" अवसरवादी राजनीति "
अवसरवाद राजनीती के लिए कोई नई बात नहीं है ,आजादी के बाद से ही होता आ रहा है ,जिसकी गाहे बगाहे इतिहास और राजनीती के जो जानकर है जिक्र करते रहते हैं। लेकिन बीते दशक या कहे 2014 के बाद से अवसरवादी राजनीती में बाढ़ सी आ गई है। इस अवसरवादिता को लोग
"बीजेपी की वाशिंग मशीन"भी कहते हैं। ये वाशिंग मशीन काम कैसे करती है जैसे आम वाशिंग मशीन काम करती है , गंदे कपडे डालो ,साफ़ कपडे बाहर आगये। वैसे ही ये बीजपी की वाशिंग मशीन है। विरोधी दल के नेता पर कितने ही गंभीर भ्रष्ट्राचार के आरोप क्यों न लगे हों ,बीजेपी में शामिल होते ही ,नापाक से पाक साफ़ हो जाते हैं। ईमानदारी के मसीहा ,राष्ट्रवादी नेता हो जाते हैं। मिडिया द्वारा उनकी ऐसी छवि गढ़ दी जाती है।
कोई एक नाम नहीं कितने ही विपक्ष के नेता 2014 के बाद से बीजेपी के हो गए ।हम आपके हो गए सनम। गीत गाने लगे , सुबह से लेकर शाम तक मोदी के तारीफ के पक्के पुल बांधते रहते हैं।
इनमें से तो कुछ ऐसे नाम हैं जो घोर कोंग्रेसी जिन्हें कह सकते हैं। वे भी बीजेपी के पाले में चले गए।
कुछ जिन पर गंभीर भ्रस्टाचार के आरोप थे ,वे खुद को बचाने के लिए बीजेपी का दामन थाम लिया।
नीतीश कुमार कब किस तरफ होते हैं ,जिस तरफ होते हैं फिर क्या कहते हैं ,उस पर चर्चा करना भी सारहीन मालुम पड़ता है।
, प्रमोद कृषणम जैसे नेता tv पर बैठ कर मोदी के कुतर्कों पे मजबूती से कभी तर्क दिया करते थे , हम ने सुना। अब मोदी भक्त हो गए , उनके भाव ऐसे होते हैं ;न भूतो न भविष्यते ,मोदी से महान कोई है ही नहीं। उनके कल्कि धाम के लिए चंदा ज्यादा मिल गया होगा ?
गौरभ वल्ल्भ , जब कांग्रेस में थे tv पर बैठ कर पानी पी -पी कर मोदी सरकार को कोषते थे। अब इनका कोष भी सरकारी राहत कोष से भरा तो ,मोदी दूर दृष्टा हो गये ।
साम ,दाम ,दंड ,भेद ये अंगेजों की पालिसी रही है। वही पालिसी मौजूदा सरकार भी लागू कर रही है , कई राज्यों में तो चुनी हुई सरकार तक गिरा दी गई ,जैसे महाराष्ट्र ,गोवा ,बिहार ,मध्य प्रदेश ,कर्णाटक ,अरुणाचल प्रदेश ,मणिपुर जहाँ चुनी हुई सरकार को गिरा कर बीजेपी ने अपनी सरकार बनाई। ये वही बीजेपी है जिसके संस्थापक दल के सदस्य रहे अटल बिहारी वाजपई ने कहा था ,ऐसी सरकार को चिमटे से भी न छुएं।
लेकिन २०१४ के बाद से बीजेपी की विचार धारा बदल गई। अमित साह और नरेंद्र मोदी ही सर्वो सर्वा हैं। मजाल क्या की कोई चूं भी कर दे। सब कुछ इन्हीं के हिसाब से चलता है। जहाँ विचार धारा नैतिकता मायने नहीं रखती। रखती है तो बस सत्ता और उसका विस्तार। सीधे तौर पे बहला फुसला कर या लोभ ,लालच देकर , सीधे ऊँगली से घी न निकले तो टेढ़ी कर ,जाँच एजेंसी का भय दिखला कर।
कितने ही नेता विपक्ष के जेल में बंद है; हेमंत सोरेन ,केजरीवाल ,मनीष सिसोदिया ,सतेंद्र जैन जैसे कई विपक्षी दल के नेता है।संजय सिंह ६ महीने की सजा काट कर रिहा हुए हैं। जिनके खिलाफ कोई ठोस पुख्ता सबूत न होने पर अदालत ने जमानत दे दी। लेकिन ये तो बस कुछ बड़े नाम हैं। लेकिन ईडी ,सीबीआई का रोल कितना बड़ा है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है।
2014 के बाद आठ सालों में नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी के इस्तेमाल में चार गुना बढ़ोतरी हुई है, इस दौरान 121 राजनेता जांच के दायरे में आए जिनमें 115 विपक्षी नेता हैं , यानी इस दौरान 95 प्रतिशत विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हुई।
कई ऐसे बड़े नेताओं के नाम भी है जिन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप थे ,वे बीजेपी की वाशिंग मशीन में पाक साफ़ हो गए।
उनमें से सबसे बड़ा नाम ,हिमंत विस्वा शर्मा का है ,जिन्हें 2014 में सारदा चित फंड घोटाले में सीबीआई की जाँच और छापेमारी का सामना करना पड़ा था ,जैसे ही 2015 में बीजेपी में शामिल हुए वाशिंग मशीन में धूल गए। सजा मिलने की वजाय मजा हो गई।
बीजेपी से असाम के मुख्य मंत्री बना दिए गए । वहीँ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्या मंत्री अशोक चौहनके पर भी गंभीर भ्रस्टाचार के आरोप थे ,वे भी बीजेपी की वाशिंग मशीन में धूल गए। अजीत पवार ,प्रफुल्ल पटेल ,जोतिरादिता सिंधिया ,बहुत से नाम जो इस वाशिंग मशीन से धूल गए।
उनके सारे मामले रफा -दफा हो गए। अब सब के सब सरकारी खिदमतगार हैं। बीजेपी अब राजनैतिक दल न होकर दलदल हो गई है ,फैक्ट्री भी कह सकते हैं , जहाँ झूंठ का कारोबार चलता है ,भविष्य के सपनो को बेंचा जाता है।
लोक लुभावन लालच दिया जाता है । झूठ का ही फूल (कमल) है तो ,झूठ का फल भी होगा ।देश में महंगाई ,बेरोजगारी चरम सुख पे होगी ,गरीब को गरीब होने का बोध ही नहीं होगा, अचानक से ही किसी दिन कोई चमत्कार होगा और देश विकसित बन जाएगा । 2047 का वो कौन सा दिन होगा जिस दिन भारत विश्व गुरु बनेगा ,ये तो मोदी ही बता सकता है या उसके अंध भक्त ।
मगर फ़िलहाल विपक्षी दल में भगदड़ सी मची है ,तू गया की मैं आया ,एक के पीछे हजारों बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार खड़े हैं।
मीडिया इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक भी बताती है। मीडिया को मीडिया कहना भी अब दुस्सहस से भरा है ,राजनैतिक दल की तरह बीजीपी की सहयोगी भूमिका में अपना काम बखूबी कर रही है । जनता उनकी बातों पे भरोषा करे या न करे। ईमानदारी से बेईमानी का काम कर रहे हैं।
मोदी ही देश है ,देश मोदी के लिए , मोदी के सत्ता सुख में ही उनका कल्याण है। सरकार से सरकार तक मोदी के अजेंडे को लेकर चल रही है
क्या ये सब कुछ जो देश में हो रहा है ,सही है या गलत ,आप विचार कीजिये , बिना विपक्ष के लोक तंत्र कैसा होगा इस पर भी विचार कीजिये।
क्या आम आदमी इस सरकार में कोई हैसियत रखता है या विपक्ष के ख़त्म होने के बाद हैसियत बढ़ जायेगी। मोदी तंत्र ही लोकतंत्र होगा विचार करना चाहिए, सोचने ,समझने में कोई पहरा नहीं है।
0 Comment to "bjp washing machine"
एक टिप्पणी भेजें
Useful, valuable comments are welcome!!!