गुरुवार, 2 नवंबर 2017

----बघेली गीत----



                   बघेली गीत
3-जब से भइल बियाह राममनोहर कोठवा से बहिरे निकरत नाही रे.
दिन-दुपहरी दुलहि संग लड़ामय चोंच रातव पूजत नाही रे.
सब से करय दुलहि के गुणगान देउता-पितर  सब पीछे होइगे रे.
महतारी कहय हमार बेटबा भइल जोरू के गुलाम केका बताई रे .
अपनौ ओन्हा दुलहि के ओन्हा खुदय धोबय दुलहि टीवी देखय रे .
दुलहि के धोतिया मा सरफ लगामय महतारी का आँखि देखामय रे .
खात पहिनत ओढ़त बइठत रहय दुलहि निहारत केहू से लजाय रे.
खाय बनामय मा दुलहि मुँह फुलाबय ,गोड़े मा फाटय बेमाई रे .
दुलहि के साथय जाएँ ससुरारे महीना-दुइ महीना रही के अामय रे .
तीजा -करवा चउथ रहैं उपासे ,दुलहि के साथय पारन करय रे .
रोज बिहन्ने दुलहि संग करय  कलेवा ब्रेड बटर लगाय
घर के लड़िका जीभ लुप-लुपामाएँ  रे.
बाप कहय दुइ ठे बात ता अपुना चार सुनामय रे.

                     4--भजन-
कहाँ गए हो हमरे राधा के श्याम ,तोहरे बिना इंहा सब सुनसान .
भटकत-भटकत होइगै साम ,फेरो न मिले तू हमरे राधा के श्याम .कहाँ गए हो हमरे राधा के  श्याम ...
आपन हाँथ  बढ़ाय दा ,हमहि  या भवसागर  से  पार  लगाई  दा .
बीच भबर फांसी कब से हमरे जीवन के नाव,अब किनारे लगाय दा  .अब न करा  देरी हो  हमरे राधा.....
पाप  के गठरी  मुड़े  मा बँधे जीउ रहा  अकुलाय ,अब तुहिन  करा  कुछ  उपाय .
या  जीवन  छोड़ी  दिहन  तोहरे भरोसे,अब तुहिन है एकै सहाय .कहाँ गए हो हमरे राधा..
सुनी ला हो हमरे राधा  के श्याम ,बिन तोहरे दर्शन के हमहि  न कउनो  बिश्राम .
आँखिन से आंसू   बह्य  ,पुकारय बस  एकै  नाम श्याम-श्याम.कहाँ गए हो हमरे राधा..

हमरे दिल के मंदिर कब से पड़ा सुनसान इहै तू डरा आपन डेरा.
आँखि  खोला  त्रिभुभान  से अब  निचे उतरा ….अब ता सुनी ला हो हमरे राधा के श्याम .तोहरे बिना इंहा सब सुनसान .
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5-……………………. बियाह गीत………….
चढ़ि जा हो-चढ़ी जा हो खड़ी  तवेरा दुआरे माहि ,अब ता दूल्हा तवेरा चढ़ी जा हो.
दूल्हा भितरै पाउडर क्रीम लागमय ,पहिरे कोट-पैंट आसमानी हो.अब ता बहिरे निकरा हो,चढ़ी जा हो खड़ी ....
घर के लड़िका  मुँह  फुलवाय,कहय  हमहुँ भैया के साथ बराते  जावय हो .चढ़ी जा हो खड़ी ....
बहिनी -भौजाई मॉर्डन ट्रेंड बताबय ,कहे दूल्हा के साथ हमहुँ जावय हो.,चढ़ी जा हो खड़ी ....
बुआ -फुफु  करय  चेरउरी ,दूल्हा कहे काजर  न लगाउबॉय  हो .,चढ़ी जा हो खड़ी ....
फूफा  -जीजा  रहय रिसाने कहे हम बस मा बरातें न जाबाय हो.,चढ़ी जा हो खड़ी ....
खड़े बाराती  पान चाबामय  कहय आज जीउ भर खाबय हो .चढ़ी जा हो खड़ी ....
महतारी नजर उतरे कहय कटारे का हाँथे से न धरे  दादू हो .चढ़ी जा हो खड़ी ....
भितरे-बहिरे बाप फिरै कहय जल्दी करा हो.चढ़ी जा हो खड़ी ....
4-

मोरा बालम  बहुत जुआरी रे,सखी री मोरा बालम बहुत जुआरी रे .
दिन अरु रात जुआ मा बिताबे , देखे अपन घरबरी रे 
 सखी रे मोरा बालम बहुत जुआरी रे ,मोरा बलम बहुत जुआरी .
माटी भाव जुआ मा ग्रहस्ती मेटि ,जेवर बेंचे के करे तयारी रे 
सखी री मोरा बालम बहुत जुआरी रे ....
सारि रतिया जुआ मा बिताबे ,हमरे दिल के हाल वो जाने अनारी रे .
खाने को बुलाने जाऊ वो भी ना अये अनारी रे
सखी री मोरा बालम बहुत जुआरी रे ...
एको बात ना माने मेरी ,मोहि अपन समझे बैरी रे
सखी री मोरा बालम बहुत जुआरी रे ..
जो मै समझावन को जायूँ ,मोहि मरे के करे तैयारी रे .
सखी री मोरा बालम बहुत जुआरी रे ..




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