मंगलवार, 23 जनवरी 2018

.ख्वाबो की एक दुनिया_कविता

ख्वाबो की एक दुनिया बसाई है मन में ,
एक खूबसूरत सा आसियाना भी सजाया है मन में .
रोज ख्वाब देखता हूँ,हरी- भरी बादियों के बीच अपना भी,
एक छोटा सा माकान होगा.
सामने बर्फ से ढकी पर्वत की चोटियाँ ,
पीछे एक बहता हुआ झरना होगा.
उस छोटे से माकान में हम दो और हमारे दो बच्चे होंगे .
दिन भर उछल-कूद उधम मचाएंगे .
बीबी हमारी चिड़चिडआते हुए उनके पीछे दौड़ेगी .
बच्चो का सारा गुस्सा मुझ पर ही निकालेगी .
माली की तरह  मै अपने बाग में उन खिलखिलाते हुए
फूलो को देख मुस्कराऊँगा .


बीबी रूठेगी मै,समझाऊँगा,
जब तक नहीं मानेगी तब तक मनाऊँगा .
बच्चो का क्या हसना-रोना तो उनका काम है.
मगर वो मुझे ही कसूरवार ढहराएगी.


बच्चो की हर गलती पर मुझे ही आँख दिखाएगी .
बच्चो के बचपने में, मै खुद को तलासा करूँगा.
बच्चो के साथ बच्चा बन उसे खूब सताऊँगा .


फिर वो जब रोने को होगी ,उसे अपनी बाँहो 
में भर के अपना सारा प्यार उस पे लुटाऊँगा.
उसकी सारी शिकायतो को ख़ामोशी  से
सुनता जाऊँगा .


वो सही कहे या गलत उसकी हा में हा मिलाऊँगा .
उसकी आँखों में कभी आँसू तक न आने दूंगा .
वो जो कहेगी वही करूँगा,उसके बिना घर का एक पत्ता भी
नहीं हिलेगा .

अपने हर सुख-दुःख में उसे साथी बनाउँगा .
कभी उससे कोई  भी बात न छुपाउँगा .
उसके हर काम में हाँथ बटाऊँगा.

रोज नित नए गीत सुना कर ही उसे सुलाऊँगा .
रोज सुबह उसे अपने हाँथो से बनी चाय पिलाउँगा .
सारि दुनिया से अलग हमारी एक अलग ही दुनिया होगी .
सोचता हूँ ,सायद ये अरमान पुरे न हो तब क्या करूँगा .

मायुश होकर खुद से ही कहता हूँ,
कोई बात नहीं कागज-कलम में ही वो दुनिया बसा लूँगा .
Published Poetry...Book...Meri Suchham Anubhooti.

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