बुधवार, 10 अप्रैल 2024

maa aadi shakti prayer

 हे जगत जननी माँ आदि, अनादि शक्ति!

यह संसार तुम्हारी क्षणिक कृपा का ही दृष्टावलोकन है ।
जिस में असंख्य,गृह ,नछ्त्र, तारे मालुम पड़ते हैं, उन्हीं में से किसी बिंदु सदृश्य गृह में नाना प्रकार से जीव जंतु होने का भाव है । तुम्हारे इस भाव रुपी भव सागर में मनुष्य रुप से जाने जाने वाली प्रजाति का भी भाव दिया है ।

और यही मनुष्य होने का बोध उसे बुद्धिमान, बलवान और सामर्थवान होने की चंचलता प्रदान करता है ।
किसी मनुष्य के तुम्हारे सम्मुख कृपा दृष्टि होने भर के भाव से प्रेम,करुणा, वात्सल्य,दया जैसे माधुर्य,प्रसाद गुणों का आविर्भाव होने लगता है ।

यह विचित्र है जिसकी कृपा और लीला को न तो कभी जाना गया,न ही जाना जा सकेगा, यह समस्त संसार एकीकरण के भाव से भी भक्ति करने में सक्षम नहीं जान पड़ता ।

इसी अहौतिकि कृपा की शक्ति ने मुझ क्षण भंगुर तृण से भी तुच्छ मनुष्य रुपी इस बोध ने तुम्हारी भक्ति के प्रति अशक्ति पैदा कर दी । तुम्हारी कृपा दृष्टि का अभिलाषी बना दिया है
। जो तुम्हारा है तुम को ही अर्पण करता हूँ,
बारम्बार सत सत नमन करता हूँ ।
👏
-धर्मेन्द्र मिश्रा

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