"Biodegradable Burial Model"
मरने के बाद इन्सान पेंड बन जायेगा ? कब्र नहीं पेंड होंगे आप के अपनों की निशानी?कब्रिश्तान में कंक्रीट की जगह होंगे हरे- भरे जंगल ?
सुनने में बड़ी हैरानी होगी लेकिन ये संभव है.अंग दान के बाद अब लोग करेंगे शरीर का दान .जिंदगी के बाद भी जिन्दा रहेंगे अब आप के अपने ...ऐसा वैज्ञानिको का दावा है .
मौत जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है फिर भी इसके बारे में हम सोचना नहीं चाहते. हम केवल यथार्थ, जीवन को ही सत्य मानते है जबकि मृत्यु भी जीवन का एक परोछ सच है .
जीवन अपने आपमें सतत और निरंतर है यह कभी ख़त्म नहीं होता केवल माध्यम बदलते है और जीवन जब अपना माध्यम बदलता है या कहे ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता है तब उस बदलाव की परिस्थिति में जो भौतिक स्वरुप सेष रह जाता है उसे ही मृत या मुर्दा कहा जाता है.
ये मृत सरीर किसी काम का नहीं होता लेकिन क्या हम इस मुर्दा सरीर को भी जीवन दे सकते है ?वज्ञानिकों का तो यही मानना है .
मरने के बाद अब सिर्फ आत्मा मुक्त होगी शरीर नहीं.मनुष्य मृत शरीर का उपयोग पृथ्वी, पर्यावण को सुरक्षित रखने और आपने परिजनों को एक नया जीवन देने में कर सकेगा .
और ये हम बायोडिग्रेडेबल बुरियल पोड "या कहे “कैप्सूल मुंडी” के माध्यम से कर सकते है .ये कैप्सूल मुंडी एक अंडे के खोल की तरह होता है जो आलू के स्टार्च से बना होता है .इसका आकर इतना बड़ा होता है की एक इंसान को आसानी इस खोल के अंदर रखा जा सकता है .
इस तकनीकी(टेक्नोलॉजी ) का अविष्कार 2003 में "ब्रेत्ज़िल और सटेली "नाम के दो इटली के साइंटिस्टो ने किया है .
इन्होने मौत को पर्यावरण के पहलु के तौर पर देखा की कैसे कब्रिस्तान को पेड़ से हरा भरा ,कचरे को कम कर और मौत से नया जीवन तैयार किया जा सकता है .यह तकनीकी या कहे अविष्कार अभी आपने शुरुआती चरण में है अभी केवल राख और कचरे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है .बाद में मानव और जीव जंतुओं के शरीर के लिए भी इस्तेमाल किया जायेगा .
ये काम कैसे करता है :"बायोडिग्रेडेबल बुरियल पोड (Biodegradable burial pod)" के खोल को स्टार्च से बने मटेरियल में लपेट कर रखा जाता है और इस खोल में विभिन्न तरह के रासायनिक तत्व भी मिले होते है जो सरीर को आसानी से अपशिस्ट पदार्थ बदल देते है या कहे डिकम्पोज़ कर देता है .
इसके बाद इस आर्गेनिक पोड (organic pod)को जमीन में गडडा खोद कर बीज या पौधे के साथ लगा दिया जाता है .ये पोड पर्यावरण को नुकशान पहुचाये बगैर धीरे- धीरे मिट्टी में मिल जाता है तथा शरीर से मिले पोषक तत्वों की सहायता से पेड़ बन जाता है .
मिटटी से बना इन्सान मिटटी में तो वैसे भी मिलजाता है लेकिन इस "कॅप्सुला मुंडी "की मदत से मरने के बाद उससे एक पेंड के तौर पर एक नया जीवन मिल जायेगा जिससे वो पर्यावरण और समाज के काम आसकता है.आज हम जिन पेड़-पौधों को निर्जीव समझ के उनकी हत्या बड़ी निर्ममता से करते है तब सायद अपनों के सरीर से उत्पन्न उन पेड़ -पौधों की हिफाजत करे .
ये कैप्सूल मुंडी पर्यावरण के लिए अत्यधिक अनुकूल है. खोल के अंदर मिट्टी के साथ जैव प्लास्टिक भी डाल दिया जाता है जिसको बैक्टीरिया धीरे -धीरे कचरा और को राख में बदल देता है. ये राख पूरी तरह नइट्रोजन युक्त होती है जो पर्यावरण के लिए अत्यधिक अनुकूल है और पेंड के विकाश में सहायता करती है .
एक अमेरिकी सर्वे के मुताबिक 2024 से लेकर 2042 के बिच लगभग 76 मिलियन अमेरिकी ,78 वर्ष की औसत आयु तक पहुंच जायेंगे जिन्हे दफनने के लिए लगभग अमेरिका के लसवेगैस राज्य के बराबर जमीन की जरुरत होगी.
अमेरिका के कब्रिस्तान में हर साल लगभग 30 लाख फ़ीट लकड़ी ,2700 tone टन तांबा - पीतल ,1 लाख टन से भी जादा स्टील एवं 16 लाख टन कंक्रीट का इस्तेमाल लाशो को दफन करने में उपयोग किया जाता है.
इसी कारण से अमेरिका के कई कंपनियों ने "बायोडायवर्सिटी उन्स (biodiversity uns)" का निर्माण किया है .ये उन्स मिटटी से तैयार किये गए है जो मृत शरीर को आसानी से अपविस्टीकारण(Di compose)कर खाद में बदल देते है और उसी खाद से पेंड उगाया जाता है .
कल्पना कीजिये हमारे प्रियजन जब इस धरती से चले जाते है तब हमारे पास सिर्फ उनकी यादे रह जाती है हम उनके अक्श को सिर्फ तस्वीरो में देखते है लेकिन हम उन्हें जीवित नहीं महसूस कर सकते है .
लेकिन बायो डाइवर्सिटी उन्स के माध्यम से हम उन्हें ,उन्ही के सरीर से बनी राख को फिर से एक पेड़ में जीवित देख सकते है .
भारत के दृश्टिकोण से यदि इस कैप्सूल मुंडी (capsule mundi) की बात करे तो हमारे देश में विभिन्न- विभिन्न धर्म को मानने वाले लोग रहते है .सभी धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को दफ़नाने की अपनी अलग -अलग परंपरा और मान्यताये है .भारत में हिन्दू एक बहुसंख्यक वर्ग है, क्या वो इस "बायोडिग्रेडबे बुरियल मॉडल" को अपनाएगा ?
जंहा पर शरीर को जलाने के बाद उसकी राख को नदी में बहते है ,बजाये इसके क्या कैप्सूल मुंडी के माध्यम से फिर से आपने परिजनों को पेड़ के रूप में देखने की कोशिस करेगा ?ये तो वक़्त ही बातयेगा लेकिन "बायोडिग्रेडबे बुरियल मॉडल (Biodegradable burial model)" दुनिया में यदि व्यापक पैमाने में उपयोग किया जाये तो पर्यावरण में एक क्रांतिकारिक परिवर्तन लाया जा सकता है .
0 Comment to " ...मौत के बाद जिन्दा रहने का फार्मूला ...article"
एक टिप्पणी भेजें
Useful, valuable comments are welcome!!!