शनिवार, 11 नवंबर 2017

"9-Dash line" conflict over South china sea

                  क्या है "9-Dash line"?

इस आर्टिकल के माध्यम से हम 9 Dash line  और  South China Sea के विषय पर विस्तार से समझेंगे... 
"चीन जमीन पर  तो अपने पडोसी मुल्को को आंख दिखता ही है साथ ही साथ समुन्दर में भी अपनी हदे  पार कर कर रहा है. हम बात कर रहे है 'साऊथ चाइना सी'के बारे में  जिस पर चीन अपना अधिकार मानता है न सिर्फ अधिकार बल्कि वहाँ स्थित आइलैंड में ,मिलिट्री ऑपरेशन ,बंदरगाह और तेल  की खोज भी कर रहा .


"साऊथ चीन सी  South China Sea"चीन के दृश्टिकोण  से बेहद अहम् है इसका व्यपारिक महत्वा होने के साथ -साथ इंडिया ,ताइवान ,वियतनाम ,फिलिप्फिंस ,मलेसिया ,और ब्रूनई जैसे देशो को टारगेट कर  अपनी ताकत को बढ़ाने    और सर्वसक्तिमान (सुपरपॉवर) बनने की मनसा रखता है.

 "साऊथ चीन सी South China Sea " पर विवाद   की स्थिति  आज  से  नहीं अपितु सदियों चली आरहा है इस विवाद की जड़ को समझ ने के लिए हमें  ऐतिहासिक तथ्यों को खगालना होगा.

बात 2000-4000 साल पुरानी है जब इंडिया में "इंडस वैली "सिविलाइज़ेशन थी उस समय चीन में xia और हुन्न  "साम्राज्य  था. सदियों पहले तक तो स्थिति सामान्य थी क्योकि तब विज्ञान ने इतनी तरक्की नहीं की थी .उस मार्ग का उपयोग केवल सभी देश जहाज के आवागमन के तौर पर ही करते थे .

स्थिति में बदलाव तब आया जब  "साऊथ चीन सी " पर चीन ने 1940 में "9 डैश"  लाइन नाम की  एक  काल्पनिक  समुद्री  सिमा रेखा खड़ी कर दी . जिसे हम  "साऊथ चाइना सी "  के नाम से भी जानते है .

उस समय वियतनाम  भी चीन का एक भाग  था लेकिन 1940 में वियतनाम ने खुद को एक स्वंत्रत देश के तौर पर स्थापित किया हाला की चीन अभी भी वियतनाम पर अपना अधिकार जमता है और ऐसा मानने से इंकार करता है.

और तभी से  चीन  और वियतनाम के बीच विवाद गहराता गया राष्ट्रीय सम्प्रभुता के साथ -साथ  दोनों देश  "साऊथ चीन सी " पर भी अपना हक़ जताते है .

 "साऊथ चीन सी  South China Sea" अंग्रेजी के एक मुहाबरे "Adam's apple" की तरह है क्योकि "साऊथ चीन सी " की सिमा से लगे जितने भी देश है सब अपनी -अपनी सिमा से  लगे जल पर अधिकार मानते है  .


 इस विवाद के निपटारे के लिए यूनाइटेड नेशन ने "UNCLUS  नाम की एक संगठन का निर्माण किया जिसके  द्वारा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय  ने चीन के पुरे  "साऊथ चीन सी" के अधिकार के  दावे को ख़ारिज  कर दिया और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का  ये भी कहना  है की  चीन उस छेत्र के पुरे  पर्यावरण  को नुकसान  पंहुचा  रहा है और चीन को अपनी हद में रहने की नसीहत भी दी, लेकिन चीन भला सुधरने वालो में से कहाँ.चीन  अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा दिए निर्देश को  मानने से साफ इंकार करता है .

 चीन अपनी स्थिति पर यथावत कायम है ,चीन "9- डैश" लाइन को अपनी सम्प्रभुता और छेत्र  पर यथास्थिति  बनाये रखना चाहता है लेकिन साऊथ चीन सी" की सिमा से  लगे बांकी देश भी अपनी -अपनी सिमा सी लगे जल संसाधनों पर दावा करते है .

 इसकी वजह "साऊथ चीन सी South China Sea "  का  व्यपारिक महत्व होने  के साथ -साथ सामरिक महत्व भी है . 
"साऊथ चीन सी "  में तेल  और गैस के भंडार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है .एक अनुमान के मुताबिक 213 अरब  बैरल तेल  के भंडार है और  900 cubic ट्रिलियन  फ़ीट  नेचुरल  गैस के  भंडार "साऊथ चीन सी " पर मौजूद  है ."साऊथ चीन सी " से हर  साल तक़रीबन  7 लाख  करोड़  डॉलर  का  व्यपार  होता  है .दुनिया  का हर  तीसरा  व्यपारिक  जहाज  इसी रस्ते  से होकर  गुजरता  है.

 इसके साथ-साथ  चीन ने वहाँ पर  कई  कृतिम(artificial) आइलैंड भी बना लिए है जिसके माध्यम से  कई चाइनीज  तेल  कम्पनिया  तेजी  से समुद्र  का दोहन  करने  में जुटी है .चीन इस रूट के माध्यम  से जापान ,दछिण कोरिया और कई अरेबिक देश  खास कर  मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) खाड़ी देशो  से तेल का आयात करता है .


साऊथ चाइना सी  में कई सारे छोटे -छोटे  द्वीप (आइलैंड) है लेकिन दो आइलैंड बहुत ही  महत्वपूर्ण है जैसे  'स्पोर्ट्ली' और 'पर्सिअल' ये दो सबसे बड़े आइलैंड है जो इंडिया के अंडमान और निकोबार द्वीप से भी बड़े ,इन आइलैंड पर  वियतनाम  भी अपना दवा करता है . 

उसका कहना  की 17 वि सताब्दी से वो इन  दोनों आइलैंड में  रूल करता आरहा रहा है .हालाकी चाइना, वियतनाम  के इस दावे को ख़ारिज करता है क्योकि तब वियतनाम चाइना का एक राज्य  था .दूसरी तरफ बांकी मुल्क जैसे  फिलिपिन्स भी अपना दवा 'स्पोर्ट्ली' आइलैंड पर  करता है जिसका कारण छेत्रिय निकटता (ज्योग्राफिकल प्रोक्सिमिटी) है.


मलेसिया भी अपनी सरहद  से लगे समुन्दर और "स्पोर्ट्ली इसलैंड" के कुछ द्वीपों पर दावा करता है.
वियतनाम ,ताइवान और फिलिपिंस  का  कहना है की वे अपना निर्माण कार्य इन द्वीपों पर  चीन से पहले ही  सुरु कर दिया था. जिसकारण से ये अपना  अधिकार जमाना चाहते है लेकिन स्थिति में  परिवर्तन और विवाद साल 2000 के बाद बढ़ा जब चीन ने महज एक  से डेढ़ साल के भीतर  इतनी तेजी से विकाश  किया की  जितना विकाशकार्य  बांकी देशो ने अब तक मिलकर  नहीं कर पाए  .


भारत  के दृश्टिकोण  से  अगर आंकलन करे तो  'साऊथ चाइना सी ' भारत की अर्थव्यस्था में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है .
चीन इन आइलैंड में नेवी बेस के जरिये अपने यूद्ध पोतो का इस्तेमाल कर भारत  को घेरना  चाहता  है.भारत के साथ किसी भी तरह की यूद्ध की  परिस्थिति  में समंदर के जरिये चारो तरफ से भारत को  घेरने की साजिस रच रहा है.
भारत  भी चीन की इस  मनसा को  भली -भांति समझता है .भारत इस चुनौती से निपटने के लिए वियतनाम के साथ मिलकर  2011 से 'साऊथ चाइना सी ' में तेल की खोज कर रहा है .55 फीसदी से भी जादा समुद्री व्यपार भारत  "साऊथ चीन सी " के माध्यम से करता है. इस के अलावा जापान और अमेरिका के साथ मिल कर मिलिटरी  ऑपरेशन  भी करता रहता है .

चीन भी इस बात से  भली -भांति वाकिफ है की  उसके सुपर पावर बनने  के बीच का सबसे बड़ा रोड़ा भारत ही है लेकिन अब भारत ने  भी अपनी कमर कस ली है चाइना की हर चाल को नाकाम करने के लिए .वर्तमान में उपजे डोकलाम विवाद में भारत जिस तरह सख्ती से  डटा रहा चीन की लाख धमकियों के वाबजूद अपने कदम पीछे नहीं खींचे उससे चीन को एक बात तो साफ समझ आगयी की भारत को दर -किनार कर आगे नहीं बढ़ा जा  सकता .चीन को अगर बढ़ना  है तो भारत को व्यपारिक साझेदार बनाना  उसकी मज़बूरी है .


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