विचार अवधारणा का जीवन में महत्व
विचार अवधारणा का हमारे जीवन में क्या महत्व है कैसे हमारे जीवन की दिशा को बदलते तथा सार्थक बनाते है ,इस विषय-वस्तु पर विस्तार पूर्वक जानते है...
"अमूमन हर व्यक्ति का मन ज्यादातर सम्भोग और धन के विचरण में ही लगा रहता है।
जीवन के लिए मूलभूत आवस्यक चीज है ,जिसके पास नहीं है ,उसके लिए सब कुछ है,जिनके पास है ,उनके लिए कुछ भी नहीं है। किन्तु हर समय स्मरण करने से ,कई और मनोविकार को जन्मती तथा जीवन की गति को असंतुलित imbalance करती है। ऐसी अवस्था जीवन के मूल उद्देश्य से भटकाव का कारण है। बुराई बुरी है फिर भी चाह कर भी रोक क्यों नहीं पाते ? कहना जितना आसान है ,पालन उतना ही मुश्किल है।
मन बांधे नहीं बांधता
,लगाए नहीं लगता, स्वतंत्र प्रवाह से ही गति करना चाहता है; इस दलदल में धसता जाता
है जो प्रयासों द्वारा भी निकल नहीं पाता।
निकालना भी कौन चाहता है ?
इसी में तो मज़ा है।
लेकिन जो गहरे तक उतर गया ,घर का रहा न घाट
का ,निकना चाहे तो निकल नहीं पता ,पूरी तरह धसना चाहे तो गहरे तक उतर नहीं पता ,एक
पाँव यथार्थ में एक पाँव सांसारिक जंजाल में ।
ऎसे ही उहा -पोह में
जीवन ढका जाता है।
अंदर से कोई आवाज आती है ? नहीं आती ,आत्मा sprite कूड़े
के ढेर में दब गई ,कभी -कभी जीवित होने का अहसास कराती है। समय ही नहीं मिलता ,काम
बहुत है ,एक बार ये फला काम अच्छे से होजाये ,फिर कोई चिंता नहीं आराम से सुनेंगे। चित्त में चिंता बेलागाम घोड़े की तरह सरपट दौड़ती
चली जाती है।
ईश्वर GOD भी एक धारणा
है ,मन के माने मान है ;मान लिया यही भगवान् GOD है ,इसमें गलत क्या है, हर समय ,सोते जागते
इसी में ही मन लगा रहता है तो इसकी पूजा करने
में बुराई क्या है?
जिसे भजोगे ,उसे ही
प्राप्त होंगे ? संसार का नियम तो यही कहता है। फिर क्या देवता GOD प्रसन्न होगये ,जिसे
भजा वह प्राप्त होगया , व्यवसाय खोल कर देदिया ,जीवन में सब आनंद मंगल। लेकिन ये मस्ती
ज्यादा दिनों तक खटाती नहीं ,कुछ समय ही गुजरे फिर से जीवन
निराश ,उबाऊ और तनाव से भर गया जीवन ही कूड़े का ढेर
होगया। फिर से कोई देवता खोजो ,जो जीवन को
सास्वत और टिकाऊ बनाये।
भावार्थ:Summery:
"जीवन टिकाऊ तभी होगा ,जब यह ज्ञात होगा ,जीवन पद्धति अनुसार किन विचारो का कितना सेवन करना है।"
~धर्मेंद्र मिश्रा ~
www.dharmendramishra.com
Inspiration ,DailyQuote ,Life Changing Thought ,Article over Spirituality and Philosophy

0 Comment to "विचार अवधारणा"बौद्ध दर्शन""
एक टिप्पणी भेजें
Useful, valuable comments are welcome!!!