इंकार है तो कह दो,रूठ के क्यों बैठे हो,
हमारी जिंदगी हमारी है,
आप की जिंदगी आप को ही मुबारक हो...
इंकार है मेरे अल्फाजो से तो कह दो,
फिर न कहेंगे ,नफरत गर है मुझसे
तो मेरा वजूद ही मिटा दो ...
जो भी फैसला हो तुम्हारा,तुम्हारी रजा में ही
खुदा की रजा मानलुंगा...
मगर मेरी मोहब्बत का तुम सिला दो...
दिल तो पहले से ही फ़ना है ,
जिस्म को भी फ़ना कर दूंगा.
तुम्हे यही मंजूर है तो कह दो ...
तुम्हे चाहना गर गुनाह है ,
तो कहता हूँ, "हा" मैंने वो गुनाह किया है ,
तुम्हारी इजाजत के बिना किया है ....
जो मर्जी हो जिससे चाहे उससे मेरी शिकायत कर दो ...
मगर रूठ के तुम यूँ,न बैठो ,
जो भी दिल में हो कह दो ...
मेरी मोहब्बत का यूँ बेरुखी से सिला न दो ....
तुम्हारी महफ़िल में आते होंगे आदीव,
मगर ऐसा कोई आदीव नहीं जो तुम्हारे लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दे....
अपनी महफ़िलो के आदीवो से मेरा एक पयाम कहना,
एक ही नज्म में एक किताब लिख दे,
"न "कहे तो मुझे आजमा के देखना....
बरक पे रूह न उतार दूँ तो कहना .
हर नज्म में तुम खुद को पढ़ सकोगी .
हम तुम रहे या न रहे मेरी हर नज्म में तुम जिन्दा रहोगी,
कलम मेरी रहेगी कहानी तुम्हारी रहेगी ..........
जमाना बेखबर है बेखबर ही रहेगा ,
तुम कही और मै कही और रहूँगा,
जमाना यही कहेगा एक परवाना था ,
जो न जाने किसकी रूह का दीवाना था.
हर पन्ने पे लिख गया 'वो तराशा हुआ नगीना था ....वो तराशा हुआ नगीना था.....
अनुरोध है ,मेरी रूह को हाँथ मत लगाना ...पढ़ कर "'क्लोज टैब " की बटन दबा देना ..
Tried as simple word as i can with flow writing ,may be some Urdu word,pl.refer google.
Hardly an one hour of time have taken may be some mistakes..*0errorfre*
हमारी जिंदगी हमारी है,
आप की जिंदगी आप को ही मुबारक हो...
इंकार है मेरे अल्फाजो से तो कह दो,
फिर न कहेंगे ,नफरत गर है मुझसे
तो मेरा वजूद ही मिटा दो ...
जो भी फैसला हो तुम्हारा,तुम्हारी रजा में ही
खुदा की रजा मानलुंगा...
मगर मेरी मोहब्बत का तुम सिला दो...
दिल तो पहले से ही फ़ना है ,
जिस्म को भी फ़ना कर दूंगा.
तुम्हे यही मंजूर है तो कह दो ...
तुम्हे चाहना गर गुनाह है ,
तो कहता हूँ, "हा" मैंने वो गुनाह किया है ,
तुम्हारी इजाजत के बिना किया है ....
जो मर्जी हो जिससे चाहे उससे मेरी शिकायत कर दो ...
मगर रूठ के तुम यूँ,न बैठो ,
जो भी दिल में हो कह दो ...
मेरी मोहब्बत का यूँ बेरुखी से सिला न दो ....
तुम्हारी महफ़िल में आते होंगे आदीव,
मगर ऐसा कोई आदीव नहीं जो तुम्हारे लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दे....
अपनी महफ़िलो के आदीवो से मेरा एक पयाम कहना,
एक ही नज्म में एक किताब लिख दे,
"न "कहे तो मुझे आजमा के देखना....
बरक पे रूह न उतार दूँ तो कहना .
हर नज्म में तुम खुद को पढ़ सकोगी .
हम तुम रहे या न रहे मेरी हर नज्म में तुम जिन्दा रहोगी,
कलम मेरी रहेगी कहानी तुम्हारी रहेगी ..........
जमाना बेखबर है बेखबर ही रहेगा ,
तुम कही और मै कही और रहूँगा,
जमाना यही कहेगा एक परवाना था ,
जो न जाने किसकी रूह का दीवाना था.
हर पन्ने पे लिख गया 'वो तराशा हुआ नगीना था ....वो तराशा हुआ नगीना था.....
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Tried as simple word as i can with flow writing ,may be some Urdu word,pl.refer google.
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