एक दुसरे की तारीफ भी करते रहते हैं। ये अलग बात है पुतिन को दुनिया युद्ध अपराधी मानती है। यूक्रेन के साथ क्या किया , और कर रहे है सब जानते है। अब रहने भी दो छोड़ दो उस गरीब को। खैर कमोबेश हमारी भी वही भी हालत है।  सब को पता रहता है सरकार किसकी बनने वाली है।

मोदी ने पहले ही घोषणा कर दी 400 सीट लाएंगे  ?

अब एक मतदाता के रूप में हम यही सोच रहे हैं वोट डालने जाएँ या    जाएँ । सरकार तो ये पहले से ही बना कर बैठे हैं।

खाली मुर्ख  बनने मतदान केंद्र तक क्यों जाएँ । पहले से ही स्वयं को मुर्ख  मान  ले । मोदी के नाम के जैकारे लगाएं। 

 

Share this

हिंदी उपन्यासकार ,कहानीकार ,दार्शनिक ,प्रकाशित पुस्तकें " धारणावाद ;अमूर्त दर्शन, मुहाना सीरीज , घोस्ट हंटर , दायरा ,कहानी की दुनिया ,सैर सपाटा ,आबरू ,लम्पट ,किड्स बूस्टर ,कलर मी, नोट बुक "इत्यादि। Online, e-book, paper back ,amazon, flip kart ,notion press. Podcast Audio Book; Shool bhadra vs Andh karni

0 Comment to "Arvind kejriwal vs Narendra Modi"

एक टिप्पणी भेजें

Useful, valuable comments are welcome!!!