" रामायण के सन्दर्भ से गिलहरी पर प्रसंग"
रामायण हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक है ,जो हमें जीवन जीने की प्रेरणा उत्कर्ष और प्रकर्ष पे ले जाने वाली है ,यदि हम उन सीखो को अपने जीवन पे लागु करे ,न सिर्फ जीवन जीने का ढंग बल्कि हम अपने जीवन को सफल बना सकते है ,ऐसे ही रामायण के सन्दर्भ से एक बड़ा ही रोचक प्रसंग ,वाक्य है जिस विषय पर हम इस आलेख के माध्यम से जानेंगे ...
"रामायण से सम्बंधित एक कथा है विस्मरण हो इससे अच्छा पुनः स्मरण से स्मृति जीवंत होजाये -
हनुमान जी महाराज जब लंका गए , अशोक वाटिका तहस - नहस कर रहे थे रावण ने अक्षय कुमार को भेजा ,
हनुमान जी के प्राण घातक आघात से अक्षय कुमार अचेत हो गिर पड़ा ,तभी उसके मुख से राम निकला ,राम की कृपा से मोछ स्वरुप गिलहरी के रूप में उसे अभय दान मिला।
तदुपरांत वो गिलहरी एक पेड़ पे जा कर चढ़ गई। हनुमान जी महाराज जब लंका अग्नि देव को समर्पित कर पुनः प्रस्थान केलिए उड़न भरी वो गिलहरी उनके विशाल काय पूंछ में चढ़ गई। ये वही गिलहरी है...
,रामसेतु निर्माण में स्वयं के सारीर को गिला कर रेत में लोट -पोट होकर पत्थरो के बीच की दरार को भरने का काम किया । कहने का तात्पर्य संसार में हर चीज ,किसी न किसी कारण सारभूत रूप से है ,उपहास परिहास द्वारा श्रेष्ठता का निर्धारण नहीं किया जा सकता ,हर किसी के प्रति आदर और प्रेम का भाव ही जीवन है। "
"धर्मेंद्र मिश्रा "

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