" मानव प्रकृति - स्वाभाव "
मनुष्य के मनुष्य होने और जिन्दा होने का अर्थ ,
मन , कर्म ,वचन तीनो से एक होना . यदि नहीं तो पशु जानो ?
पशु में भी कुत्ता वफादार है ,मनुष्य इंद्रियों के वशीभूत होने के
कारण स्वाभाव से दोगला है ,
इस अर्थ में मनुष्य का कुत्ता होना भी कोई बुरी बात नहीं है।
हर मनुष्य के लिए अव्सय्क नहीं की वो मनुष्य ही हो ,
किन्तु जो मनुष्य है , उनके लिए आवस्यक है की वो विभेद करे। "
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