साइंस केर जमाना!!!
जब से बगरा या दुनिया
मा साइंस केर जमाना,
दया धरम मर्यादा न
जानै,होइ गई कहाँ रवाना.
धर्म कर्म सब सुनिवे
अबै ,राजनीती का जमाना,
झूट अउर अन्याय का
मनाई,माने दूध बताशा.
सब विभागन मा झूठ बगरीगै
अउर घूसखोरी,
सीखलिहिंन सब कोउ भरे
का आपन झोरी.
लड़िका बाप के कहाँ
न मानै,महतारी का गरियामै,
आज कल के पूतऊ सास
के,पकड़ी के कान उखारै.
साइंस के एमा दोख नाही
बेलकुल एको जगा ,
कौन मनाई का साइंस
कहै तू नंगा बागा.
कह मिश्रा बंधू मनाई
है अब पशुआ के नाई,
अपने हाँथ दिनिस आपन
धरम गवाईस.
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