विज्ञान Science पूरी दुनिया Universe को समेटे हुए है जो हम देख सकते और जो नहीं देख सकते वो सब विज्ञान है और विज्ञान का अर्थ ही है जानना .इस प्रकृति को ब्रह्माण्ड को जानना लेकिन कुछ ऐसी चुनौतिया कुछ ऐसे रहस्य विज्ञान के समक्ष है जिसे वैज्ञानिक अभी तक नहीं समझ पाए या जानने की कोशिस कर रहे है ...
जो भी किताबो में लिखा है हमने पढ़ा और सुना है वो महज वैज्ञानिको की कल्पना पर आधारित है उन तथ्यों की पुस्टि अभी तक वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सका है.
उन्ही अनसुलझे रहस्यों में एक रहस्य है गुरुत्वाकर्षण यानि gravitation पृथ्वी ,सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाती है 'ग्रैविटेशन ' के कारण .समुद्र में ज्वर आता है चन्द्रमा के 'ग्रैविटेशन ' के कारण .हर वो चीज जो किसी दूसरी चीज को अपनी तरफ आकर्षित करती है गुरुत्वाकर्षण के कारण .
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की वजह से हम सतह पर रहते है या ये कहे पृथ्वी पर मौजूद हर चीज गुरुत्वाकर्षण की वजह से ही धरातल पर टिकी हुई है ,अगर गुरुत्वाकर्षण न हो तो पृथ्वी पर मौजूद हर चीज अंतरिछ में पहुंच जाये. कल्पना कीजिये पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण ख़त्म हो जाए तो क्या हो ? हमसब पृथ्वी पर मौजद हर चीज के साथ अंतरिछ की सैर पर निकल जाये भले ही वापस न लौट पाएं ...
मन में ये सवाल होना लाजमी है इस "गुरुत्वाकर्षण 'बल की वजह क्या है ?इस सक्तिशाली आकर्षण बल की मौजूदगी का कारण क्या है ?जिसका जबाब वज्ञानिकों के पास तो फिलहाल नहीं है .
हालाकि इस रहस्य की गुत्थी को सुलझाने के लिए दुनिया भर के वज्ञानिक एक प्रयोग कर रहे जो अक्सर सुर्खियों में बना रहता है, वो प्रयोग है "बिग बैंग" थ्योरी या कहे "GOD Particle" की खोज . गॉड पार्टिकल क्या है? इसे जानने से पहले 'परमाणु की संरचना 'को समझना जरुरी है . ..
परमाणु किसी भी चीज की सबसे छोटी इकाई , यूनिट है .इससे छोटी चीज दुनिया में कुछ भी नहीं .किसी भी चीज को कितना भी छोटा कर दिजिये परमाणु मौजूद रहेगा यानि किसी भी चीज को "परमाणु" से अलग नहीं किया जा सकता है .
अभी तक वज्ञानिक "परमाणु" को ही किसी पदार्थ की ऊर्जा का श्रोत मानते आरहे थे लेकिन "बिग बैंग" थ्योरी के माध्यम से परमाणु से भी छोटे कण की सम्भावना को तलाशा जा रहा है .
'परमाणु ' क्या है? इसको विस्तार से समझते है :परमाणु की खोज जर्मनी के एक वज्ञानिक रदरफोर्ड ने की थी .रदरफोर्ड ने स्टील की एक प्लेट में X-रेज़ किरणों की बौछार कर प्रयोग किया और पाया की कुछ X - रेज़ की किरणे सीधे निकल जाती है ,कुछ अपनी दिशा से मुड़ जाती है और कुछ रुक जाती है .
इस तरह दुनिया की सबसे छोटी यूनिट परमाणु की खोज रादर फोर्ड ने की थी .रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग द्वारा प्रमाणित किया की परमाणु की आकृति गोलाकार होती है, जिसका सेंट्रल पॉइंट या केंद्र बिंदु प्रोटोन और न्यूट्रॉन जैसे पदार्थ (Matter) से बना होता है या ये कहे दो एनर्जी जो एक दूसरे के विपरीत केंद्र बिंदु के चारो तरफ चक्कर लगते है, जिससे होके कोई भी एनर्जी क्रॉस नहीं कर सकती है ,
केंद्र बिंदु को छोड़ कर परमाणु का बांकी पार्ट पूरा खली रहता है जिससे कोई भी रेज़ या किरण क्रॉस कर सकती है.
इन चीजों को हम आपने दैनिक जीवन में भी देख सकते है की किसी भी तरह की प्रकाश की किरण चाहे वो आर्टिफीसियल हो या नेचुरल रेज़ . इन किरणों की कुछ रेज़ सीधी कुछ मुड़ी हुई प्रतीत होती है और उनके बिच में जो गैप देखते है वो परमाणु के केंद्र बिंदु की वजह से होता है मायने केंद्र बिंदु(सेंट्रल पॉइंट ) से किरणे पूरी तरह से वापिस परिवर्तित (रिवर्स ) हो जाती है .
गॉड पार्टिकल और गुरुत्वाकर्षण की गुत्थी क्या इसी परमाणु के अंदर छुपी है? वज्ञानिक इस तथ्य को जाँच परख रहे है ,जैसे केंद्र के अलावा जो खली जगह है वो खली क्यों है? उसपर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव क्यों नहीं होता, क्या इस परमाणु से भी छोटी यूनिट इसके अंदर छुपी है?जिसे वैज्ञानिक 'गॉड पार्टिकल' कहते है.क्या इस गॉड पार्टिकल को परमाणु से अलग किया जा सकता है? क्या गुरुत्वाकर्षण की वजह यही यूनिट ,छोटी इकाई(स्मॉलेस्ट यूनिट ) है ?क्या सोर्स ऑफ़ एनर्जी यही यूनिट है ? बरहाल इन सवालों के जबाब अभी तक तो नहीं है लेकिन नासा और कोलंबिया जैसे परमाणु ऊर्जा संस्थानों का इस गुत्थी को सुलझाने का सतत प्रयास जारी है .
विज्ञानं के एक और रहस्य के बारे में जानते है वो है :पृथ्वी पर जीवन कहा से आया ?जीवन की शुरुआत कैसे हुई?
क्या पृथ्वी पर जीवन पृथ्वी पर मौजूद पदार्थ के भौतिक परिवर्तन से संभव हुआ ?वैज्ञानिको का तो यही कहना है .पृथ्वी के शुरुआती दौर में विभिन्न तरह के पोशाक तत्व (नुट्रिन्ट) पहले से ही मौजूद थे, जो कई तरह के जटिल भौतिक परिवर्तन से गुजरते हुए गहरे सागर के ताल में ,बर्फ के निचे ,ज्वालामुखी विस्फोट या बिजली की उपास्थि से जीवन का निर्माण संभव हुआ है .
इसके अलावा वैज्ञानिको का दूसरा तर्क है जीवन का प्रादुर्भाव (ओरिजिन) किसी अलौकिक शक्ति द्वारा हुआ, जैसे सभी धर्म के धार्मिक पुस्तकों में जीवन की उत्पत्ति का अलग -अलग तरह से वर्णन और अवधारणा (थेओरिटिकल फिलॉसफी )व्याख्यान है .
एक और रहस्य और तथ्य का जानते है जिसका जबाव वैज्ञानिको के पास नहीं है. ब्रह्माण्ड क्या है?ब्रह्माण्ड का सञ्चालन कैसे होता है ?हम सब कहा है ?क्या जीवन सिर्फ धरती पर ही है या कही और भी दूसरे गृह में मौजूद है ? कुछ और भी सवाल है जैसे इस ब्रह्माण्ड में कितनी आकाशगंगा(गैलेक्सी) है ?
हमारी आकाशगंगा जिससे हम' milky way ' कहते है ,इसके अलावा और कितनी आकाशगंगा है ? और भी कई सवाल है जैसे ब्रह्माण्ड में कितने तारे , कितने गृह है ?दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक (एस्ट्रोलॉजर)इन्ही सब सबलो के जबाब तलाशने में जुटे है .
एक और रहस्य के बारे में जानते है वो है कृष्ण छिद्र (Black Hole) और गहरा कला पदार्थ ( Dark Matter) क्या है ?जिसके बारे में वैज्ञानिको को कोई ठोस जानकारी नहीं है. वैज्ञानिको का ऐसा मानना है पुरे ब्रह्माण्ड का 80 फीसदी हिस्सा डार्क मैटर ,काले पदार्थ से बना है .
दूसरा सवाल वज्ञानिकों के समक्ष ये है ,जब कोई तारा या गृह ख़त्म होता है तो ब्लैक होल में समाने के बाद उसका क्या होता है ?
इस विशाल छिद्र (होल )से न तो किसी भी तरह की किरणों को उत्सर्जन (emission ) होता है और न ही कोई चीज बाहर आती है .
क्या वज्ञानिक के लिए ये संभव है की इस ब्लैक होल के अंदर जा कर देख सके आखिर इसके अन्दर है क्या ?क्यों गृह और तारे अपने वृद्धा अवस्था (loosing energy ) में इस ब्लैक होल के अंदर समां जाते है ? क्या ये गृह ,तारे जो ब्लैक होल के अंदर समां जाते है एक नयी दुनिया बनाते है? आखिर उनके साथ होता क्या है ?
इन सवालों का जवाव भविस्य में मिल पायेगा या नहीं कह नहीं सकते फिलहाल तो इन सवालों के जबाब किसी के पास नहीं है .दुनिया भर के वैज्ञानिक के लिए खोज का विषय है और भविस्य में क्या होगा ये तो भविस्य के गर्भ में है.
हो न हो गुरुत्वाकर्षण ,ब्लैक होल ,डार्क मैटर और दुनिया के अस्तित्व का कारण जैसे सभी रहस्यो का जबाब गॉड पार्टिकल में छुपा है क्योकि संभव है सोर्स ऑफ़ एनर्जी वही है. हालाकी पुख्ता तरीके से दवा तो नहीं किया जासकता है लेकिन संभवतः दुनिया के हर चीज के अस्तित्व का कारण भी सायद गॉड पार्टिकल से मिल जाये .
हम उस अलौकिक शक्ति तक पहुंच जाये जिसने पृथ्वी पर जीवन को संभव किया और ये भी हो सकता है ,पूरा Universe एक सतत परिक्रिया (नेचुरल प्रोसेस) से चलता हो, ऐसी किसी अलौकिक शक्ति का अस्तित्व ही न हो .
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