जिंदगी 1 से लेकर
'0' तक का सफर है,
फिर '0' पे जाकर खत्म हो जाती है .
जो करा सब इसी के बीच
करा फिर
सब यही धरा का धरा रह जाता है .
1 से 9 तक तो इंसान
नजर आता है,
फिर जब 10 आता है 1*0= "0"हो जाता है .
इसके बाद वो इंसान
फिर कहाँ जाता है,
इस हकीकत को 'आज तक' कोई नहीं जनता है.
जिन्दी तो '0' पर खत्म
हो गई,
फिर गिनती के 13 दिन तमाशा और चलता है .
रूह कही यही न रह जाये,वो
फिर
कही वापिस न लौट आये,ये डर सताता है .
जनाजे से लेकर तेरवी
तक तो हर कोई
अपनेपन का सबूत देने आता है .
तेरवी 13 वे दिन हो
गई फिर कोई
14 वे दिन से नजर नहीं आता है .
2 ..जीवन का सत्य..
जीवन ही सत्य यह हमारी
सोच है,
जबकि मृत्यु ही जीवन का एक मात्र सत्य है.
इस बात को वही स्वीकार
करता है,
जिसने जिंदगी को तत्व(सत्य)से जाना है .
ताउम्र भटकता है इंसान
जिंदगी की खोज में
जिंदगी की साम होने पर खुद में ही गुमसुम हो जाता है.
सायद उसे हकीकत का
पता चल जाता है.
जिसने वक़्त रहते जाना जिंदगी को वो हसते हुए जाता है.
जिंदगी कभी सुबह कभी
साम है,
कब किस मोड़ पे ढल जाये पता नहीं.
चाहत है जिंदगी में
ज़माने भर की
आगे एक पल का भी पता नहीं.
कब ,कहा ,कैसे जिंदगी
ढलेगी किसी को पता नहीं .
फिर भी जीता है इंसान
ऐसे जैसे कभी मरेगा नहीं .
स्वयं अनुभूति,आत्मज्ञान,जनकल्याण,
यही है जीवन का विधान.
पढ़े-पढ़ाये इसी तरह सब को करायें स्वयं का ज्ञान.....
पढ़े-पढ़ाये इसी तरह सब को करायें स्वयं का ज्ञान.....
Lifequote .Life philosophy.
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उपरोक्त रचना प्रकाशित है .बिना अनुमति किसी भी तरीके से समूल और विषय-वस्तु के साथ छेड़-छड़ ,न ही प्रयोग करे .
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