बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

मनुष्य का एक दूसरे से अलग होने का वैज्ञानिक कारण


 " व्यावहारिक विज्ञानं,Behavioral science"




Behaviour_science_Human_Nature_motivational_story

                                         

हर प्रजाति जीव अपनी प्राकृतिक संरचना अनुसार दृश्टिगत समानता  है किन्तु  व्यावहारिक मूल तत्त्व ,गुण जीवन को औरो से किस प्रकार भिन्न बनाते है ,इस विषय पे गहराई से जानते है ...

 

हर  पदार्थ element की  अपनी  प्रॉपर्टी  अपना  मूल  गुण  धर्म  होता  है , किसी  कारक   की उपस्थिति में  मिलान   मिक्स  करने  पर  मूल गुण -धर्म , प्रॉपर्टी  में बदलाव होने   लगता  है। कहावत proverb भी है तरबूजा  तरबूजे को देख कर रंग बदलता है मिश्रित  कुछ  चमकीला bright रंग  होजाता  है। 

 

...यदि  ऐसा  नहीं  होता  ,एक  दूसरे  को  प्रतिकर्षित  करते  है  इसका  अर्थ  ,मौजूदा पदार्थ  element का गुण धर्म  property, में कोई समानता  नहीं  है ।

 

 उसी  प्रकार  मनुष्य  के  व्यव्हार  में  भी  यही  बात  लागु  होती  है ,स्वतंत्र  अवस्था  में  वह  अपने अनुसार  कर्म -साध्य  व्यव्हार   करता  है।

 

 परिस्थिति   को  कारण  भूत  solvent मानते  हुए  किसी  और  मनुष्य  के  संपर्क  में  आने पर व्यव्हार  में  परिवर्तन  स्वाभाविक परिक्रिया  हो सकता है। 

 

 ऐसा न होने पर   ...इसका  अर्थ means व्यव्हार  एक  दूसरे  के  अनुकूल  नहीं  है ...विरोध  वाद - विवाद  कारण  स्वरुप  परिलछित  होता  है ।

 

संछेप में यदि समझे मनुष्य  को  अपनी  प्रकृति  के  अनुसार  ही  व्यक्ति   का  चुनाव  करना  चाहिए  ,जो छिपे हुए गुणों में उभार लाये  जीवन  को  बेहतर better तथा  सार्थक useful  बनाये।"


                                                                                                     ~धर्मेंद्र मिश्रा ~

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