रविवार, 3 जून 2018

Bagheli Hindi Poetry

       ...बघेली हास्य कविता ...

दोहा,चौपाई,सोरठा,और छप्पय ये सब है छंद,
काहे "श्याम सुन्दर" का "पूरन छाप"बीड़ी है पसंद,

श्याम सुन्दर है अइसे,बिन पेंदी के लोटा हो जइसे,
गगरी जईसे पेट फुलाये,नाक मा किहे है सब के दम,

मारि माचिस सुलगायिन बीड़ी,लिहिन कट्टा करिहाने खोंस,
छोड़ भैंसिया फलाने के खेतमा,फलाने रहय दुरय से चिल्लात....


केकर भैंसिया हमरे खेत पड़ी,
लिहिस सगली अरशी हमा खाय ,

बेढ़ परय हो"श्याम सुन्दर"तोहरे भैंसियामा,
लिहा तू सगली अर्शी हमार चराय,

भईंस बरोबर तोहरे अकिल नहीं,
कहाँ बतान तू मनते नहीं ,

रोज रोज के तोहार धाईना होइगा,
अब तू हमरे हाँथे पनही खाबा,

या बीड़ी का तोहरे पीछे डरिके,
मर देब माचिस,रहबा  तू  फेर,

दुरय से चिल्लात,
घरे घरे जाय जाय के ,
कहत बागबा सबसे अगाध...


"श्याम सुन्दर "ककउ ना दे गारी हो...
साझीके दुइ पउआ दूध तुहु लैलीहा,

अर्शी का जाएँ दा तेल लेयें,
अगले साल पाकी फेर ,

दैउ करय जियत रहय हमार भैंसिया ,
हम फेर लेब सगली अर्शी तोहार चराय,

पूरन छाप बीड़ी के नाम बहुतबा,
आबा तलह तुहु ला बीड़ी सुलगाय,

 जबरा मारिस रोबय ना  देय,
कहाबत नहीं सरीहन कईदेब ,

जेसे कहबा ओहु के पिछवाड़े,
दुइ डंडा हम धई देब ...  

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